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सुप्रीम कोर्ट आज तय करेगा इंडस्ट्री की नई परिभाषा

nidhi
20 Aug 2026 6:22 AM IST
सुप्रीम कोर्ट आज तय करेगा इंडस्ट्री की नई परिभाषा
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9 जजों की बेंच बताएगी कौन आएगा उद्योग के दायरे में
नई दिल्ली: औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत 'इंडस्ट्री' यानी उद्योग शब्द की परिभाषा को लेकर चल रही लंबे समय से चली आ रही कानूनी बहस पर सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों वाली संविधान पीठ आज फैसला सुनाएगी। इस मामले का असर देश के लाखों कर्मचारियों, संस्थानों और श्रम कानूनों के दायरे पर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ 1978 के ऐतिहासिक बैंगलोर वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम ए. राजप्पा मामले में दी गई 'इंडस्ट्री' की व्यापक परिभाषा की समीक्षा कर रही है। उस फैसले में सात जजों की पीठ ने कहा था कि किसी संस्था को उद्योग माना जा सकता है, अगर वहां नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच व्यवस्थित गतिविधि के जरिए वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन या वितरण किया जा रहा हो। इसमें लाभ कमाना जरूरी शर्त नहीं माना गया था।
इस फैसले के बाद अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, क्लब और कई सरकारी या सामाजिक संस्थाओं के कर्मचारियों को भी औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत सुरक्षा मिलने लगी थी। अब नौ जजों की पीठ यह तय करेगी कि 1978 के फैसले में दी गई यह व्यापक व्याख्या सही थी या इसमें बदलाव की जरूरत है।
मामले में मुख्य सवाल यह है कि औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 2(जे) के तहत 'इंडस्ट्री' का दायरा कितना व्यापक होगा। अदालत यह भी विचार कर रही है कि सरकारी विभागों की सामाजिक कल्याण योजनाएं, सार्वजनिक सेवाएं और कौन-कौन सी गतिविधियां उद्योग की श्रेणी में आएंगी। इसके अलावा यह भी तय किया जाएगा कि सरकार के कौन से कार्य 'संप्रभु कार्य' माने जाएंगे और वे औद्योगिक कानूनों के दायरे से बाहर रहेंगे या नहीं।
श्रम विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला कर्मचारियों के अधिकार, नौकरी से जुड़े विवाद, छंटनी, वेतन और श्रमिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। यदि अदालत 'इंडस्ट्री' की परिभाषा को सीमित करती है तो कई संस्थानों के कर्मचारियों को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। वहीं व्यापक परिभाषा बरकरार रहने पर मौजूदा श्रम संरक्षण व्यवस्था जारी रह सकती है। यह मामला करीब पांच दशक पुराने विवाद से जुड़ा है। 1978 के फैसले के बाद समय-समय पर इस पर सवाल उठते रहे और वर्ष 2005 में इसे पुनर्विचार के लिए बड़ी पीठ के सामने भेजा गया था। बाद में नौ जजों की संविधान पीठ गठित की गई, जिसने इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर सुनवाई पूरी की। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर उद्योग जगत, सरकारी संस्थानों और कर्मचारी संगठनों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे देश में श्रम कानूनों की व्याख्या का नया आधार तय हो सकता है।
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