- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- रेड सी संकट ने दिखाया...
दिल्ली-एनसीआर
रेड सी संकट ने दिखाया समुद्री व्यापार मार्गों का असर, दुनिया भर में बढ़े माल ढुलाई और खाद्य कीमतें
SHIDDHANT
28 Oct 2025 8:45 PM IST

x
Delhi दिल्ली। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने मंगलवार को कहा कि हालिया रेड सी (लाल सागर) संकट ने यह स्पष्ट रूप से दिखा दिया है कि वैश्विक व्यापार में समुद्री ‘चोक पॉइंट्स’ (Maritime Chokepoints) कितने महत्वपूर्ण हैं और इन पर किसी भी तरह की अस्थिरता या व्यवधान से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain), माल ढुलाई दरें (Freight Indices) और खाद्य वस्तुओं की कीमतें (Food Prices) कैसे प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि रेड सी संकट के दौरान जहाजरानी मार्गों में रुकावट आने से तेल, खाद्य पदार्थों और औद्योगिक वस्तुओं के दामों में भारी वृद्धि देखी गई, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ा। एडमिरल ने कहा, “रेड सी संकट ने हमें यह सिखाया कि समुद्री मार्ग केवल व्यापारिक रास्ते नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता की रीढ़ हैं। जब इन मार्गों पर खतरा मंडराता है, तो उसका असर महाद्वीपों की अर्थव्यवस्था तक पहुंचता है।”
एडमिरल आर. हरि कुमार ने बताया कि रेड सी में हूथी विद्रोहियों द्वारा किए गए हमले, और उसके बाद शिपिंग कंपनियों द्वारा मार्ग बदलने के निर्णय ने माल ढुलाई की लागत को कई गुना बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि इससे फ्रेट इंडेक्स (Freight Index) में तेज उछाल आया और खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ा, जिससे कई विकासशील देशों को नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि इस संकट से यह बात भी स्पष्ट हुई कि समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) अब केवल रक्षा का नहीं बल्कि आर्थिक स्थिरता का भी विषय बन चुकी है। उन्होंने कहा, “आज समुद्री शक्ति (Maritime Power) केवल नौसैनिक शक्ति से नहीं, बल्कि उसकी व्यापारिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता से मापी जाती है।”
एडमिरल ने कहा कि भारत जैसे उभरते देश के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि भारत का लगभग 90% विदेशी व्यापार समुद्र मार्गों के जरिए होता है। उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में सक्रिय रूप से निगरानी कर रही है ताकि किसी भी संभावित संकट या अवरोध को समय रहते रोका जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि रेड सी, मलक्का स्ट्रेट, और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री चोक पॉइंट्स वैश्विक अर्थव्यवस्था के संवेदनशील केंद्र हैं। इन पर किसी भी प्रकार की सैन्य या राजनीतिक गतिविधि दुनिया भर में ईंधन, खाद्य तेल, और अनाज की आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत “सागर (Security and Growth for All in the Region)” के अपने सिद्धांत के तहत न केवल अपने बल्कि पड़ोसी देशों के समुद्री हितों की रक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि “समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हमें साझेदारी, संवाद और तकनीकी सहयोग बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में अपने ब्लू इकॉनमी (Blue Economy) और मरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगा ताकि ऐसे संकटों का असर न्यूनतम हो सके।
Tagsरेड सी संकटनौसेना प्रमुखएडमिरल आर हरि कुमारmaritime chokepointsglobal freight indexfood pricesIndian Navymaritime securityRed Sea crisisHouthi attacksshipping routesSuez Canaltrade disruptionIndian Oceanblue economyglobal supply chaineconomic stabilityenergy tradeSAGAR initiativeAdmiral Hari Kumar.जनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





