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मोदी सरकार की नई पहल सुधार उत्सव जन केंद्रित सुधारों पर रहेगा फोकस
Ratna Netam
25 Sept 2026 4:30 PM IST

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार अगले महीने से ‘सुधार उत्सव’ शुरू करने की तैयारी में है। इस पहल का उद्देश्य केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की ओर से शासन, नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण, संस्थागत सुधार और जनकल्याण के क्षेत्र में उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों को सामने लाना है। सूत्रों के अनुसार, इस अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने की तैयारी है। इसे केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के साथ राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के समन्वय से चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।सूत्रों के मुताबिक, ‘सुधार उत्सव’ के तहत केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए सुधारों और बदलावों को लेकर कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इस पूरी कवायद में पिछले 12 वर्षों में जन-केंद्रित शासन की दिशा में उठाए गए कदमों को प्रमुखता से सामने लाने की योजना है। अभियान के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े एक दर्जन से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है।
‘सुधार उत्सव’ की अवधारणा केवल पिछले सुधारों को सामने रखने तक सीमित नहीं रहने की बात कही जा रही है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य नागरिकों की प्रतिक्रिया और सुझावों को शासन व्यवस्था से जोड़ना भी है। हरियाणा सरकार की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में भी ‘रिफॉर्म उत्सव’ को नागरिकों से शासन-व्यवस्था में सुधार के सुझाव प्राप्त करने, उन्हें परखने और उपयोगी सुझावों को लागू करने की प्रक्रिया के रूप में बताया गया है। इसमें प्रक्रियात्मक और संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान देने की बात कही गई है।अभियान के दौरान नागरिकों को भी शासन में सुधार से जुड़े सुझाव देने का अवसर मिलेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसके लिए एक विशेष पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा। नागरिकों से मिलने वाले सुझावों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर संबंधित विभागों के स्तर पर उनकी समीक्षा की जाएगी। जो बदलाव कम समय में लागू किए जा सकते हैं, उन्हें प्राथमिकता देने और अपेक्षाकृत जटिल सुधारों के लिए समयबद्ध योजना तैयार करने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
2 अक्टूबर से नागरिक भागीदारी का महत्वपूर्ण चरण शुरू होने की तैयारी है। हरियाणा में जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक नागरिकों से पोर्टल के माध्यम से सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभाओं और ‘जन मंथन’ सभाओं के जरिए लोगों को अभियान से जोड़ने की योजना है। इसी तरह शहरी क्षेत्रों में वार्ड सभाओं और नागरिक परामर्श कार्यक्रमों के माध्यम से सुझाव लिए जाएंगे।इस प्रक्रिया में नागरिकों से केवल व्यक्तिगत समस्याओं या शिकायतों के बजाय ऐसे सुझाव हासिल करने पर भी जोर रहेगा, जिनसे सरकारी सेवाओं और प्रक्रियाओं में व्यापक सुधार हो सके। प्राप्त सुझावों का विभागवार परीक्षण किया जाएगा। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इन्हें व्यक्तिगत शिकायत, कार्रवाई योग्य न होने वाले सुझाव, त्वरित प्रभाव वाले सुधार और मध्यम अवधि में लागू किए जाने वाले सुधार जैसी श्रेणियों में बांटा जा सकता है।
‘सुधार उत्सव’ में केंद्र सरकार के मंत्रालयों की भागीदारी महत्वपूर्ण रहने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, अलग-अलग मंत्रालय अपने क्षेत्रों में किए गए प्रमुख सुधारात्मक कदमों को लेकर कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इनमें नागरिकों तक सेवाओं की पहुंच आसान बनाने, सरकारी प्रक्रियाओं को सरल करने, संस्थागत क्षमता बढ़ाने और तकनीक के इस्तेमाल से सेवा वितरण को बेहतर बनाने जैसे विषयों पर जोर रहने की उम्मीद है।केंद्र सरकार के स्तर पर सुधार की यह थीम पहले भी मंत्रालयों के कार्यक्रमों में दिखाई दे चुकी है। जुलाई 2026 में विधि एवं न्याय मंत्रालय ने माउंट आबू में ‘सुधार उत्सव एवं चिंतन शिविर 2026’ आयोजित किया था। इसमें कानूनी शासन, विधायी सुधार, डिजिटल परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल, प्रौद्योगिकी आधारित शासन और संस्थागत क्षमता बढ़ाने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ था। कार्यक्रम के समापन पर भविष्य के सुधारों को लेकर ‘संकल्प पत्र’ भी अपनाया गया था।
नई पहल में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भूमिका भी अहम रहने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को समझने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद संबंधित विभाग यह तय करेंगे कि किन सुझावों को तत्काल लागू किया जा सकता है और किन बदलावों के लिए लंबी प्रक्रिया या नीतिगत निर्णय की जरूरत होगी।हरियाणा में इसके लिए ‘जन मंथन’, विभागीय विचार-विमर्श और समाधान की चरणबद्ध प्रक्रिया तैयार की गई है। 2 अक्टूबर को ग्राम पंचायत स्तर पर जन मंथन सभाएं आयोजित करने और शहरी इलाकों में वार्ड स्तर पर नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की तैयारी है।कुल मिलाकर ‘सुधार उत्सव’ को शासन में हुए बदलावों को सामने रखने के साथ भविष्य के सुधारों के लिए नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने की पहल के रूप में तैयार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, 2 अक्टूबर को प्रस्तावित शुरुआत के बाद अलग-अलग मंत्रालय और विभाग चरणबद्ध कार्यक्रम आयोजित करेंगे। हालांकि केंद्र की ओर से कार्यक्रमों की पूरी सूची और विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम सामने आने के बाद अभियान के स्वरूप की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
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