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जस्टिस सुनीता अग्रवाल समेत तीन न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
Ratna Netam
6 Oct 2026 5:13 PM IST

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को तीन नए न्यायाधीशों ने पद की शपथ ली। जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने शपथ दिलाई। तीनों न्यायाधीश इससे पहले अलग-अलग हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस के पद पर कार्यरत थे। इनके सुप्रीम कोर्ट में शामिल होने के बाद शीर्ष अदालत की कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है।
शपथ ग्रहण समारोह मंगलवार दोपहर 3.30 बजे आयोजित किया गया। सुप्रीम कोर्ट की ओर से समारोह का लाइव प्रसारण आधिकारिक माध्यमों पर भी किया गया, जिससे लोग इस महत्वपूर्ण न्यायिक कार्यक्रम को देख सके। तीनों नए जजों की नियुक्ति केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद प्रभावी हुई।
जस्टिस सुनीता अग्रवाल सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति से पहले गुजरात हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस थीं। वहीं जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर कार्यरत थे, जबकि जस्टिस अपरेश कुमार सिंह तेलंगाना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे। तीनों को हाई कोर्ट में लंबे न्यायिक अनुभव के बाद सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया है।
केंद्र सरकार ने सोमवार को तीनों न्यायाधीशों की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर 2026 को इनके नामों की सिफारिश की थी। इसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की गई और मंगलवार को तीनों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर भी 28 सितंबर की कॉलेजियम सिफारिश दर्ज है।
इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कार्यरत संख्या 37 हो गई है। शीर्ष अदालत में स्वीकृत न्यायाधीशों की कुल संख्या 38 है। इस लिहाज से अब सुप्रीम कोर्ट में केवल एक पद खाली रह गया है। इससे मामलों की सुनवाई और बेंचों के गठन में अतिरिक्त न्यायिक क्षमता उपलब्ध होने की उम्मीद है।
जस्टिस सुनीता अग्रवाल की नियुक्ति विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उनके सुप्रीम कोर्ट में आने के बाद शीर्ष अदालत में महिला न्यायाधीशों की संख्या तीन हो गई है। इससे सर्वोच्च न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व में भी बढ़ोतरी हुई है।
तीनों न्यायाधीशों का न्यायिक अनुभव अलग-अलग हाई कोर्ट और न्यायिक व्यवस्थाओं से जुड़ा रहा है। जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने गुजरात हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस के रूप में कार्य किया, जबकि इससे पहले भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की है। उनकी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति से संवैधानिक, सिविल और अन्य महत्वपूर्ण मामलों में उनके अनुभव का लाभ शीर्ष अदालत को मिलेगा।
जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में कार्यरत थे। देश की राजधानी के हाई कोर्ट में रहते हुए उन्होंने कई अहम मामलों की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट में आने के बाद अब वह राष्ट्रीय स्तर पर संवैधानिक और कानूनी विवादों की सुनवाई करने वाली बेंचों का हिस्सा बनेंगे।
इसी तरह जस्टिस अपरेश कुमार सिंह तेलंगाना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के पद पर कार्यरत थे। न्यायपालिका में उनके लंबे अनुभव के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया है। शीर्ष अदालत में आने के बाद वह भी विभिन्न संवैधानिक, आपराधिक, सिविल और सार्वजनिक महत्व के मामलों की सुनवाई में भूमिका निभाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की सर्वोच्च अदालत में बड़ी संख्या में मामले लंबित रहते हैं। पर्याप्त संख्या में न्यायाधीश उपलब्ध होने से अधिक बेंचों का गठन किया जा सकता है और मामलों की सुनवाई में तेजी लाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि किसी न्यायाधीश की नियुक्ति के बाद यह चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में होता है कि उन्हें किस बेंच में शामिल किया जाएगा और किन मामलों की सुनवाई सौंपी जाएगी। नए न्यायाधीश आने से संविधान पीठ, नियमित बेंच और विशेष मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक संसाधन बढ़ते हैं।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद न्यायाधीशों की नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाती है। कॉलेजियम में देश के वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं और वे सुप्रीम कोर्ट तथा हाई कोर्ट में नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़े नामों पर विचार करते हैं। सिफारिश के बाद केंद्र सरकार प्रक्रिया आगे बढ़ाती है और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्ति की अधिसूचना जारी की जाती है।
मंगलवार का शपथ ग्रहण समारोह इसी प्रक्रिया की अंतिम महत्वपूर्ण कड़ी रहा। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने तीनों न्यायाधीशों को शपथ दिलाई, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाल लिया।
सुप्रीम कोर्ट के लिए यह नियुक्तियां न्यायिक क्षमता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। अब अदालत अपने स्वीकृत 38 पदों में से 37 न्यायाधीशों के साथ काम करेगी। इससे लंबित मामलों के निपटारे, संवैधानिक मुद्दों और विभिन्न हाई कोर्ट से आने वाली अपीलों की सुनवाई में अतिरिक्त सहयोग मिल सकेगा।
जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह के शपथ लेने के साथ ही देश की सर्वोच्च अदालत में तीन अनुभवी हाई कोर्ट चीफ जस्टिस शामिल हो गए हैं। आने वाले समय में तीनों न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग बेंचों में महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करते नजर आएंगे।
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