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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान बोले, 'हर एफटीए और समझौता राष्ट्रहित में'
SHIDDHANT
13 Feb 2026 7:34 PM IST

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Delhi दिल्ली। भारत के किसानों और राष्ट्रीय हितों पर चोट करने की कोशिश करने वालों को करारा जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ संदेश दिया कि भारत की हर ट्रेड डील और एफटीए में न तो खेत बिके हैं, न किसान, बल्कि देश की कृषि की रीढ़ को और मजबूत किया गया है। उन्होंने दो टूक कहा कि जो लोग किसानों के नाम पर भय और अफवाह का कारोबार चला रहे हैं, उनकी सारी कथित राजनीति झूठ के सहारे खड़ी है, जबकि सच्चाई यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के किसानों के हित 'पूरी तरह सुरक्षित' हैं और रहेंगे।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली के 64वें दीक्षांत समारोह में अपने उद्बोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल के सभी मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर उठाए जा रहे सवालों पर स्पष्ट, तथ्यात्मक और सख्त राजनीतिक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अभी जितने भी समझौते हुए हैं – चाहे यूरोपीय यूनियन के साथ हों, दुनिया के अन्य देशों के साथ हों या अमेरिका के साथ – सभी फैसले राष्ट्रहित में लिए गए हैं और भारत के किसानों के हितों को सबसे ऊपर रखा गया है।
उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यूएसए के साथ हुए समझौते में भी भारत के राष्ट्रीय हितों को पूरी तरह संरक्षित किया गया है और किसानों के हितों की सर्वोच्च रक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ‘हम लुट गए, बर्बाद हो गए, देश बिक गया’ जैसे नारे लगाकर झूठ और डर का माहौल बनाते हैं, लेकिन वे भारत के किसान की मजबूती और आत्मविश्वास को सहन नहीं कर पाते, इसलिए लगातार झूठ ही बोलते रहते हैं, अफवाहों का बाजार फैलाते हैं।
चौहान ने तीखे राजनीतिक अंदाज में कहा कि ऐसे लोग 'झूठ ही खाना, झूठ ही पीना, झूठ में जगना, झूठ में सोना, झूठ बिछौना' वाली राजनीति कर रहे हैं और उन्होंने झूठ की दुकान खोल रखी है। उन्होंने इस प्रतिष्ठित मंच से देशवासियों और किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के किसानों के हित सर्वथा सुरक्षित हैं, पूरी तरह से सुरक्षित हैं। मंत्री ने साफ किया कि हमारी प्रमुख फसलें – गेहूं, मक्का, चावल, सोया, मोटे अनाज – इनके लिए किसी तरह से द्वार नहीं खोले गए हैं। डेयरी उत्पाद और पोल्ट्री उत्पाद भी पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित हैं।
उन्होंने कहा कि हमारी सब्जियां और फल सहित जिन-जिन उत्पादों का उल्लेख जरूरी था, उन सभी में भारत के किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है और किसी भी समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता या आय पर प्रतिकूल असर पड़े। चौहान ने स्पष्ट किया कि सिर्फ वही चीजें जिनकी भारत को जरूरत है और जिन्हें हम पहले से अलग-अलग देशों से इम्पोर्ट करते रहे हैं, उन्हें ध्यान में रखकर निर्णय लिए गए हैं, ताकि देश की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके, लेकिन किसानों के हितों पर कहीं भी आंच न आए।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने अपने प्रेरणादायी एवं दूरदर्शी उद्बोधन में कहा कि आईएआरआई केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारत की कृषि प्रगति का प्राण केंद्र है। उन्होंने याद दिलाया कि हरित क्रांति की ऐतिहासिक शुरुआत इसी पावन भूमि से हुई और जब-जब देश खाद्यान्न संकट से जूझा, तब-तब पूसा ने समाधान प्रस्तुत किया। चौहान ने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की चर्चा करते हुए कहा कि 'विकसित कृषि और समृद्ध किसान' इस संकल्प की आधारशिला है। कृषि को उन्होंने न केवल अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ, बल्कि करोड़ों परिवारों की आजीविका, संस्कृति और आत्मनिर्भरता का आधार बताया।
मंत्री शिवराज सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “आप केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि भविष्य के कृषि-नेता हैं। आपकी खोजें आने वाली पीढ़ियों की थाली भरेंगी।” उन्होंने कृषि में 5 प्रतिशत वृद्धि दर बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए विज्ञान-आधारित, टिकाऊ एवं समावेशी कृषि मॉडल अपनाने का आह्वान किया।
चौहान ने जलवायु परिवर्तन, मृदा क्षरण, जल संकट एवं पोषण सुरक्षा जैसी चुनौतियों के समाधान हेतु नवाचार और अनुसंधान को अनिवार्य बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जिंदगी केवल मौज-मस्ती के लिए नहीं है, बल्कि उद्देश्यपूर्ण जीवन के लिए है> बड़ा लक्ष्य तय करो, उसका रोडमैप बनाओ और मेहनत से उस पर चलो।
भारत रत्न डॉ. एमएस स्वामीनाथन का स्मरण कर उन्हें प्रणाम करते और उनका उदाहरण देते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि अकाल को देखकर उन्होंने जिद ठानी कि धरती को ऐसा बनाना है कि कभी अकाल न पड़े, और उसी से हरित क्रांति का मार्ग प्रशस्त हुआ। उसी तरह हर युवा को कोई बड़ा लक्ष्य तय कर आगे बढ़ना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जल-संरक्षण एवं माइक्रो-इरिगेशन तकनीकों के प्रसार, मृदा स्वास्थ्य संवर्धन, प्राकृतिक खेती, जैविक इनपुट, ड्रोन एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट कृषि पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए कम लागत वाली तकनीकों का विकास समय की मांग है और इसमें आईएआरआई तथा कृषि वैज्ञानिकों की भूमिका निर्णायक है। चौहान ने स्पष्ट संदेश दिया कि “प्रयोगशाला से भूमि तक” केवल नारा नहीं, बल्कि प्रत्येक वैज्ञानिक का दायित्व है कि शोध प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक खेत तक पहुंचे और किसान की आय बढ़ाए।
युवा शक्ति की भूमिका रेखांकित करते हुए मंत्री शिवराज सिंह ने विद्यार्थियों को “नौकरी खोजने वाला” के बजाय “नौकरी निर्माता” बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने एग्री-स्टार्टअप, एग्री-प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को बाजार से जोड़ने तथा भारत को कृषि निर्यात में अग्रणी बनाने का आह्वान किया।
समारोह के बाद मीडिया से चर्चा में केंद्रीय मंत्री चौहान ने डिग्री प्राप्त सभी बेटों-बेटियों को शुभकामनाएं देते हुए अपेक्षा व्यक्त की कि उनका जीवन, जो कृषि शिक्षा उन्होंने प्राप्त की है, उसके अनुरूप खेती और किसानों की सेवा में बीते। उन्होंने कहा कि अन्न, फल, सब्जियों और दालों का उत्पादन बढ़ाने के काम में इन युवाओं का योगदान मिलना चाहिए, ताकि भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और पोषणयुक्त आहार जनता तक पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी जरूरत भी पूरी करे और दुनिया की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे – यही आज के कृषि स्नातकों से उनकी अपेक्षा है।
समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और रामनाथ ठाकुर, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट, आईएआरआई के निदेशक डॉ. सीएच श्रीनिवास राव सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और वैज्ञानिक उपस्थित थे। इस वर्ष कुल 470 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 290 एमएससी/एमटेक तथा 180 पीएचडी छात्र शामिल हैं।
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