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दिल्ली-एनसीआर
तीन आरोपियों को दो दिन की पुलिस कस्टडी, 13 की जमानत याचिका खारिज
SHIDDHANT
27 April 2026 10:53 PM IST

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Delhi दिल्ली: श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ के बहुचर्चित मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन प्रमुख आरोपियों को दो दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेज दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (तृतीय) विरेन्द्र अग्रवाल की अदालत ने सत्यम वर्मा, हिमांशु ठाकुर और आदित्य आनंद की पुलिस कस्टडी मंजूर करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच के लिए आरोपियों से गहन पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की बरामदगी बेहद आवश्यक है।
अदालत के आदेश के अनुसार, पुलिस कस्टडी 29 अप्रैल सुबह 9 बजे से शुरू होकर 30 अप्रैल शाम 6 बजे तक प्रभावी रहेगी। कोर्ट ने विवेचक को निर्देश दिया है कि आरोपियों को कस्टडी में लेने से पहले और वापस जेल भेजने से पहले उनका अनिवार्य रूप से चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाए, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।
यह मामला थाना फेस-2 में दर्ज किया गया है, जिसमें आरोपियों के खिलाफ कई गंभीर धाराओं के साथ आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज है।
पुलिस के अनुसार, आंदोलन के दौरान सुनियोजित तरीके से हिंसा भड़काने की साजिश रची गई थी। आरोप है कि आरोपियों ने मजदूरों को उकसाने, भीड़ को भड़काने और औद्योगिक गतिविधियों को बाधित करने के उद्देश्य से योजनाबद्ध तरीके से घटनाओं को अंजाम दिया।
जांच में यह भी सामने आया है कि साजिश को अंजाम देने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेषकर टेलीग्राम और व्हाट्सऐप ग्रुप्स का व्यापक उपयोग किया गया। पुलिस ने अदालत में दलील दी कि आरोपियों के पास मौजूद लैपटॉप, सीपीयू और मोबाइल फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बरामदगी अत्यंत आवश्यक है। इन उपकरणों से प्राप्त डाटा के आधार पर यह पता लगाया जा सकेगा कि हिंसा की योजना कैसे बनाई गई, किन लोगों को इसमें शामिल किया गया और किस प्रकार संदेशों के जरिए भीड़ को भड़काया गया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि हिरासत में उनके मुवक्किलों के साथ मारपीट की गई और जबरन हस्ताक्षर कराए गए। हालांकि अदालत ने इन आरोपों को साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी मेमो और अन्य दस्तावेजों से स्पष्ट है कि आरोपियों को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी दी गई थी और विधि सम्मत प्रक्रिया का पालन किया गया है।
अदालत ने पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर करते हुए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी निर्धारित की हैं। कोर्ट ने अनुमति दी है कि आरोपियों के वकील उचित दूरी बनाकर पूरी कार्यवाही देख सकते हैं, लेकिन वे जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेंगे। वहीं, इस मामले में अन्य 13 आरोपियों की जमानत याचिका पर भी सोमवार को सुनवाई हुई।
अदालत ने महिला आरोपी आकृति, रुद्ध प्रताप और अभिषेक समेत सभी 13 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। बचाव पक्ष के वकील ने संकेत दिया है कि निचली अदालत के इस फैसले को अब उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। इस मामले में आगे की जांच और डिजिटल साक्ष्यों की बरामदगी के बाद कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस और प्रशासन पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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