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दिल्ली-एनसीआर
खाद्य कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बढ़ाई टर्नओवर सीमा
SHIDDHANT
13 March 2026 8:48 PM IST

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एफएसएसएआई
Delhi दिल्ली: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कारोबार करना आसान बनाने और खाद्य सुरक्षा के मजबूत मानकों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण नियामकीय और प्रक्रियागत सुधारों को मंजूरी दी है। ये सुधार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न हितधारकों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद अंतिम रूप दिए गए हैं। ये नीति आयोग द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ऑन नॉन-फाइनेंशियल रेगुलेटरी रिफॉर्म्स की सिफारिशों के अनुरूप हैं।
नियामकीय बोझ को कम करने के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पंजीकरण और लाइसेंस की स्थायी वैधता के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। पहले पंजीकरण और लाइसेंस को समय-समय पर नवीनीकरण कराना पड़ता था, लेकिन संशोधित व्यवस्था के तहत अब इनकी वैधता स्थायी होगी, जिससे बार-बार नवीनीकरण की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
इस सुधार से खाद्य व्यवसाय संचालकों के लिए अनुपालन लागत, कागजी कार्रवाई और लाइसेंसिंग प्राधिकरणों के साथ बार-बार संपर्क की आवश्यकता में काफी कमी आएगी। साथ ही व्यवसाय की निरंतरता बेहतर होगी। इससे नियामकीय संसाधनों को प्रवर्तन, निगरानी और क्षमता-निर्माण गतिविधियों पर अधिक प्रभावी ढंग से केंद्रित किया जा सकेगा।
इन सुधारों के तहत 1 अप्रैल 2026 से पंजीकरण के लिए टर्नओवर की सीमा 12 लाख से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपए कर दी गई है, जबकि 50 करोड़ रुपए तक के कारोबार के लिए राज्य लाइसेंस लागू होगा और इससे अधिक कारोबार पर केंद्रीय लाइसेंस आवश्यक होगा। इस तर्कसंगत व्यवस्था का उद्देश्य राज्य प्राधिकरणों की भूमिका को सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने अधिकार क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा नियमों की निगरानी, सुविधा और प्रवर्तन पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान दे सकें।
खाद्य व्यवसाय संचालकों, विशेषकर सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए यह कदम सरल अनुपालन आवश्यकताओं, कम कागजी कार्रवाई और शुल्क, पूर्व-निरीक्षण की समाप्ति तथा तत्काल पंजीकरण जैसी सुविधाएं प्रदान करेगा, जिससे कारोबार करना आसान होगा।
दोहरे अनुपालन की समस्या को दूर करने के लिए नगर निगमों या टाउन वेंडिंग समितियों में स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 के तहत पंजीकृत स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को एफएसएसएआई के तहत स्वतः पंजीकृत माना जाएगा। इस कदम से 10 लाख से अधिक स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को विभिन्न विभागों में अलग-अलग पंजीकरण कराने की आवश्यकता से राहत मिलेगी। इससे अनुपालन का बोझ कम होगा और स्ट्रीट फूड विक्रेता अपनी आजीविका, स्वच्छता और व्यवसाय संचालन पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
इसके अलावा, एक तकनीक-सक्षम और गतिशील जोखिम-आधारित निरीक्षण प्रणाली भी लागू की गई है, जिससे नियमों का पालन करने वाले खाद्य व्यवसाय संचालकों को प्रोत्साहन मिलेगा और बार-बार होने वाले निरीक्षणों में कमी आएगी। इस व्यवस्था के तहत निरीक्षण तय जोखिम कारकों के आधार पर किया जाएगा, जैसे खाद्य वस्तु की प्रकृति से जुड़ा जोखिम, खाद्य व्यवसाय संचालक का पिछला अनुपालन रिकॉर्ड, थर्ड-पार्टी ऑडिट में प्रदर्शन और प्रवर्तन तथा निगरानी गतिविधियों से प्राप्त जानकारी। इससे पारदर्शी और केंद्रित नियामकीय निगरानी सुनिश्चित होगी और नियमों का पालन करने वाले व्यवसायों पर अनावश्यक बोझ कम होगा।
सरकार के अनुसार, ये सुधार नागरिकों को सुरक्षित खाद्य उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के साथ-साथ खाद्य उद्योग के लिए पारदर्शी, कुशल और व्यवसाय-अनुकूल नियामकीय वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
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