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मोदी-ट्रंप मुलाकात पर अमेरिकी राजदूत का बड़ा दावा

Kavita2
24 Aug 2026 9:44 AM IST
मोदी-ट्रंप मुलाकात पर अमेरिकी राजदूत का बड़ा दावा
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नई दिल्ली। फ्रांस में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात को लेकर एक नया दावा सामने आया है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया है कि भारत की ओर से अमेरिका से अनुरोध किया गया था कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की बैठक के बाद कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित न की जाए। उनके मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति इसके लिए सहमत भी हो गए थे, लेकिन बाद में वह इस बात को भूल गए और मीडिया के सवाल लेने लगे।

अमेरिकी राजदूत के इस दावे के बाद मोदी और ट्रंप की उस मुलाकात तथा उसके बाद हुए मीडिया संवाद को लेकर चर्चा तेज हो गई है। गोर के मुताबिक दोनों नेताओं की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने को लेकर पहले ही बात हुई थी। भारतीय पक्ष की तरफ से इसके लिए अनुरोध किया गया था और अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे स्वीकार कर लिया था।

हालांकि राजदूत के अनुसार बाद में घटनाक्रम तय योजना के मुताबिक नहीं रहा। ट्रंप मीडिया के सामने पहुंचे और पत्रकारों के सवालों का जवाब देना शुरू कर दिया। गोर का दावा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति उस समय प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने को लेकर बनी सहमति भूल गए थे। इसके बाद पत्रकारों को दोनों नेताओं से सवाल पूछने का अवसर मिल गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा में रही थी। भारत और अमेरिका के संबंधों के अलावा विभिन्न वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों के कारण दोनों नेताओं की बैठक पर दुनियाभर के मीडिया की नजर थी। ऐसे में बैठक के बाद मीडिया संवाद भी काफी महत्वपूर्ण माना गया।

भारत और अमेरिका के शीर्ष नेताओं की मुलाकात के दौरान आमतौर पर द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, रक्षा, आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम सहित कई मुद्दों पर चर्चा होती है। दोनों देशों के संबंध वैश्विक कूटनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच होने वाली प्रत्येक बैठक को रणनीतिक नजरिए से भी देखा जाता रहा है।

सर्जियो गोर के दावे ने अब उस बैठक के मीडिया प्रबंधन को लेकर नया पहलू सामने रखा है। यदि भारतीय पक्ष ने वास्तव में प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने का अनुरोध किया था तो इसके पीछे क्या कारण था, इसे लेकर राजदूत के दावे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। कूटनीतिक बैठकों में मीडिया कार्यक्रम दोनों पक्षों की सहमति और कार्यक्रम की प्रकृति के आधार पर तय किए जाते हैं।

ऐसी उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस, संयुक्त बयान या मीडिया ब्रीफिंग का प्रारूप पहले से निर्धारित किया जाना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है। कई बार दोनों नेता संयुक्त रूप से मीडिया के सामने आते हैं, जबकि कुछ बैठकों के बाद केवल लिखित बयान जारी किए जाते हैं। इसलिए प्रेस कॉन्फ्रेंस न रखने का निर्णय अपने आप में असामान्य नहीं माना जा सकता।

हालांकि गोर के मुताबिक इस मामले में खास बात यह रही कि प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने की सहमति के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों के सवाल लेना शुरू कर दिया। ट्रंप अपने कार्यकाल के दौरान मीडिया से लगातार बातचीत करने और अचानक सवालों के जवाब देने के लिए जाने जाते रहे हैं। कई मौकों पर वे औपचारिक कार्यक्रम से अलग भी पत्रकारों के सवाल लेते दिखाई दिए हैं।

अब अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी के बाद यह घटनाक्रम एक बार फिर चर्चा में आ गया है। विशेष रूप से यह सवाल उठ रहा है कि भारतीय पक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस से क्यों बचना चाहता था और क्या बैठक के दौरान किसी ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा हुई थी, जिस पर तत्काल सार्वजनिक टिप्पणी से बचने की रणनीति थी। हालांकि इस संबंध में भारतीय पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

मोदी और ट्रंप के बीच व्यक्तिगत राजनीतिक तालमेल भी अक्सर चर्चा में रहा है। दोनों नेताओं ने अलग-अलग अवसरों पर एक-दूसरे के साथ अपने संबंधों का उल्लेख किया है। भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मुलाकातें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं।

G-7 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर होने वाली द्विपक्षीय बैठकों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि वहां कम समय में कई देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत होती है। ऐसे आयोजनों में पहले से निर्धारित कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहता है और मीडिया से बातचीत के लिए सीमित समय उपलब्ध होता है। इसलिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने या न करने का फैसला कई व्यावहारिक कारणों से भी प्रभावित हो सकता है।

अमेरिकी राजदूत के दावे को लेकर अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। विपक्षी दल इस मामले में सरकार से स्पष्टीकरण मांग सकते हैं, जबकि सरकार की ओर से घटनाक्रम के वास्तविक तथ्यों को लेकर प्रतिक्रिया आने का इंतजार रहेगा। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी प्रशासन इस दावे पर कोई अतिरिक्त जानकारी देता है या नहीं।

भारत और अमेरिका के रिश्ते रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों तक फैले हुए हैं। ऐसे में दोनों देशों के नेताओं की मुलाकात के दौरान कही गई बातों और सार्वजनिक बयानों का कूटनीतिक महत्व होता है। यही वजह है कि मीडिया संवाद के स्वरूप को लेकर किया गया यह दावा भी चर्चा का विषय बन गया है।

फिलहाल सर्जियो गोर के दावे ने फ्रांस में हुई मोदी-ट्रंप मुलाकात को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। उनके अनुसार भारतीय पक्ष ने बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने का अनुरोध किया था और ट्रंप इसके लिए तैयार भी हो गए थे, लेकिन बाद में मीडिया के सामने सवाल लेने लगे। अब इस दावे पर भारत या अमेरिका की ओर से किसी विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।

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