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दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा की बढ़ीं मुश्किलें, थप्पड़ मारने के आरोप पर हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

Kavita2
8 Oct 2026 11:48 AM IST
दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा की बढ़ीं मुश्किलें, थप्पड़ मारने के आरोप पर हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ कथित मारपीट और थप्पड़ मारने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस से मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। याचिका पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य के निरीक्षण के दौरान कथित तौर पर थप्पड़ मारे जाने की घटना से संबंधित है। पीड़ित युवक ने आरोप लगाया है कि मंत्री प्रवेश वर्मा ने निरीक्षण के दौरान उसके साथ मारपीट की थी। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों की ओर से याचिका की स्वीकार्यता पर उठाई गई आपत्ति का भी संज्ञान लिया। अदालत ने पुलिस से मामले में अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी देने को कहा है।

जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने की सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने सड़क निरीक्षण के दौरान युवक को थप्पड़ मारा था। शिकायत के बावजूद पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

सुनवाई के दौरान प्रतिवादी अधिकारियों ने याचिका की स्वीकार्यता पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इस प्रकार की याचिका पर सुनवाई किए जाने से पहले कानूनी प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए।

अदालत ने दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। हालांकि, हाईकोर्ट ने अभी मंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

सड़क निरीक्षण के दौरान हुआ था विवाद

यह मामला पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य के निरीक्षण के दौरान हुई घटना से जुड़ा है।

जानकारी के अनुसार, 27 सितंबर 2026 को पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे थे।

इसी दौरान वहां मौजूद एक युवक और मंत्री के बीच विवाद हो गया। युवक की पहचान 22 वर्षीय साहिब सिंह के रूप में हुई है।

साहिब सिंह ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाने के दौरान मंत्री ने उसके साथ मारपीट की और थप्पड़ मारा।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया था। इसके बाद दिल्ली की राजनीति में विवाद शुरू हो गया।

पीड़ित युवक ने पुलिस से की थी शिकायत

कथित मारपीट के बाद साहिब सिंह ने दिल्ली पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मंत्री प्रवेश वर्मा ने सार्वजनिक स्थान पर उसके साथ मारपीट की।

दिल्ली पुलिस ने शिकायत के आधार पर असंज्ञेय अपराध की रिपोर्ट यानी एनसीआर दर्ज की थी।

पुलिस के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 के तहत स्वेच्छा से चोट पहुंचाने से संबंधित प्रावधानों के आधार पर कार्रवाई की गई थी।

हालांकि, पीड़ित पक्ष पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं था। उसका कहना था कि मामले में अधिक प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

इसके बाद अदालत से हस्तक्षेप करने की मांग की गई।

हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई की भी हुई थी मांग

इससे पहले सोमवार, 5 अक्टूबर को भी दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की तत्काल सुनवाई कराने का अनुरोध किया गया था।

एक वकील ने न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ के सामने मामला उठाया था।

उन्होंने कहा था कि युवक के साथ कथित मारपीट के बावजूद मंत्री के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।

हालांकि, उस समय हाईकोर्ट ने मामले की तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि याचिका पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुनवाई की जा सकती है।

इसके बाद गुरुवार को न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई।

पुलिस की कार्रवाई पर उठाए गए सवाल

याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष पुलिस की ओर से अब तक की गई कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं।

मामले में यह महत्वपूर्ण है कि पुलिस ने पहले असंज्ञेय अपराध की रिपोर्ट दर्ज की थी।

कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, असंज्ञेय अपराध के मामलों में पुलिस को सामान्यतः जांच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति की आवश्यकता होती है।

ऐसे में पीड़ित पक्ष यह जानना चाहता है कि शिकायत पर आगे क्या कार्रवाई की गई और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों की जांच किस स्तर तक पहुंची है।

हाईकोर्ट की ओर से स्टेटस रिपोर्ट मांगे जाने के बाद पुलिस को संबंधित कार्रवाई का विवरण अदालत के सामने प्रस्तुत करना होगा।

हालांकि, रिपोर्ट की अंतिम समयसीमा और अगली सुनवाई की तारीख की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

आप विधायक जरनैल सिंह पर भी दर्ज हुई थी FIR

इस मामले में एक अलग कानूनी विवाद भी सामने आया था। आम आदमी पार्टी के विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ पीडब्ल्यूडी के एक सहायक अभियंता की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी।

शिकायत में सरकारी कर्मचारी को काम करने से रोकने और धमकाने जैसे आरोप लगाए गए थे।

पुलिस ने मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ युवक की शिकायत पर एनसीआर दर्ज की थी, जबकि दूसरी ओर पीडब्ल्यूडी अधिकारी की शिकायत के आधार पर अलग एफआईआर दर्ज की गई।

इस घटनाक्रम के बाद भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी।

हालांकि, दोनों शिकायतों की कानूनी स्थिति अलग है और संबंधित आरोपों की जांच के आधार पर आगे कार्रवाई की जानी है।

आम आदमी पार्टी ने मंत्री पर साधा निशाना

घटना का वीडियो सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तिलक नगर क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण में खराब सामग्री इस्तेमाल की गई है। केजरीवाल ने मंत्री को पद से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाने वाले युवक के साथ मारपीट की गई।

हालांकि, सड़क निर्माण में अनियमितता और मंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर किसी अंतिम न्यायिक निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।

याचिका की स्वीकार्यता पर भी होगा विचार

दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल याचिका की स्वीकार्यता से संबंधित रहा।

प्रतिवादी अधिकारियों ने इस आधार पर याचिका का विरोध किया।

किसी याचिका की स्वीकार्यता से संबंधित प्रश्न में अदालत यह निर्धारित करती है कि संबंधित मामला उसके अधिकार क्षेत्र में आता है या नहीं और याचिकाकर्ता ने उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई है या नहीं।

हालांकि, इस मामले में प्रतिवादी पक्ष की आपत्ति का विस्तृत आधार और उस पर अदालत का अंतिम निर्णय अभी स्पष्ट नहीं है।

हाईकोर्ट ने फिलहाल पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगकर मामले में आगे की सुनवाई का रास्ता खुला रखा है।

अब पुलिस की रिपोर्ट पर टिकी नजर

दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा से जुड़े इस मामले में हाईकोर्ट की कार्रवाई के बाद पुलिस की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

रिपोर्ट में शिकायत के संबंध में अब तक उठाए गए कदमों और कानूनी कार्रवाई की स्थिति की जानकारी दी जाएगी।

अदालत संबंधित पक्षों की दलीलों और पुलिस की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद आगे का निर्णय ले सकती है।

फिलहाल मंत्री के खिलाफ लगाए गए मारपीट के आरोप अदालत में साबित नहीं हुए हैं। हाईकोर्ट ने भी इस चरण पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया है।

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