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यूजीसी होगा इतिहास, उच्च शिक्षा के लिए बनेगा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान: जगदीश कुमार
SHIDDHANT
18 Dec 2025 7:52 PM IST

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Delhi दिल्ली। देश की उच्च शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), जो 1953 में स्थापित हुआ था और 1956 में संसद के अधिनियम के तहत वैधानिक निकाय बना, अब इतिहास बनने जा रहा है। इसकी जगह विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) बनेगा, जो देश के सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों का एकीकृत नियामक होगा। विकसित भारत शिक्षा विनियम परिषद, नियामक की भूमिका निभाएगी। विकसित भारत शिक्षा गुणवत्ता परिषद, प्रत्यायन और मान्यता से जुड़े काम देखेगी और विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद, शैक्षणिक मानकों को तय करेगी।
सरकार ने उच्च शिक्षा के नियमन में एकीकरण लाने का निर्णय लिया है। इसके तहत यूजीसी, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) का विलय कर विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) बनाया जाएगा। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप है। वीबीएसए के लागू होने के बाद पहली बार आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को भी इस दायरे में लाया जाएगा, जो अब तक यूजीसी या एआईसीटीई के अधीन नहीं थे। इसका मतलब है कि देश की सभी उच्च शिक्षा संस्थाओं को एक समान नियामक और गुणवत्ता मानक मिलेगा।
पूर्व यूजीसी अध्यक्ष जगदीश कुमार ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भारत का हायर एजुकेशन सेक्टर इस समय तेजी से बदल रहा है। उन्होंने बताया कि देश में इस वक्त 1200 से ज्यादा यूनिवर्सिटी और करीब 1500 कॉलेज हैं। इतनी बड़ी व्यवस्था को चलाने के लिए अब पुराने तरीके के रेगुलेशन काम के नहीं रह गए हैं। इसी वजह से नई शिक्षा नीति 2020 में साफ कहा गया कि भारत के हायर एजुकेशन रेगुलेटरी सिस्टम में बड़ा बदलाव जरूरी है।
जगदीश कुमार ने बताया कि अभी हमारे देश में चार बड़े रेगुलेटर हैं—यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीटीई, और काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर। अगर किसी यूनिवर्सिटी में अलग-अलग तरह के कोर्स चल रहे हों, जैसे जनरल डिग्री (बीएससी, बीकॉम), इंजीनियरिंग, टीचर ट्रेनिंग (बीएड), और आर्किटेक्चर, तो उस एक ही संस्थान को चार अलग-अलग रेगुलेटर के पास जाना पड़ता है। हर जगह अलग आवेदन, अलग नियम, और अलग प्रक्रिया होती है। इससे संस्थानों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि दिक्कत सिर्फ इतनी नहीं है, बल्कि कई बार इन रेगुलेटर के नियम आपस में टकराते भी हैं। कुछ जगह नियम ओवरलैप करते हैं और कुछ जगह एक-दूसरे के उलट होते हैं। इसी वजह से एनईपी 2020 में यह सुझाव दिया गया कि देश में एक सिंगल, हार्मोनाइज्ड रेगुलेटरी सिस्टम होना चाहिए, जो सरल हो, कम ब्यूरोक्रेटिक हो, और पहले से अनुमान लगाया जा सके कि प्रक्रिया क्या होगी।
इसी सोच के तहत सरकार ने वीबीएसए बिल पेश किया है। यह बिल पहले जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी में जाएगा, वहां चर्चा होगी और उसके बाद संसद में पास होने पर इसे लागू किया जाएगा। इसके बाद एक एपेक्स बॉडी बनाई जाएगी, जिसे डेवलप्ड इंडिया एजुकेशन एजेंसी कहा जाएगा। इसी के तहत तीन अलग-अलग वर्टिकल बनाए जाएंगे।
पहला होगा रेगुलेटरी काउंसिल। इसमें यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीटीई और काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर की सारी रेगुलेटरी पावर को एक जगह रखा जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि रेगुलेशन से जुड़े सारे टकराव और भ्रम खत्म हो जाएंगे और सभी संस्थानों के लिए एक जैसे, स्पष्ट नियम बन पाएंगे।
दूसरा वर्टिकल होगा एक्रेडिटेशन काउंसिल। अभी एक्रेडिटेशन और रैंकिंग के लिए एनएसी, एनबीए, एनआईआरएफ जैसे अलग-अलग सिस्टम हैं। वीबीएसए के तहत इन सभी को एक ही वर्टिकल में लाया जाएगा, ताकि संस्थानों को अलग-अलग जगह डेटा न देना पड़े और प्रक्रिया आसान हो जाए।
तीसरा वर्टिकल होगा स्टैंडर्ड्स काउंसिल। आज शिक्षा में अलग-अलग विषयों के अलग-अलग मानक हैं। अगर कोई छात्र मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन लेना चाहता है या एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर पढ़ना चाहता है, तो उसे काफी दिक्कत होती है। स्टैंडर्ड्स काउंसिल का काम होगा पूरे देश में शिक्षा के लिए समान और स्पष्ट मानक तय करना।
जगदीश कुमार ने बताया कि शिक्षक हमारे एजुकेशन सिस्टम का बेहद अहम हिस्सा हैं, इसलिए स्टैंडर्ड्स काउंसिल शिक्षकों के लिए नए ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार करेगी और आधुनिक टीचिंग व लर्निंग मेथड्स को बढ़ावा देगी। तीन अलग-अलग वर्टिकल होने से काउंसिलों के बीच हितों का टकराव नहीं होगा, लेकिन ये सभी एपेक्स बॉडी के जरिए आपस में मिलकर काम करेंगी।
छात्रों को लेकर जगदीश कुमार ने कहा कि वीबीएसए में छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। हर संस्थान को अनिवार्य रूप से एक छात्र शिकायत निवारण प्रणाली बनानी होगी। आज के समय में छात्र काफी तनाव और चिंता में रहते हैं, ऐसे में उनकी शिकायतों का समय पर समाधान बहुत जरूरी है।
इसके अलावा, छात्रों का फीडबैक भी बहुत अहम होगा। कोर्स, शिक्षक, इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्र कल्याण योजनाओं पर छात्रों की राय को मान्यता और रैंकिंग में शामिल किया जाएगा।
सबसे बड़ा बदलाव पारदर्शिता को लेकर होगा। अब सभी संस्थानों को अपनी पूरी जानकारी एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक करनी होगी। कौन से कोर्स चल रहे हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा है, स्टूडेंट वेलनेस प्रोग्राम क्या हैं, शिक्षकों की योग्यता क्या है, और सबसे अहम, संस्थान के ऑडिट किए गए फाइनेंशियल अकाउंट्स। इससे छात्र, माता-पिता और आम जनता सब कुछ देख सकेंगे और संस्थान ज्यादा जवाबदेह बनेंगे।
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