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छात्र आत्महत्या मामलों पर बवाल तेज IIT दिल्ली में जवाबदेही की मांग

Ratna Netam
25 Aug 2026 4:27 PM IST
छात्र आत्महत्या मामलों पर बवाल तेज IIT दिल्ली में जवाबदेही की मांग
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नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली में छात्र की आत्महत्या के बाद छात्रों में गुस्सा बढ़ गया है। इसी बीच कॉकरोच जंता पार्टी (CJP) ने IIT दिल्ली और देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। संगठन ने दावा किया है कि पिछले पांच सालों में IIT संस्थानों में 65 छात्रों की आत्महत्या चिंता का विषय है और इसे एक गंभीर संरचनात्मक समस्या के रूप में देखा जाना चाहिए।
कॉकरोच जंता पार्टी ने IIT दिल्ली में हुए हालिया छात्र की मौत के बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया है। संगठन का कहना है कि देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, मानसिक तनाव और संस्थागत सहायता की कमी जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
IIT दिल्ली में छात्र की मौत के बाद बढ़ा आक्रोश
IIT दिल्ली में हाल ही में एक एमएससी फिजिक्स छात्र की मौत के बाद परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। पुलिस के अनुसार, छात्र की मौत परिसर में छठी मंजिल से गिरने के बाद हुई। मामले की जांच जारी है और संस्थान ने भी घटना पर दुख जताते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
घटना के बाद IIT दिल्ली के छात्रों ने संस्थान के प्रशासन से जवाबदेही की मांग की। प्रदर्शनकारी छात्रों ने छात्र कल्याण व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और संस्थागत प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए।
65 आत्महत्याएं' के आंकड़े पर उठे सवाल
कॉकरोच जंता पार्टी के प्रवक्ता अशुतोष रांका ने कहा कि IIT जैसे संस्थानों में लगातार हो रही छात्र आत्महत्याएं केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं हैं, बल्कि व्यवस्था से जुड़ी चिंता का विषय हैं। संगठन ने दावा किया कि पांच वर्षों में IITs में 65 छात्रों की मौत आत्महत्या के कारण हुई है।
CJP का कहना है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेने वाले छात्रों पर पहले से ही काफी दबाव होता है। प्रतियोगिता, पढ़ाई का बोझ, भविष्य की चिंता और व्यक्तिगत समस्याएं कई बार छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।
छात्रों ने मांगी जवाबदेही
IIT दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने प्रशासन से कई मांगें रखी हैं। इनमें छात्र कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा, स्वतंत्र जांच और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली को मजबूत करने की मांग शामिल है।
छात्रों का कहना है कि किसी भी छात्र को परेशानी के समय अकेला महसूस नहीं होना चाहिए। उनका आरोप है कि कई बार संस्थानों में छात्रों की समस्याओं को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया जाता।
मानसिक स्वास्थ्य बना बड़ा मुद्दा
देश के बड़े शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चर्चा लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अच्छे अंक और करियर की दौड़ को सफलता का पैमाना नहीं बनाया जा सकता।
IIT जैसे संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र देश के सबसे प्रतिभाशाली छात्रों में शामिल होते हैं, लेकिन यहां पहुंचने के बाद भी उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पढ़ाई का दबाव, प्लेसमेंट की चिंता, परिवार की उम्मीदें और अकेलापन मानसिक तनाव को बढ़ा सकते हैं।
संस्थानों को बदलनी होगी रणनीति
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों के लिए बेहतर काउंसलिंग व्यवस्था, नियमित मानसिक स्वास्थ्य जांच और ऐसा माहौल जरूरी है जहां छात्र अपनी समस्याएं खुलकर बता सकें।
कई बार छात्र डर या झिझक के कारण मदद मांगने से बचते हैं। ऐसे में संस्थानों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार करें जहां हर छात्र को सहायता मिल सके।
IIT प्रशासन की भूमिका पर बहस
IIT दिल्ली प्रशासन ने घटना पर दुख जताते हुए कहा है कि मामले की जांच की जा रही है। वहीं छात्रों की ओर से उठाए गए सवालों के बाद संस्थान की छात्र सहायता व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
छात्र संगठनों का कहना है कि केवल घटना के बाद प्रतिक्रिया देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से मजबूत व्यवस्था बनानी होगी।
कॉकरोच जंता पार्टी ने उठाई आवाज
कॉकरोच जंता पार्टी ने IIT दिल्ली के छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि शिक्षा व्यवस्था में छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
संगठन पहले भी शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहा है। अब IIT दिल्ली की घटना के बाद उसने संस्थानों में सुधार की मांग तेज कर दी है।
आगे क्या होगा?
IIT दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद अब नजर प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच प्रक्रिया पर है। छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
IIT जैसे संस्थान देश के भविष्य के इंजीनियर और वैज्ञानिक तैयार करते हैं। ऐसे में यहां पढ़ने वाले छात्रों का मानसिक और भावनात्मक रूप से सुरक्षित रहना उतना ही जरूरी है जितना कि उनकी शैक्षणिक सफलता।
फिलहाल '5 साल में 65 सुसाइड' के दावे ने एक बार फिर देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में छात्र तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।
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