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दिल्ली में कांग्रेस की महारैली पर बवाल, राहुल गांधी को व्यापारियों ने लिखा पत्र

Kavita2
24 Oct 2026 12:32 PM IST
दिल्ली में कांग्रेस की महारैली पर बवाल, राहुल गांधी को व्यापारियों ने लिखा पत्र
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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में एक नवंबर को कांग्रेस की प्रस्तावित महारैली को लेकर राजनीतिक हलचल के बीच व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। रामलीला मैदान में होने वाली इस रैली को स्थगित करने की मांग करते हुए दिल्ली के प्रमुख व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखा है। संगठन ने आशंका जताई है कि त्योहारी खरीदारी के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित होने से राजधानी के बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है। व्यापारियों का दावा है कि इस दौरान यातायात प्रतिबंध और भीड़भाड़ के कारण करीब 10 हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।

सीटीआई ने कांग्रेस नेतृत्व से अपील की है कि एक नवंबर को प्रस्तावित महारैली को भैया दूज के बाद यानी 10 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। संगठन का कहना है कि इस समय दिल्ली के बाजारों में दीपावली और धनतेरस की खरीदारी चरम पर रहती है। ऐसे में बड़ी राजनीतिक रैली के कारण सड़कों पर प्रतिबंध लगने से व्यापारियों के साथ आम ग्राहकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली टालने की मांग

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने शनिवार, 24 अक्टूबर को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को पत्र लिखकर व्यापारियों की परेशानियों से अवगत कराया।

उन्होंने पत्र में कहा कि कांग्रेस की ओर से एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी महारैली आयोजित करने की जानकारी मिली है।

व्यापारी संगठन का कहना है कि नवंबर का पहला सप्ताह कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग दिल्ली के प्रमुख बाजारों में खरीदारी करने पहुंचते हैं।

बृजेश गोयल ने राहुल गांधी से आग्रह किया कि व्यापारियों की आर्थिक स्थिति और त्योहारी कारोबार के महत्व को देखते हुए रैली की तारीख पर पुनर्विचार किया जाए।

उन्होंने कहा कि रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने से राजनीतिक कार्यक्रम भी हो सकेगा और व्यापारियों के कारोबार पर संभावित असर भी कम किया जा सकेगा।

दीपावली से पहले 25 हजार करोड़ का कारोबार

सीटीआई के अनुसार, दिल्ली में धनतेरस और दीपावली के दौरान बड़े स्तर पर व्यापारिक गतिविधियां होती हैं।

इस वर्ष धनतेरस छह नवंबर, दीपावली आठ नवंबर और भैया दूज 10 नवंबर को है। इन त्योहारों के मद्देनजर नवंबर के शुरुआती दिनों में बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ रहने की उम्मीद है।

व्यापारी संगठन के मुताबिक, धनतेरस के आसपास दिल्ली के विभिन्न बाजारों में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है।

इस दौरान सोना-चांदी, बर्तन, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन, घरेलू सजावट और अन्य वस्तुओं की बिक्री बढ़ जाती है।

व्यापारियों का कहना है कि यदि इस महत्वपूर्ण समय में बाजारों तक पहुंच प्रभावित हुई, तो कारोबार को नुकसान हो सकता है।

10 हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित होने की आशंका

सीटीआई ने अपने पत्र में दावा किया है कि एक नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित महारैली के कारण करीब 10 हजार करोड़ रुपये तक की व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

संगठन का तर्क है कि बड़ी रैली के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कारण आसपास की सड़कों पर बैरिकेडिंग और यातायात डायवर्जन किया जा सकता है।

इसके अलावा भीड़ नियंत्रण के लिए कुछ रास्तों पर वाहनों की आवाजाही सीमित हो सकती है।

ऐसी स्थिति में माल लेकर आने वाले वाहनों और खरीदारी करने वाले ग्राहकों को बाजारों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।

हालांकि, 10 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा व्यापारी संगठन का अनुमान है। यह वास्तविक रूप से हो चुके आर्थिक नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा नहीं है।

रामलीला मैदान के आसपास 20 बड़े बाजार

व्यापारी संगठन के अनुसार, रामलीला मैदान के लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के करीब 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार मौजूद हैं।

इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, खारी बावली, कश्मीरी गेट और करोल बाग जैसे महत्वपूर्ण बाजार शामिल हैं।

इन बाजारों में दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में व्यापारी और ग्राहक खरीदारी करने आते हैं।

त्योहारी सीजन में इन बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ होती है।

सीटीआई का कहना है कि रैली के कारण यातायात प्रतिबंध लागू होने की स्थिति में इन बाजारों की आपूर्ति व्यवस्था और बिक्री प्रभावित हो सकती है।

रेलवे स्टेशन और मेट्रो यात्रियों को भी हो सकती है परेशानी

व्यापारी संगठन ने आशंका जताई है कि महारैली के दौरान पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक पहुंचने वाले रास्तों पर भी भीड़ बढ़ सकती है।

दिल्ली के बाजारों में बाहर से आने वाले कई खरीदार रेल और मेट्रो सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।

यदि रैली के दौरान सुरक्षा कारणों से रास्ते बंद किए गए या मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश संबंधी प्रतिबंध लगाए गए, तो यात्रियों को असुविधा हो सकती है।

इसके अलावा सामान की ढुलाई करने वाले छोटे मालवाहक वाहनों को भी निर्धारित समय पर बाजारों तक पहुंचने में परेशानी होने की संभावना है।

हालांकि, रैली के लिए यातायात प्रतिबंधों और मेट्रो संचालन में बदलाव का अंतिम विवरण संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों की ओर से जारी निर्देशों के बाद ही स्पष्ट होगा।

अक्टूबर में 3000 करोड़ नुकसान का दावा

सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने दावा किया है कि अक्टूबर महीने में विभिन्न राजनीतिक कार्यक्रमों, प्रदर्शनों और सड़कों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण दिल्ली के व्यापारियों को पहले ही करीब तीन हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

व्यापारी संगठन का कहना है कि बार-बार रास्ते बंद होने और यातायात प्रभावित होने से बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच कम होती है।

ऐसे में कारोबारी पहले से ही परेशान हैं और दीपावली से पहले किसी नए व्यवधान से बचना चाहते हैं।

हालांकि, यह नुकसान भी व्यापारी संगठन का आकलन है। इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित है महारैली

एक नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित विपक्षी गठबंधन की महारैली का संबंध चुनावी प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों से है।

रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर यह कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं।

विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है।

इन आरोपों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।

कांग्रेस इस महारैली के माध्यम से चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों का मुद्दा उठाना चाहती है। वहीं, व्यापारियों ने रैली के उद्देश्य पर टिप्पणी करने के बजाय उसके आयोजन की तारीख को लेकर आपत्ति जताई है।

सभी राजनीतिक दलों से व्यापारियों की अपील

सीटीआई ने केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि धनतेरस, दीपावली और भैया दूज तक प्रमुख बाजार क्षेत्रों के आसपास बड़े राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने से बचें।

संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक प्रदर्शन और रैलियां आयोजित करने का अधिकार महत्वपूर्ण है। हालांकि, ऐसे कार्यक्रमों की तारीख तय करते समय व्यापारियों और आम नागरिकों की परेशानियों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

व्यापारियों का मानना है कि त्योहार समाप्त होने के बाद कार्यक्रम आयोजित करने से कारोबार पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सकता है।

क्या कांग्रेस बदलेगी महारैली की तारीख?

फिलहाल कांग्रेस की ओर से एक नवंबर की प्रस्तावित महारैली को स्थगित करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

व्यापारी संगठन ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व से अनुरोध किया है कि वे रैली की तारीख बदलने पर विचार करें।

दिल्ली के कारोबारी अब कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।

यदि रैली निर्धारित तारीख पर आयोजित होती है, तो बाजारों में पहुंच और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक तैयारियां महत्वपूर्ण होंगी।

वहीं, कार्यक्रम 10 नवंबर के बाद आयोजित किए जाने पर व्यापारियों की मांग पूरी हो सकती है। फिलहाल दिल्ली में राजनीतिक कार्यक्रम और त्योहारी कारोबार के बीच संतुलन बनाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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