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दिल्ली-एनसीआर
दिल्ली में TMC का प्रदर्शन पुलिस कार्रवाई पर भड़की पार्टी
Ratna Netam
10 Oct 2026 4:53 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। शनिवार को तृणमूल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे उसके नेताओं और सांसदों को पुलिस ने रोक दिया। टीएमसी ने इस कथित कार्रवाई को 'सुपर इमरजेंसी' और 'लोकतंत्र के लिए काला दिन' करार देते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर वह किस बात से इतनी डरी हुई है।
तृणमूल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दिल्ली पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताई। पार्टी का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान नेताओं को नारे लगाने और पोस्टर दिखाने से रोका गया। इसके बाद पुलिस ने कथित तौर पर पार्टी के कई नेताओं को हिरासत में लेकर पुलिस वाहनों में बैठा दिया।पार्टी ने इस घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। टीएमसी का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने इस अधिकार के इस्तेमाल में बाधा डालने का प्रयास किया।
टीएमसी ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, "सुपर इमरजेंसी चल रही है। जब हमारी माननीय चेयरपर्सन और माननीय सांसद शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तो दिल्ली पुलिस ने आकर निर्देश दिया कि नारे लगाने और पोस्टर दिखाने की अनुमति नहीं है। क्यों?"पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि कोई राजनीतिक दल शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहा है, तो उसे नारे लगाने और पोस्टर दिखाने से क्यों रोका जा रहा है। टीएमसी ने इस कथित प्रतिबंध को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की।टीएमसी ने दावा किया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी नेताओं को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया और उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। हालांकि, नेताओं को कहां ले जाया गया और हिरासत की कानूनी स्थिति क्या थी, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
ममता बनर्जी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया
दिल्ली में हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेन और अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई मध्य दिल्ली के साउथ एवेन्यू इलाके में हुई, जहां ममता बनर्जी प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश कर रही थीं। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद उन्होंने बस स्टॉप के पास धरना भी दिया।यह विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे विवाद से जुड़ा था। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में पक्षपातपूर्ण बदलाव किए जाने के आरोपों को खारिज किया है।
मुंह पर पट्टी लगाकर ममता बनर्जी ने जताया विरोध
पुलिस कार्रवाई के दौरान ममता बनर्जी ने अपने मुंह पर पट्टी लगाकर प्रतीकात्मक विरोध भी दर्ज कराया। उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए स्थिति को आपातकाल से भी गंभीर बताया। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध और मुखर किया।टीएमसी ने कहा कि उसकी अध्यक्ष और सांसद शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वाले नेताओं को हिरासत में लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी।पार्टी ने अपने बयान में लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उसका कहना है कि असहमति व्यक्त करना लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और किसी भी सरकार को राजनीतिक विरोध से डरना नहीं चाहिए।
पुलिस ने कानून-व्यवस्था का दिया हवाला
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं होने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता का हवाला दिया। पुलिस के अनुसार, संभावित अशांति को रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लिया गया। राजधानी के कई हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और प्रमुख मार्गों पर बैरिकेड लगाए गए।पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं। विपक्षी दल इसे विरोध के अधिकार पर प्रतिबंध बता रहे हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए कदम उठाए गए।
हिरासत में लिए गए नेताओं ने भी उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस के सांसद समीरुल इस्लाम ने भी हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें और अन्य नेताओं को करीब डेढ़ घंटे तक दिल्ली में पुलिस वाहन में घुमाया गया और यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है।इस्लाम ने इस स्थिति को 'सुपर इमरजेंसी' बताते हुए पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। उनका बयान तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक रुख के अनुरूप था, जिसमें पार्टी ने हिरासत की प्रक्रिया और विरोध प्रदर्शन पर लगाए गए प्रतिबंधों पर सवाल उठाए।
विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर राजनीतिक बहस
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तथा बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है। हालांकि, इन अधिकारों पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। ऐसे में किसी प्रदर्शन को रोकने या प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई की वैधता उसके कानूनी आधार और परिस्थितियों पर निर्भर करती है।तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार की घटना को लोकतंत्र से जुड़े अधिकारों का मुद्दा बनाते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा। पार्टी का आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध करने वाले नेताओं को रोककर असहमति की आवाज दबाने का प्रयास किया गया।दिल्ली में हुई इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक विवाद और बढ़ गया है। एक ओर टीएमसी और अन्य विपक्षी दल पुलिस की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने को अपनी प्राथमिकता बता रहा है।फिलहाल ममता बनर्जी और पार्टी सांसदों की हिरासत को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने अपने आधिकारिक बयान में दोहराया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने का अधिकार महत्वपूर्ण है और इस अधिकार के इस्तेमाल को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों का जवाब दिया जाना चाहिए।
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