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नई दिल्ली। महिला पत्रकार की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर दिल्ली पुलिस का रवैया रविवार को सवालों के घेरे में आ गया। माकपा नेता वृंदा करात ने शिकायत पर FIR दर्ज करने से पहले वीडियो सबूत मांगे जाने को लेकर दिल्ली पुलिस की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता से पहले वीडियो दिखाने के लिए कहना कानून की भावना के खिलाफ है और पुलिस को महिला की शिकायत पर तत्काल कानूनी प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।यह मामला संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद और गरमा गया। प्रदर्शनकारी महिला पत्रकार की शिकायत पर तुरंत FIR दर्ज करने की मांग को लेकर थाने के बाहर जमा हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि महिला ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं और मामले में बिना देरी किए शिकायत दर्ज कर जांच शुरू की जानी चाहिए।वृंदा करात ने दिल्ली पुलिस के उस कथित रवैये पर सवाल उठाया, जिसमें FIR दर्ज करने से पहले घटना से संबंधित वीडियो मांगे जाने की बात सामने आई। उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला ने यौन उत्पीड़न की शिकायत की है तो पुलिस को पहले शिकायत दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच आगे बढ़ानी चाहिए। उनके मुताबिक, शिकायतकर्ता से सबूत के तौर पर पहले वीडियो मांगना उचित प्रक्रिया नहीं है।
FIR के लिए वीडियो क्यों जरूरी?'
ANI से बातचीत में वृंदा करात ने पुलिस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर किसी पत्रकार के साथ यौन उत्पीड़न की शिकायत सामने आई है और पुलिस आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ता से वीडियो मांग रही है, तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है।करात ने सवाल उठाया कि अगर हर शिकायत के साथ पहले वीडियो दिखाने की शर्त रखी जाएगी तो कानून और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया का क्या अर्थ रह जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी महिला को परेशान किए जाने की स्थिति में पुलिस को उसकी शिकायत सुननी चाहिए और मामले की जांच करनी चाहिए।माकपा नेता ने इस रवैये को गलत बताते हुए कहा कि FIR दर्ज करना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने पुलिस से शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की।
संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन
महिला पत्रकार की शिकायत के बाद रविवार को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारी पुलिस से तत्काल FIR दर्ज करने की मांग कर रहे थे। मौके पर मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिकायतकर्ता की बात सुनी जानी चाहिए और आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने पुलिस से यह भी मांग की कि यदि घटनास्थल पर CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मौजूद हैं तो उनकी जांच की जाए।मामले में आरोप सीधे दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों पर लगाए गए हैं। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई और जांच की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस को अपने ही कर्मचारियों से जुड़े आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी तरीके से जांच आगे बढ़ानी चाहिए।
महिला पत्रकार ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता महिला पत्रकार का आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मचारियों ने उनके साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता का बयान, मौके पर मौजूद लोगों के बयान, CCTV फुटेज, मोबाइल रिकॉर्डिंग और अन्य उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। पुलिस जांच के दौरान इन सभी पहलुओं को देख सकती है।वृंदा करात का कहना है कि जांच के लिए उपलब्ध साक्ष्यों को बाद में जुटाया जा सकता है, लेकिन शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को सबूत उपलब्ध होने की शर्त से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस से कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस मामले में दिल्ली पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गई है। खासकर इसलिए क्योंकि शिकायत पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ ही की गई है। ऐसे में पुलिस से निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से शिकायत पर कार्रवाई करने की उम्मीद की जा रही है।वृंदा करात ने कहा कि किसी महिला द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए पहले से वीडियो या किसी अन्य सबूत की अनिवार्य शर्त के सामने नहीं रखा जाना चाहिए।उन्होंने पुलिस के कथित रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि कोई महिला परेशान किए जाने की शिकायत लेकर थाने पहुंचती है तो पुलिस का पहला दायित्व उसकी शिकायत सुनना और कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करना है।
प्रदर्शनकारियों ने मांगी तत्काल कार्रवाई
संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मांग की कि महिला पत्रकार की शिकायत को औपचारिक रूप से दर्ज किया जाए और आरोपों की जांच शुरू की जाए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में पारदर्शिता बरतने की भी अपील की।उनका कहना था कि यदि घटना के वीडियो या CCTV फुटेज उपलब्ध हैं तो जांच के दौरान उन्हें हासिल किया जा सकता है। लेकिन शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को वीडियो की उपलब्धता से जोड़ना उचित नहीं है।वहीं, इस मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा।
राजनीतिक रूप से भी गरमाया मामला
महिला पत्रकार की शिकायत और पुलिस के कथित रवैये को लेकर मामला अब राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बन गया है। वृंदा करात ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सरकार और पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा है।उनका कहना है कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी महिला की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आरोप पुलिस कर्मचारियों पर हैं तो जांच की प्रक्रिया और भी पारदर्शी होनी चाहिए।
फिलहाल संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर हुए प्रदर्शन और वृंदा करात के बयान के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। महिला पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोप गंभीर हैं और उनकी जांच जरूरी है। पुलिस की ओर से शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है और क्या FIR दर्ज होती है, इस पर अब नजर बनी हुई है।मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही रहेगा कि शिकायतकर्ता की बात दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तथ्य सामने लाए जाएं। फिलहाल यौन उत्पीड़न के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
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