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स्वावलंबन 2026 से मजबूत होगी नौसेना की आत्मनिर्भरता
Ratna Netam
25 Oct 2026 7:22 PM IST

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नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और देश में स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास को गति देने के उद्देश्य से ‘स्वावलंबन 2026’ को महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। नौसेना प्रमुख के अनुसार, यह पहल भारतीय नौसेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए देश में ही तकनीक, उपकरण और रक्षा प्रणालियां विकसित करने के प्रयासों को मजबूत करेगी। इससे रक्षा क्षेत्र में घरेलू उद्योगों, स्टार्टअप और नवाचार से जुड़े संस्थानों की भूमिका बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।भारत अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर जोर दे रहा है। ऐसे में ‘स्वावलंबन 2026’ जैसी पहल का महत्व बढ़ जाता है। इसका व्यापक उद्देश्य नौसेना की परिचालन जरूरतों के अनुरूप देश में विकसित समाधान तैयार करना और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम करना है।
26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली में होगा आयोजन
भारतीय नौसेना के इस प्रमुख कार्यक्रम का पांचवां संस्करण 26 और 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष इसका विषय ‘नवाचार और स्वदेशीकरण के जरिए शक्ति एवं सामर्थ्य’ रखा गया है। कार्यक्रम में रक्षा बलों, उद्योग जगत, स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), शैक्षणिक संस्थानों और निवेशकों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसका लक्ष्य देश में विकसित तकनीकों को नौसेना की वास्तविक परिचालन जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाना है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 26 अक्टूबर को आयोजित होने वाले कार्यक्रम के पूर्ण सत्र में शामिल होंगे। इस दौरान रक्षा क्षेत्र में नवाचार और स्वदेशीकरण के लिए योगदान देने वाले उद्योग साझेदारों को सम्मानित किए जाने की भी योजना है।
आधुनिक तकनीकों पर रहेगा विशेष ध्यान
‘स्वावलंबन 2026’ में समुद्री निगरानी, मानवरहित हवाई प्रणालियों का मुकाबला करने वाली तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम तकनीक और सुरक्षा से जुड़े स्वदेशी समाधानों को प्रमुखता दी जाएगी। प्रदर्शनी के माध्यम से उन तकनीकों को सामने लाया जाएगा, जिन्हें भारतीय संस्थानों और कंपनियों ने विकसित किया है।इन तकनीकों का उद्देश्य समुद्र में निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाना, उभरते सुरक्षा खतरों का मुकाबला करना और नौसेना के संचालन को अधिक प्रभावी बनाना है। आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए ऐसी तकनीकों का समय पर विकास और उनका वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है।नौसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप टिकाऊ और भरोसेमंद स्वदेशी तकनीक विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इससे लंबी समुद्री तैनाती के दौरान उपकरणों की उपलब्धता और परिचालन तैयारियों को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
स्टार्टअप और छोटे उद्योगों को मिलेगा अवसर
इस पहल का एक अहम उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप और एमएसएमई को रक्षा क्षेत्र में नवाचार के अवसर उपलब्ध कराना है। कई बार नई तकनीक का विचार विकसित हो जाता है, लेकिन उसे बड़े स्तर पर तैयार करने, आवश्यक वित्तीय सहायता जुटाने और वास्तविक परिचालन में इस्तेमाल योग्य बनाने में चुनौतियां आती हैं।स्वावलंबन के मंच पर इन चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। निवेशकों और वेंचर कैपिटल से जुड़े लोगों के साथ बातचीत के जरिए स्वदेशी तकनीकों के विकास, विस्तार और व्यावसायीकरण के अवसरों को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाएगा।कार्यक्रम में रक्षा क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली आईडेक्स व्यवस्था को मजबूत करने, घरेलू आपूर्ति शृंखला को अधिक भरोसेमंद बनाने और शैक्षणिक संस्थानों में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने पर भी चर्चा होगी। इसका लक्ष्य ऐसे उत्पाद तैयार करना है, जो केवल प्रयोगशाला या प्रदर्शन तक सीमित न रहें, बल्कि नौसेना की जरूरतों में भी उपयोगी साबित हों।
स्वदेशी तकनीक से बढ़ेगी समुद्री सुरक्षा क्षमता
भारतीय नौसेना के लिए आत्मनिर्भरता का मतलब केवल देश में उपकरण बनाना नहीं है, बल्कि अपनी जरूरतों के अनुसार तकनीक विकसित करना, उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना और बदलती सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला करने की क्षमता बढ़ाना भी है।‘स्वावलंबन’ की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। इसके बाद यह मंच भारतीय नौसेना, घरेलू उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने का माध्यम बना है। वर्ष 2026 के आयोजन में भी इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए नवाचारों को उपयोगी परिचालन क्षमताओं में बदलने पर जोर रहेगा।इस संस्करण में ‘स्वावलंबन 5.0’ दस्तावेज, तकनीकी प्राथमिकताओं पर आधारित संकलन और नौसेना के एकीकृत सिस्टम व इंटरफेस मानकों से जुड़ी सामग्री जारी किए जाने की भी योजना है। इनसे नौसेना की तकनीकी आवश्यकताओं और स्वदेशी विकास के संभावित क्षेत्रों को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।कुल मिलाकर, ‘स्वावलंबन 2026’ भारतीय नौसेना की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने, घरेलू रक्षा उद्योग को प्रोत्साहित करने और आधुनिक समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के लिए देश में ही तकनीकी समाधान विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विकसित तकनीकों को कितनी प्रभावी ढंग से नौसेना की वास्तविक जरूरतों में शामिल किया जाता है।
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