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दिल्ली में जनजाति सांस्कृतिक समागम 24 मई को, देशभर से जुटेंगे लोग

SHIDDHANT
21 May 2026 10:50 PM IST
दिल्ली में जनजाति सांस्कृतिक समागम 24 मई को, देशभर से जुटेंगे लोग
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Delhi दिल्ली। जनजाति सुरक्षा मंच और जनजाति जागृति समिति के संयुक्त तत्वाधान में ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ 24 मई को दिल्ली में आयोजित होगा। देशभर से विभिन्न जनजातीय समुदायों के लोग इसमें भाग लेंगे और जागरूकता अभियान का हिस्सा बनेंगे। नरेंद्र भाटिया ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि इस समागम में लोग स्वयं के खर्चे पर आ रहे हैं। इसमें किसी भी संगठन की ओर से कोई आर्थिक सहयोग नहीं है। हमारा उद्देश्य यह प्रदर्शित करना है कि भारत के जितने भी जनजातीय समुदाय हैं, वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को लेकर यहां पहुंच रहे हैं। शोभायात्रा में दिल्ली में इनकी संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन देखने को मिलेगा। दिल्ली में रह रहे लगभग कई जनजातीय समुदाय के लोग भी इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। वे आयोजन में अपना पूर्ण सहयोग व योगदान दे रहे हैं और इसे एक महान कार्यक्रम के रूप में संपन्न करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इससे हमारे जनजातीय भाई-बहन, विशेषकर वर्तमान पीढ़ी को अपनी संस्कृति, सभ्यता, लोक नृत्य-गीत और पूजा-पद्धति तथा धर्म के बारे में सीख मिलेगी और प्रेरणा प्राप्त होगी। लोग जागरूक होंगे, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में हो रहे पलायन पर रोक लग सके। युवा पीढ़ी अपने इतिहास और समृद्ध विरासत के बारे में जान सके, यही हमारा मुख्य लक्ष्य और उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के अंदर जागरूकता पैदा करना है। साथ ही हम यह भी दिखाना चाहते हैं कि कुछ ऐसे जनजातीय समुदाय के लोग भी हैं, जिन्होंने आज तक ट्रेन की यात्रा नहीं की है। उन्हें यह अवसर प्राप्त होगा। जब वे दिल्ली पहुंचेंगे, दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत की राजधानी में, जो स्वयं में एक ऐतिहासिक जगह है, तो उन्हें अपनी दुनिया और दिल्ली की दुनिया के बीच का अंतर महसूस होगा। इससे उन्हें विविधता में एकता का प्रत्यक्ष अनुभव होगा। यदि छोटे स्तर पर जाएं तो सभी जनजातियों की अपनी कुछ खास
विशेषताएं
होती हैं।
नरेंद्र भाटिया ने बताया कि लोगों को एक-दूसरे की इन विशेषताओं को देखने, सीखने और जानने का मौका मिलेगा। इस कार्यक्रम से लाभान्वित होकर जब लोग अपने क्षेत्रों में लौटेंगे तो एक संकल्प के साथ कि जहां हैं, वहां हम समृद्ध हैं। हमारी आने वाली पीढ़ी ऐसी हो जो हमारी इस विरासत, परंपरा और संस्कृति को बचाए रखे और उसी के अनुसार जीवन निर्वाह करे। छोटे-छोटे प्रलोभन में न आएं और पलायन से बचे रहें। हम लोगों को अपनी विरासत, संस्कृति, सभ्यता, लोक नृत्य और पूजा-पद्धति को समझने, जानने और उसे साथ लेकर चलने के लिए प्रेरित करेंगे।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह कार्यक्रम बहुत सफल होने वाला है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियां शिरकत कर रही हैं। खासकर जनजातीय समुदाय के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षा, साहित्य, संगीत, कला के क्षेत्र में अवॉर्डी, सेलिब्रिटी, चिंतक और विचारक हिस्सा ले रहे हैं। उनके चिंतन, मनन और उद्बोधन को सुनकर लोग लाभान्वित होंगे और एक संकल्प के साथ वापस लौटेंगे। इससे जनजातीय समुदाय को नई दिशा और दशा मिलेगी।
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