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दिल्ली-एनसीआर
दिल्ली में CEC के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान बवाल
Ratna Netam
8 Oct 2026 2:59 PM IST

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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस और विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। बुधवार, 7 अक्टूबर को आयोजित प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात दिल्ली पुलिस के कई कर्मचारियों ने प्रदर्शनकारियों पर उनके साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी करने के आरोप लगाए हैं। पुलिसकर्मियों का दावा है कि वे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों का पालन कराने और प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक वहां से हटाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर उनकी वर्दी से नेमप्लेट तोड़ दीं, टोपियां छीनकर फेंक दीं और उन्हें धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया। इन आरोपों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर विवाद बढ़ गया है।
दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल देवेंद्र संधू ने प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पुलिसकर्मी शुरुआत से ही भीड़ को शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे। उनके अनुसार, प्रदर्शन वाले इलाके में धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे। इसी वजह से वहां मौजूद लोगों से बार-बार अनुरोध किया जा रहा था कि वे निर्धारित स्थान से हट जाएं और पुलिस की बसों में बैठ जाएं।कांस्टेबल संधू ने कहा कि पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश कर रहे थे और किसी तरह का विवाद नहीं चाहते थे। इसके बावजूद कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बात नहीं मानी। उन्होंने आरोप लगाया कि भीड़ में मौजूद लोगों ने पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करना शुरू कर दिया। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आईं।
कांस्टेबल देवेंद्र संधू ने अपने बयान में कहा, "हम सुरक्षा के बीच उन्हें शांति से समझा रहे थे कि यहां धारा 163 लागू है, इसलिए कृपया यहां से चले जाएं। हमने उनसे ऐसा कहा, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं मानी। इसलिए हम उनसे बस में बैठने का विनम्रता से अनुरोध कर रहे थे। हम उन्हें शांति से संभालने की कोशिश कर रहे थे। हममें से लगभग सभी सही वर्दी में थे। उन्होंने पहले हमारे नेमप्लेट तोड़े, फिर हमारे सिर से टोपियां छीनकर फेंक दीं। इसके बाद उन्होंने हमें पीछे से खींचा और धक्का देकर नीचे गिरा दिया।"उनके इस बयान के बाद प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हुए कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, कांस्टेबल द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं के अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं।
दरअसल, बुधवार को कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया था। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई विपक्षी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था। प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे, जबकि पुलिस ने कानून-व्यवस्था और लागू प्रतिबंधों का हवाला देते हुए उन्हें रोकने की कार्रवाई की। इस दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी।
विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई कथित घटनाओं को लेकर दिल्ली पुलिस ने कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। हालांकि, एफआईआर में लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।इस पूरे विवाद के बीच पुलिसकर्मियों की नेमप्लेट को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। इससे पहले जंतर-मंतर पर तैनात कुछ पुलिसकर्मियों की वर्दी पर नेमप्लेट नहीं दिखाई देने के वीडियो सामने आए थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया था कि कुछ कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर पहचान उजागर होने और उन्हें निशाना बनाए जाने की चिंता थी। वहीं, कुछ अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि पुलिसकर्मियों को नेमप्लेट नहीं पहनने का कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया था।
दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के अलावा पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप भी सामने आए हैं। इससे पहले कुछ महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर बदसलूकी और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन शिकायतों को जांच के लिए अपराध शाखा को भेजा गया था। ऐसे में प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।धारा 163 के तहत प्रशासन को सार्वजनिक शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने का अधिकार मिलता है। ऐसे आदेशों का उद्देश्य संभावित टकराव और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति को रोकना होता है। दूसरी ओर, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। इसलिए किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून का पालन सुनिश्चित करने के साथ नागरिक अधिकारों का सम्मान करना भी आवश्यक है।फिलहाल दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट का मामला चर्चा में है। कांस्टेबल देवेंद्र संधू सहित पुलिसकर्मियों के बयानों ने घटना को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं। पुलिस की शिकायतों और प्रदर्शन से संबंधित अन्य आरोपों पर आगे होने वाली जांच से ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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