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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। वरिष्ठ और युवा नेताओं के बीच संतुलन बनाने के साथ पार्टी ने मुस्लिम समुदाय को भी प्रतिनिधित्व दिया है। उत्तर प्रदेश से आने वाले **प्रोफेसर तारिक मंसूर** और **कुंवर बासित अली** को महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली है। तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा गया है, जबकि कुंवर बासित अली को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।
नई नियुक्तियों को उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। राज्य में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और भाजपा पिछले कुछ वर्षों से पसमांदा मुस्लिम समाज के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश करती रही है। ऐसे में दोनों मुस्लिम नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी देने के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि पार्टी की पूरी नई टीम देखें तो अल्पसंख्यक समुदायों से कुल छह नेताओं को स्थान मिला है।
कौन हैं प्रोफेसर तारिक मंसूर?
प्रोफेसर तारिक मंसूर शिक्षा जगत से राजनीति में आए चर्चित चेहरों में शामिल हैं। वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय यानी AMU के कुलपति रह चुके हैं। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति की ओर कदम बढ़ाया और भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य बनाया।
तारिक मंसूर को भाजपा ने पहले भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी थी। नितिन नबीन की नई टीम में भी उन पर भरोसा कायम रखा गया है और उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा गया है। नई राष्ट्रीय टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए हैं, जिनमें मंसूर उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
उनकी मौजूदगी को भाजपा की मुस्लिम समाज, खासकर शिक्षित और पसमांदा वर्ग के बीच संपर्क बढ़ाने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के लिए तारिक मंसूर ऐसा चेहरा हैं जिनका शिक्षा जगत में लंबा अनुभव रहा है और जो मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों पर पार्टी की बात सामने रखने में भूमिका निभा सकते हैं।
कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा की कमान
दूसरा महत्वपूर्ण नाम **कुंवर बासित अली** का है। उन्हें भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। यह जिम्मेदारी इसलिए अहम है क्योंकि अल्पसंख्यक मोर्चा भाजपा और मुस्लिम, सिख, ईसाई समेत विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के बीच संगठनात्मक संपर्क बढ़ाने का प्रमुख माध्यम है।
बासित अली उत्तर प्रदेश भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और लंबे समय से संगठन से जुड़े हुए हैं। अब राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका कार्यक्षेत्र पूरे देश में होगा।
अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर उनके सामने विभिन्न राज्यों में संगठन को मजबूत करने, अल्पसंख्यक समुदाय के बीच भाजपा की नीतियों और केंद्र सरकार की योजनाओं को पहुंचाने तथा नए कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ने जैसी जिम्मेदारियां होंगी।
पसमांदा मुस्लिमों पर BJP की नजर?
दोनों नेताओं का उत्तर प्रदेश से होना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा पिछले कुछ वर्षों से पसमांदा मुस्लिम समुदाय तक पहुंच बनाने के लिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित करती रही है। पसमांदा शब्द का इस्तेमाल मुस्लिम समाज के सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए किया जाता है।
तारिक मंसूर और बासित अली को राष्ट्रीय संगठन में प्रमुख जिम्मेदारियां देने को इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। खासकर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की कोशिश उन सामाजिक वर्गों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की हो सकती है जहां पारंपरिक रूप से उसका समर्थन सीमित रहा है।
नई टीम में छह अल्पसंख्यक नेता
नितिन नबीन की नई टीम में विविध सामाजिक समूहों के प्रतिनिधित्व पर भी ध्यान दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय टीम में अल्पसंख्यक समुदायों से कुल छह नेताओं को जगह मिली है। इसके अलावा 10 महिला नेताओं को भी अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं।
नई टीम में वसुंधरा राजे, राम माधव, बैजयंत जय पांडा, रेखा वर्मा और तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं स्मृति ईरानी की राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में संगठन में महत्वपूर्ण वापसी हुई है।
2027 के चुनाव से पहले अहम संदेश
उत्तर प्रदेश में भाजपा के सामने 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता बरकरार रखने की चुनौती होगी। ऐसे में पार्टी सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने के साथ उन मतदाता समूहों तक भी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है जहां उसे अपेक्षाकृत कम समर्थन मिलता रहा है।
तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए रखना और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा की राष्ट्रीय कमान देना इसी लिहाज से महत्वपूर्ण है। अब दोनों नेताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन की नीतियों को मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों तक पहुंचाने तथा पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर समर्थन बढ़ाने की होगी।
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