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जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा जीवनदान, पांच राज्यों में ही हो रहे 80-96% अंग प्रत्यारोपण

nidhi
30 July 2026 6:47 AM IST
जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा जीवनदान, पांच राज्यों में ही हो रहे 80-96% अंग प्रत्यारोपण
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अंगदान अभियान को रफ्तार की जरूरत, प्रत्यारोपण के आंकड़े दिखा रहे बड़ी चुनौती

नई दिल्ली : अंगदान को जीवनदान कहा जाता है, लेकिन भारत में जरूरत और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर अभी भी बना हुआ है। देश में हर साल बड़ी संख्या में मरीज किडनी, लिवर, हृदय और अन्य अंगों के प्रत्यारोपण का इंतजार करते हैं, लेकिन अंगदान की कमी के कारण कई लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता।

आंकड़े बताते हैं कि भारत में होने वाले ज्यादातर अंग प्रत्यारोपण कुछ चुनिंदा राज्यों तक ही सीमित हैं। देश के केवल पांच राज्यों में कुल प्रत्यारोपण का लगभग 80 से 96 फीसदी हिस्सा होता है। इससे साफ होता है कि कई राज्यों में अंगदान और ट्रांसप्लांट की सुविधाएं अभी भी पर्याप्त स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं।
कुछ राज्यों में ही क्यों केंद्रित हैं प्रत्यारोपण?
विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े शहरों में बेहतर अस्पताल, प्रशिक्षित डॉक्टरों की उपलब्धता, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और जागरूकता के कारण वहां प्रत्यारोपण की संख्या अधिक है। वहीं छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में अंगदान को लेकर जागरूकता की कमी, स्वास्थ्य ढांचे की सीमाएं और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
देश में नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन जैसे संस्थान अंगदान को बढ़ावा देने और प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन अभी भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
हजारों मरीजों को अंगों का इंतजार
किडनी फेलियर, लिवर की गंभीर बीमारियों और हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हजारों मरीज प्रत्यारोपण की उम्मीद लगाए रहते हैं। कई बार सही समय पर अंग नहीं मिलने के कारण मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अधिक लोग मृत्यु के बाद अंगदान का संकल्प लें और अस्पतालों में इसकी व्यवस्था मजबूत हो, तो कई लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
जागरूकता की कमी बड़ी वजह
भारत में अंगदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां भी मौजूद हैं। कई परिवार अंतिम समय में अंगदान का फैसला लेने से हिचकिचाते हैं। सामाजिक जागरूकता अभियान और सही जानकारी के जरिए इस स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अंगदान को केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए। एक व्यक्ति का अंगदान कई जरूरतमंद लोगों को नया जीवन दे सकता है।
समान स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत
देश में अंग प्रत्यारोपण को सभी क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए छोटे शहरों में बेहतर अस्पताल, प्रशिक्षित मेडिकल टीम और मजबूत नेटवर्क की जरूरत है। जब तक सुविधाएं कुछ राज्यों और बड़े शहरों तक सीमित रहेंगी, तब तक जरूरतमंद मरीजों को समय पर इलाज मिलने में मुश्किलें आती रहेंगी।
'अंगदान महादान' का संदेश तभी पूरी तरह सफल होगा, जब देश के हर हिस्से में अंगदान और प्रत्यारोपण की सुविधाएं समान रूप से उपलब्ध हों।

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