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चार फ्रीज बैंक खातों पर TMC को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
Ratna Netam
1 Oct 2026 3:27 PM IST

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट को उन चार बैंक खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक आपराधिक जांच के सिलसिले में डेबिट फ्रीज किया था। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी करने से परहेज करते हुए कहा कि मुख्य मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से मामले की सुनवाई जल्द करने का अनुरोध किया।
सुप्रीम कोर्ट के सामने तृणमूल कांग्रेस की ओर से कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें चार बैंक खातों को संचालित करने के लिए अंतरिम राहत नहीं दी गई थी। ये खाते इंडियन बैंक में बताए गए हैं और पश्चिम बंगाल पुलिस की जांच के बाद इनसे डेबिट लेन-देन रोक दिया गया था। मामला विधायक विश्वनाथ दास की शिकायत के आधार पर दर्ज आपराधिक मामले से जुड़ा है।
जानकारी के मुताबिक विश्वनाथ दास ने 18 जून 2026 को बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कथित गैरकानूनी गतिविधियों, प्रभाव के दुरुपयोग और बेईमानी से किए गए वित्तीय लेन-देन से जुड़े धन को कुछ बैंक खातों में भेजा गया। उसी दिन FIR दर्ज की गई थी। ये आरोप अभी जांच और न्यायिक कार्यवाही का विषय हैं।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बैंक खातों को फ्रीज किए जाने की प्रक्रिया और उसके आधार पर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि खातों पर रोक लगने से पार्टी की सामान्य गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। उनका कहना था कि पार्टी यह दावा नहीं कर रही है कि उसके पास पैसे नहीं हैं, बल्कि समस्या यह है कि वह खातों का संचालन नहीं कर पा रही है।
सिंघवी ने अदालत में कहा कि पार्टी के ऑडिट किए गए खातों के अनुसार रोजमर्रा की गतिविधियों पर न्यूनतम मासिक खर्च करीब 12.15 करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि इसमें चुनावी गतिविधियां, कानूनी खर्च और अन्य अतिरिक्त व्यय शामिल नहीं हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मौजूदा चार खातों का मामला पहले से चल रहे दूसरे बैंक खातों के विवाद से अलग है।
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने अदालत के सामने कहा कि यह अलग FIR से जुड़ा मामला है और जांच में नए आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है। उन्होंने पार्टी के भीतर चल रहे गुटीय विवाद का भी उल्लेख किया। दूसरी ओर सिंघवी ने राज्य की ओर से रखे गए कुछ आरोपों को मौजूदा FIR से असंबंधित बताते हुए उनका विरोध किया।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की मेरिट पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया। पीठ ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल कर कलकत्ता हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने की इच्छुक नहीं है। इसके साथ ही हाई कोर्ट से मुख्य मामले की सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया गया।
इससे पहले 27 अगस्त को कलकत्ता हाई कोर्ट ने इन चार खातों को संचालित करने की अनुमति देने के लिए अतिरिक्त अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट के सामने भी TMC की ओर से पुलिस कार्रवाई और बैंक खातों को फ्रीज किए जाने को चुनौती दी गई थी। अदालत ने मामले को विस्तृत सुनवाई के लिए लंबित रखा था।
यह विवाद पार्टी के अन्य तीन HDFC बैंक खातों से जुड़े पुराने मामले से अलग है। उन खातों को प्रवर्तन निदेशालय की जांच के सिलसिले में फ्रीज किया गया था। जुलाई में कलकत्ता हाई कोर्ट ने पार्टी को अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी की निगरानी में रोजमर्रा और मासिक खर्च के लिए उन खातों को संचालित करने की अनुमति दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उस अंतरिम व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं किया था।
मौजूदा मामले में जिन चार खातों पर रोक लगी है, वे अलग आपराधिक जांच से जुड़े हैं। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि इन खातों के फ्रीज रहने से संगठनात्मक कामकाज प्रभावित हो रहा है। वहीं राज्य पक्ष का कहना है कि जांच को कानून के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए और इस स्तर पर खातों पर लगी रोक हटाना उचित नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह विवाद लंबित है कि पार्टी की वास्तविक प्रतिनिधि इकाई कौन है और संबंधित धन पर किसका अधिकार है। अदालत ने इस व्यापक विवाद का फैसला मौजूदा कार्यवाही में नहीं किया और इसे संबंधित मंचों पर लंबित विषय माना।
चार बैंक खातों में लगभग 804 करोड़ रुपये होने की बात भी अदालत में सामने आई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने धन के स्वामित्व या आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम राय नहीं दी। अदालत का गुरुवार का आदेश केवल अंतरिम राहत के सवाल तक सीमित रहा।
अब इस मामले में अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम कलकत्ता हाई कोर्ट में होगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तेजी से सुनवाई के अनुरोध के बाद हाई कोर्ट मुख्य याचिका पर आगे विचार करेगा। वहां पुलिस द्वारा बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई, FIR और तृणमूल कांग्रेस की ओर से उठाए गए कानूनी सवालों पर विस्तृत सुनवाई हो सकती है।
फिलहाल चारों खातों पर डेबिट फ्रीज जारी रहेगा और TMC गुट को उन्हें सामान्य रूप से संचालित करने की अंतरिम अनुमति नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसने आरोपों या पक्षों के दावों की मेरिट पर कोई फैसला नहीं दिया है और अंतिम कानूनी सवालों पर सुनवाई हाई कोर्ट में जारी रहेगी।
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