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यूजीसी के सचिव मनीष जोशी होंगे कार्यमुक्त, श्यामा रथ बनेंगी नई सचिव
SHIDDHANT
11 April 2026 12:17 AM IST

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Delhi दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी को कार्यमुक्त करने का निर्णय लिया गया है। उच्च शिक्षा प्रशासन में यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है। यूजीसी सचिव 25 अप्रैल 2026 को कार्यमुक्त होंगे। उनके स्थान पर अब अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की सदस्य सचिव प्रो. श्यामा रथ को यह अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
शुक्रवार को यह निर्णय यूजीसी के सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से लिया गया है। हालांकि यह निर्णय 25 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश में उच्च शिक्षा व्यवस्था, विशेषकर यूजीसी की नीतियों और नियमों को लेकर व्यापक बहस चल रही है। प्रो. मनीष जोशी के कार्यकाल के दौरान यूजीसी ने कई महत्वपूर्ण पहलें कीं, जिनमें विश्वविद्यालयों में समानता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के प्रयास शामिल थे। हालांकि, हाल ही में जारी यूजीसी के नए नियमों ने देशभर में विवाद खड़ा कर दिया है।
दरअसल, जनवरी 2026 में यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा के नाम पर नए नियम लागू किए थे। इन नियमों के तहत सभी संस्थानों में 'इक्विटी कमेटी' बनाने और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने का प्रावधान किया गया। लेकिन इन नियमों को लेकर कई पक्षों ने आपत्ति जताई। कुछ याचिकाओं में कहा गया कि नियमों की परिभाषाएं अस्पष्ट हैं और ये सभी वर्गों के लिए समान रूप से लागू नहीं होते। यही नहीं छात्रों समेत समाज के कई वर्गों का मानना था कि इन नियमों से उल्टा भेदभाव की स्थिति पैदा हो सकती है।
इस विवाद ने कानूनी रूप ले लिया और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। मामले की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट में प्रारंभिक सुनवाई के दौरान कहा गया कि नियमों की भाषा अस्पष्ट है और इनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद फिलहाल पुराने 2012 के नियमों को फिलहाल लागू रखने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा गया कि ऐसे नियम समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं और इनके संवैधानिक पहलुओं की गहराई से जांच आवश्यक है।
इसके अलावा, यह मामला 2019 से जुड़ी याचिकाओं से उत्पन्न हुआ था, जिसमें उच्च शिक्षा संस्थानों में कथित भेदभाव के मामलों को लेकर सख्त नियमों की मांग की गई थी। वर्तमान में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और इसकी अगली सुनवाई के आधार पर इन नियमों का भविष्य तय होगा। इस बीच, देशभर में छात्र संगठनों, शिक्षकों और सामाजिक समूहों के बीच इस मुद्दे पर लगातार बहस जारी है।
ऐसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण समय में प्रो. श्यामा राठ को यूजीसी के सचिव का अतिरिक्त प्रभार मिलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई सचिव के सामने अब न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां होंगी, बल्कि इस विवादित नीति को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने, सभी पक्षों को साथ लेकर चलने और उच्च शिक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की भी बड़ी चुनौती होगी।
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