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हरीश रावत की यात्रा पर कांग्रेस में घमासान शैलजा ने दी नसीहत

Ratna Netam
5 Oct 2026 9:55 PM IST
हरीश रावत की यात्रा पर कांग्रेस में घमासान शैलजा ने दी नसीहत
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देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जन संवाद यात्रा’ को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद और उत्तराखंड मामलों की प्रभारी कुमारी शैलजा ने सोमवार को साफ कहा कि पार्टी का अपना संगठनात्मक सिस्टम है और सभी नेताओं को उसी के तहत काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर किसी भी तरह के “व्यक्तिगत एजेंडे” के लिए जगह नहीं है। शैलजा ने रावत को उनकी यात्रा को लेकर पत्र लिखे जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
कुमारी शैलजा ने कहा कि कांग्रेस के अपने कार्यक्रम पहले से चल रहे हैं और इसी दौरान हरीश रावत ने अलग से यात्रा शुरू की है। इसी संदर्भ में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि रावत पार्टी और आलाकमान की चिंताओं पर विचार करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी उनका पक्ष सुनेगी और इसके बाद आगे की स्थिति पर विचार किया जाएगा।
शैलजा ने कहा, “पार्टी के कार्यक्रम चल रहे हैं। इसी बीच उन्होंने जो किया, उस संदर्भ में मैंने उन्हें पत्र लिखा है। उम्मीद है कि वह पार्टी और आलाकमान की बातों पर विचार करेंगे, लेकिन वह अपना पक्ष रखेंगे; हम उनकी बात सुनेंगे।”
दरअसल, हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जन संवाद यात्रा’ को लेकर प्रदेश कांग्रेस के भीतर पिछले कुछ दिनों से चर्चा तेज है। पार्टी नेतृत्व ने यात्रा को लेकर इसलिए आपत्ति जताई क्योंकि इसे प्रदेश कांग्रेस संगठन के आधिकारिक कार्यक्रमों से अलग आयोजित किया गया। शैलजा ने एक अक्टूबर को रावत को भेजे पत्र में कहा था कि यात्रा के संबंध में न तो उनसे और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से चर्चा की गई। उन्होंने विधानसभा चुनाव नजदीक होने का हवाला देते हुए पार्टी के एकजुट होकर काम करने पर जोर दिया था।
शैलजा ने पत्र में कहा था कि चुनाव से पहले किसी तरह का समानांतर कार्यक्रम पार्टी के हित में नहीं होगा। उन्होंने रावत से ऐसे कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया था। पार्टी नेतृत्व का जोर इस बात पर है कि चुनावी तैयारियों से जुड़े कार्यक्रम संगठन के स्तर पर सामूहिक रूप से किए जाएं, ताकि नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय बना रहे।
हालांकि, पार्टी नेतृत्व की आपत्ति के बावजूद हरीश रावत ने सोमवार को अपनी यात्रा जारी रखी। उनकी यात्रा का जसपुर से हल्द्वानी तक का चरण निर्धारित था, जो काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी से होकर गुजरना था। रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी समर्थकों से यात्रा में शामिल होने की अपील की। उन्होंने अपनी यात्रा को उत्तराखंड में जनता से संवाद और कांग्रेस को मजबूत करने की मुहिम के रूप में पेश किया है।
रावत ने यात्रा जारी रखने का संकेत देते हुए कहा कि चुनौती बड़ी है, लेकिन उत्तराखंड के लिए उनका संकल्प भी मजबूत है। उन्होंने समर्थकों से आगे बढ़ने और जनता के बीच जाकर संवाद करने का आह्वान किया। इस रुख के बाद पार्टी नेतृत्व और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच यात्रा को लेकर मतभेद और स्पष्ट हो गए।
मामले में कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पार्टी के अभियान सभी नेताओं के साथ मिलकर कांग्रेस के बैनर तले चलाए जाएंगे। उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर चलाए जाने वाले अभियानों को स्वीकार नहीं किए जाने की बात कही और संगठन द्वारा तय सामूहिक कार्यक्रमों पर जोर दिया।
उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व संगठनात्मक एकजुटता पर जोर दे रहा है। हरीश रावत राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रहती है और उनकी जन संवाद यात्रा ने एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस के भीतर नेतृत्व तथा चुनावी रणनीति को लेकर बहस तेज कर दी है।
दूसरी ओर, रावत अपनी यात्रा को जनता तक पहुंचने के प्रयास के तौर पर सामने रख रहे हैं। सोमवार को यात्रा के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर जनता के बीच सक्रिय रहने की अपील की। काशीपुर में उन्होंने दावा किया कि जनता बदलाव चाहती है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लोगों की भावनाओं को समझकर आगे बढ़ना चाहिए।
कुमारी शैलजा के बयान से फिलहाल यह स्पष्ट है कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर संगठनात्मक अनुशासन और सामूहिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि उन्होंने रावत के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखा है और कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
हरीश रावत की यात्रा जारी रहने और पार्टी नेतृत्व की आपत्ति के बीच अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद क्या रास्ता निकलता है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए संगठनात्मक तालमेल महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है और पार्टी नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से यह संदेश दिया है कि चुनावी अभियान व्यक्तिगत स्तर के बजाय सामूहिक रणनीति के तहत आगे बढ़ाए जाने चाहिए।
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