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दिल्ली विधानसभा में प्रश्नकाल को लेकर घमासान, BJP और AAP विधायकों में तीखी नोकझोंक

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों के बीच प्रश्नकाल को लेकर जमकर बहस हुई। मॉनसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल के लिए पर्याप्त समय नहीं दिए जाने के आरोप को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा, जिसके बाद सदन में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
आम आदमी पार्टी के विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर प्रश्नकाल से बच रही है, ताकि विपक्ष के सवालों का जवाब न देना पड़े। AAP के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) संजीव झा और विधायक जरनैल सिंह ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि विधानसभा में प्रश्नकाल लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके जरिए जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाता है।
AAP विधायकों का कहना था कि प्रश्नकाल नहीं होने से विधायकों को अपने क्षेत्र की समस्याएं और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने का उचित अवसर नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जवाबदेही से बचने के लिए सदन की प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है।
विपक्ष के आरोपों पर दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने AAP के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि पिछली सरकार के दौरान भी विधानसभा में प्रश्नकाल की स्थिति बेहतर नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि AAP सरकार के पांच साल के कार्यकाल में विधानसभा की 74 बैठकों के दौरान केवल नौ बार ही प्रश्नकाल हुआ था।
मंत्री ने कहा कि वर्ष 2024 में, जब आम आदमी पार्टी सरकार अपने अंतिम चरण में थी, तब विधानसभा की एक भी बैठक में प्रश्नकाल नहीं हुआ। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए काम कर रही है।
प्रवेश साहिब सिंह ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने से पहले विपक्ष को अपने पुराने रिकॉर्ड को देखना चाहिए। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि विपक्ष को सरकार के जनहित कार्यों से परेशानी हो रही है।
उन्होंने AAP विधायकों पर तंज कसते हुए कहा कि वे पहले अपने नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) को ढूंढें। उनके इस बयान के बाद सदन का माहौल और गरमा गया तथा दोनों पक्षों के विधायक आमने-सामने आ गए।
विधानसभा में हुई इस बहस ने दिल्ली की राजनीति में बढ़ती सियासी गर्मी को भी उजागर किया है। बीजेपी, जो वर्तमान में दिल्ली की सत्ता में है, लगातार पिछली AAP सरकार के कामकाज पर सवाल उठाती रही है। वहीं, आम आदमी पार्टी विपक्ष की भूमिका में सरकार से जवाब मांगने और जनहित के मुद्दे उठाने का दावा कर रही है।
प्रश्नकाल को विधानसभा की कार्यवाही का अहम हिस्सा माना जाता है। इसमें विधायक सरकार के मंत्रियों से विभिन्न विभागों से जुड़े सवाल पूछते हैं और संबंधित मंत्री जवाब देते हैं। इसके जरिए सरकारी योजनाओं, नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर चर्चा होती है।
AAP विधायकों का कहना है कि प्रश्नकाल के अभाव में विधायकों की निगरानी और सवाल पूछने की भूमिका कमजोर होती है। वहीं, बीजेपी का तर्क है कि विपक्ष को राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय अपने कार्यकाल के रिकॉर्ड पर भी ध्यान देना चाहिए।
सदन में हुई बहस के दौरान दोनों दलों के विधायकों ने एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने के आरोप लगाए। हालांकि, विधानसभा की कार्यवाही आगे जारी रही।
दिल्ली विधानसभा में यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बीजेपी और AAP के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों दल एक-दूसरे के फैसलों और पुराने कार्यकाल को लेकर हमलावर हैं।
फिलहाल, प्रश्नकाल को लेकर उठा विवाद दिल्ली की राजनीति में एक नए मुद्दे के रूप में सामने आया है। आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही और सरकार-विपक्ष के बीच तालमेल पर सभी की नजर बनी रहेगी।





