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चमड़ा-फुटवियर उद्योग ने ड्यूटी छूट और FLOAT योजना लागू करने की मांग की

Delhi दिल्ली: चमड़ा और फुटवियर उद्योग ने सरकार से कई अहम इनपुट्स पर आयात शुल्क में छूट देने की मांग की है। उद्योग का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे माल और अन्य आवश्यक इनपुट की लागत में करीब 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे उत्पादन और निर्यात दोनों पर असर पड़ रहा है।
उद्योग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सिंथेटिक चमड़ा, धातु के सामान, मशीनरी, धागे, मोल्ड और कुछ रसायनों पर ड्यूटी में छूट की मांग की गई है। यह मामला हाल ही में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के समक्ष भी उठाया गया है, ताकि उद्योग को राहत दी जा सके और प्रतिस्पर्धा बनाए रखी जा सके।
निर्यातकों ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि प्रस्तावित FLOAT (Footwear and Leather-Oriented Transformation) योजना को जल्द से जल्द लागू किया जाए। इस योजना का उद्देश्य पूरे फुटवियर और चमड़ा क्षेत्र की सप्लाई चेन को मजबूत करना है, जिसमें कच्चा माल, मशीनरी और अन्य इनपुट शामिल होंगे।
उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए क्रस्ट और तैयार चमड़े के ड्यूटी-मुक्त आयात की भी अनुमति दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि इससे उत्पादन लागत में कमी आएगी और भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर इस क्षेत्र पर पड़ा है, जिससे छोटे और मध्यम उद्यम अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
उद्योग ने सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है, ताकि निर्यात में गिरावट को रोका जा सके और रोजगार आधारित इस क्षेत्र को स्थिरता प्रदान की जा सके।





