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UPI शुल्क विधेयक लोकसभा से पारित

Kavita2
7 Aug 2026 9:29 AM IST
UPI शुल्क विधेयक लोकसभा से पारित
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नई दिल्ली। लोकसभा ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिया, जिसके तहत केंद्र सरकार को बैंकों तथा अन्य सेवा प्रदाताओं को यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों के जरिए किए जाने वाले लेनदेन पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार प्राप्त हो गया है। यह विधेयक सदन में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच बिना चर्चा के ही ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

विधेयक के पारित होने के बाद अब सरकार के पास यह अधिकार होगा कि वह समय-समय पर अधिसूचना जारी कर यूपीआई, डिजिटल वॉलेट, इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर तथा अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों पर शुल्क लगाने अथवा उससे संबंधित व्यवस्था तय करने के लिए बैंकों और अधिकृत सेवा प्रदाताओं को अनुमति प्रदान कर सके। हालांकि, विधेयक के पारित होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी डिजिटल भुगतान पर तत्काल शुल्क लागू हो जाएगा। शुल्क लागू करने या उसकी दरों का निर्धारण सरकार द्वारा अलग से अधिसूचना जारी करने के बाद ही प्रभावी होगा।

लोकसभा में जब यह विधेयक विचारार्थ प्रस्तुत किया गया, उस समय विपक्षी दल विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित रही। इसी बीच सरकार ने विधेयक को पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई और विपक्ष की अनुपस्थिति तथा शोर-शराबे के बीच इसे ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई। विपक्षी दलों ने बिना विस्तृत चर्चा के विधेयक पारित किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि सरकार का कहना है कि विधायी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप पूरी की गई है।

डिजिटल भुगतान प्रणाली पिछले कुछ वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। यूपीआई के माध्यम से प्रतिदिन करोड़ों लेनदेन किए जाते हैं और छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक इसका व्यापक उपयोग हो रहा है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अब तक अधिकांश यूपीआई भुगतान उपभोक्ताओं के लिए निःशुल्क रहे हैं। ऐसे में इस विधेयक के पारित होने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भविष्य में यूपीआई लेनदेन पर भी शुल्क देना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधेयक सरकार को एक वैधानिक ढांचा उपलब्ध कराता है, जिसके माध्यम से आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों के लिए शुल्क संबंधी नीति बनाई जा सकती है। बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता लंबे समय से डिजिटल भुगतान अवसंरचना के रखरखाव, साइबर सुरक्षा, तकनीकी उन्नयन तथा परिचालन लागत का हवाला देते हुए शुल्क व्यवस्था पर विचार किए जाने की मांग करते रहे हैं। दूसरी ओर, उपभोक्ता संगठनों और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सामान्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो इससे डिजिटल भुगतान अपनाने की गति प्रभावित हो सकती है।

वित्तीय क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि भविष्य में किसी प्रकार का शुल्क लागू किया जाता है तो सरकार को उपभोक्ताओं, व्यापारियों और बैंकिंग संस्थानों के हितों के बीच संतुलन बनाना होगा। विशेष रूप से छोटे व्यापारियों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसी नीति बनानी होगी, जिससे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और डिजिटल अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी बनी रहे।

सरकार की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यूपीआई या अन्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क कब और किस प्रकार लगाया जाएगा। विधेयक केवल सरकार को ऐसा करने का वैधानिक अधिकार प्रदान करता है। शुल्क की दरें, लागू होने की सीमा, किन लेनदेन पर यह लागू होगा तथा किन्हें छूट मिलेगी, जैसे सभी पहलुओं का निर्धारण भविष्य में जारी होने वाली अधिसूचनाओं या नियमों के माध्यम से किया जाएगा।

इस घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। विपक्षी दलों ने बिना चर्चा के विधेयक पारित किए जाने को लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताया है और मांग की है कि ऐसे महत्वपूर्ण आर्थिक विषयों पर संसद में विस्तृत बहस होनी चाहिए। वहीं सरकार का पक्ष है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत बनाने और नियामकीय स्पष्टता प्रदान करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था के लगातार विस्तार के बीच यह विधेयक आने वाले समय में भुगतान प्रणाली की संरचना और नीति निर्माण पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इस अधिकार का उपयोग किस प्रकार करती है और यदि भविष्य में शुल्क संबंधी कोई निर्णय लिया जाता है तो उसका स्वरूप क्या होगा तथा उससे आम उपभोक्ताओं, व्यापारियों और बैंकिंग क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

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