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देश में मौसमी इन्फ्लूएंजा सहित श्वसन संबंधी बीमारियों की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय
SHIDDHANT
2 Dec 2025 10:27 PM IST

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Delhi दिल्ली। सर्दियों में फैलने वाले इन्फ्लूएंजा को रोकने के लिए की गई तैयारियों का जायजा लेने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कर्तव्य भवन 1 में बैठक के दौरान, सचिव (स्वास्थ्य) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को बताया कि भारत में आमतौर पर इन्फ्लूएंजा के दो मौसमी चरम अनुभव होते हैं—अगस्त-अक्टूबर (मानसून चरम) और जनवरी-मार्च (शीतकालीन चरम)। वर्ष 2014-15 के दौरान मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि को याद करते हुए, नड्डा ने वर्तमान स्थिति पर अद्यतन जानकारी मांगी तथा पूछा कि क्या वर्तमान में प्रचलित वायरस के प्रकारों में ऐतिहासिक रुझानों से कोई भिन्नता है।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) और एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि विश्व स्तर पर और भारत में भी इन्फ्लूएंजा की गतिविधि कम बनी हुई है। निगरानी से संकेत मिलता है कि परिसंचारी स्ट्रेन सामान्य मौसमी रूप- एच3एन2 और इन्फ्लूएंजा बी (विक्टोरिया) ही बने हुए हैं, जिनमें एच1एन1 का एक छोटा सा अनुपात है। मंत्री को लगभग वास्तविक समय निगरानी तंत्रों से भी अवगत कराया गया, जिनमें शामिल हैं: आईडीएसपी का इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) और गंभीर तीव्र श्वसन रोग (एसएआरआई) निगरानी नेटवर्क, मीडिया स्कैनिंग के माध्यम से एआई-संचालित घटना-आधारित निगरानी और श्वसन रोगजनकों के लिए आईसीएमआर की प्रहरी निगरानी। सभी प्रणालियां वर्तमान में इन्फ्लूएंजा के मामलों में असामान्य वृद्धि के कोई संकेत नहीं दिखाती हैं।
एनसीडीसी के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) रंजन दास ने यह भी बताया कि एनसीडीसी इस महीने के अंत में इन्फ्लूएंजा पर दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर आयोजित करेगा, जिसमें प्रमुख मंत्रालय, विभाग और राज्य सरकारें शामिल होंगी, ताकि इन्फ्लूएंजा की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की जा सके और आगे की योजना बनाई जा सके। नड्डा ने चल रही तैयारियों की सराहना की और सभी राज्य नोडल अधिकारियों के साथ इन्फ्लूएंजा की तैयारियों की समीक्षा करने और सभी केंद्र सरकार के अस्पतालों की तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
उन्होंने निर्देश दिया कि सभी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में तैयारियों की समीक्षा अगले एक पखवाड़े के भीतर पूरी कर ली जाए। मंत्री ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक परामर्श जारी करने की भी सलाह दी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर नियमित रूप से मॉक-ड्रिल आयोजित करने को कहा। बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. सुनीता शर्मा, संयुक्त सचिव (लोक स्वास्थ्य) वंदना जैन, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के निदेशक प्रो. (डॉ.) रंजन दास और आपदा प्रबंधन (डीएम) प्रकोष्ठ तथा एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
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