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नई दिल्ली: ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल 2026’ पर संसद में चर्चा के दौरान सरकार को विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। बिल पर बहस के दौरान विपक्षी सदस्यों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठाए। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने युवा नेताओं के जरिए सरकार का पक्ष मजबूती से रखा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।
संसद में इस बिल पर चर्चा मंगलवार रात तक जारी रही। विपक्ष के नेता राहुल गांधी बुधवार को इस विषय पर अपनी बात रखेंगे, जबकि सरकार की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह बिल पर जवाब देंगे। इस बीच, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बिल का समर्थन करने की घोषणा की है।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने केंद्र सरकार को पेपर लीक के मुद्दे पर घेरा। विपक्षी नेताओं का कहना था कि परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के उद्देश्य से वर्ष 2024 में बनाए गए कानून के बावजूद पेपर लीक जैसी घटनाएं पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी हैं।
विपक्ष ने सवाल उठाया कि यदि पहले से कानून मौजूद है तो उसके प्रभावी क्रियान्वयन में क्या कमी रह गई, जिसके कारण छात्रों को बार-बार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नेताओं ने कहा कि परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, क्योंकि लाखों युवाओं का भविष्य इन परीक्षाओं से जुड़ा होता है।
इसके अलावा विपक्ष ने प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि देश के कई हिस्सों में प्राथमिक स्कूलों के बंद होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है और सरकार को इस दिशा में अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन का असर
परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के खिलाफ हाल में हुए विरोध-प्रदर्शनों का असर संसद की बहस में भी दिखाई दिया। विपक्षी दलों ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों का हवाला देते हुए कहा कि युवाओं में परीक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ रही है।
विपक्ष का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि यह लाखों छात्रों के सपनों और मेहनत से जुड़ा मामला है। इसलिए सरकार को केवल कानून बनाने के बजाय उसकी प्रभावी निगरानी और सख्त कार्रवाई पर भी ध्यान देना चाहिए।
बीजेपी ने युवा नेताओं को उतारा मैदान में
विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए बीजेपी ने अपने युवा नेताओं को आगे किया। पार्टी के युवा सांसदों ने चर्चा के दौरान सरकार की नीतियों का समर्थन किया और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।
बीजेपी नेताओं ने आम बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल करते हुए युवाओं तक सरकार का संदेश पहुंचाने की कोशिश की। उनका कहना था कि सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
बीजेपी की ओर से यह भी कहा गया कि नए प्रावधानों का उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा करना और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाना है।
बिल का उद्देश्य और सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि पब्लिक एग्जामिनेशन में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त प्रावधान जरूरी हैं। परीक्षा में नकल, पेपर लीक और अन्य अनियमित गतिविधियों से लाखों छात्रों के भविष्य पर असर पड़ता है।
संशोधन बिल के जरिए सरकार परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। सरकार का तर्क है कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था युवाओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
TMC ने किया बिल का समर्थन
चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने बिल का समर्थन करने की बात कही। हालांकि, पार्टी ने भी परीक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ चिंताएं और सुझाव सामने रखे।
TMC का कहना था कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सख्त नियमों के साथ-साथ उनके सही तरीके से लागू होने की जरूरत है। पार्टी ने छात्रों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।
बुधवार को होगी सरकार की प्रतिक्रिया
बिल पर बहस के अगले चरण में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बुधवार को अपनी बात रखेंगे। इसके बाद सरकार की ओर से पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह जवाब देंगे।
संसद में होने वाली इस बहस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि परीक्षा सुधार और पेपर लीक का मुद्दा देशभर में छात्रों और युवाओं के बीच महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।
युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित रही बहस
पूरी चर्चा के दौरान युवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। विपक्ष ने जहां सरकार की नीतियों और कानूनों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए, वहीं सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के अपने प्रयासों को सामने रखा।
‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल 2026’ पर आगे की चर्चा और सरकार के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगा कि इसमें किन बदलावों को अंतिम रूप दिया जाता है। फिलहाल संसद में यह मुद्दा राजनीतिक बहस के साथ-साथ युवाओं के भविष्य से जुड़े बड़े सवाल के रूप में सामने आया है।





