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दिल्ली-एनसीआर
कबाड़ बेचकर सरकार ने कमाए 970 करोड़ रुपये, रेलवे ने अकेले जुटाए 618 करोड़
nidhi
7 Nov 2026 7:54 AM IST

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सरकारी कबाड़ बना खजाना
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पुराने कबाड़ और बेकार पड़े सामान को बेचकर 970.33 करोड़ रुपये की कमाई की है। सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता बढ़ाने और लंबित मामलों के निपटारे के लिए चलाए गए विशेष अभियान 6.0 के दौरान यह उपलब्धि हासिल हुई। सबसे ज्यादा कमाई भारतीय रेलवे ने की, जिसने अकेले 618.06 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया। कार्मिक मंत्रालय की ओर से शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, अभियान में सरकारी कार्यालयों की सफाई के साथ पुरानी फाइलों के निपटारे और बेकार सामान को हटाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
यह विशेष अभियान 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलाया गया। प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और उनसे जुड़े कार्यालयों ने अभियान में हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य सरकारी परिसरों को साफ-सुथरा बनाना, अनुपयोगी सामान हटाना और कार्यालयों में उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना था।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अभियान के दौरान देशभर में 19 लाख 88 हजार 826 स्थानों पर स्वच्छता संबंधी गतिविधियां आयोजित की गईं। पिछले वर्ष यह संख्या करीब 11 लाख 59 हजार थी। इस तरह स्वच्छता अभियान के दायरे में लगभग 71 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कबाड़ की बिक्री से हुई कुल 970.33 करोड़ रुपये की कमाई पिछले विशेष अभियान की तुलना में करीब 16 प्रतिशत अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकारी कार्यालयों में लंबे समय से जमा अनुपयोगी सामान का व्यवस्थित निपटारा राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है।
इस अभियान में भारतीय रेलवे ने सबसे शानदार प्रदर्शन किया। रेलवे बोर्ड के माध्यम से कबाड़ निपटान से 618.06 करोड़ रुपये की कमाई हुई। इसके बाद सैन्य कार्य विभाग ने 88.96 करोड़ रुपये, कोयला मंत्रालय ने 61.41 करोड़ रुपये और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 34.81 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। सरकारी कार्यालयों में वर्षों से जमा पुरानी फाइलों और अनुपयोगी सामान को हटाने से बड़ी मात्रा में जगह भी खाली हुई। मंत्रालयों और विभागों ने कुल 277.82 लाख वर्ग फुट कार्यालय क्षेत्र को उपयोग के लिए मुक्त कराया। यह पिछले अभियान की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है। खाली हुई जगह का इस्तेमाल अब अन्य प्रशासनिक और उपयोगी गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा। अभियान के दौरान सरकारी कार्यालयों में लंबित शिकायतों के निपटारे पर भी विशेष जोर दिया गया। कुल 9 लाख 99 हजार 168 जनशिकायतों का निपटारा किया गया। इसके अतिरिक्त 40 हजार 878 अपीलों पर भी कार्रवाई पूरी की गई।
पुरानी फाइलों के निपटारे में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई। सरकारी विभागों ने 26 लाख 79 हजार 875 भौतिक फाइलों की समीक्षा की। इनमें से 15 लाख 76 हजार 828 फाइलों को नियमानुसार रिकॉर्ड से हटाया गया। डिजिटल रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान 9 लाख 58 हजार 864 ई-फाइलों की जांच की गई और 7 लाख से अधिक ई-फाइलों को बंद किया गया। इस बार अभियान में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निपटारे पर भी विशेष ध्यान दिया गया। पुराने कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य ई-वेस्ट के निपटारे से लगभग 50 करोड़ रुपये की कमाई हुई। रेलवे ने इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निपटारे से भी 10.43 करोड़ रुपये जुटाए।
ई-वेस्ट के वैज्ञानिक निपटारे के लिए अधिकृत रीसाइक्लिंग एजेंसियों की भागीदारी बढ़ाई गई। सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर पंजीकृत रीसाइक्लर, रिफर्बिशर और उत्पादकों की संख्या 38 से बढ़कर 200 से अधिक हो गई। इससे इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल निपटारे को बढ़ावा मिला। स्वच्छता गतिविधियों की संख्या के मामले में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग सबसे आगे रहा। विभाग ने देशभर के स्कूलों में 7.01 लाख से अधिक अभियान चलाए। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य संस्थानों में लगभग 6.52 लाख स्वच्छता गतिविधियां आयोजित कीं।
वहीं, कार्यालयों में जगह खाली कराने के मामले में कोयला मंत्रालय पहले स्थान पर रहा। मंत्रालय ने 1.48 करोड़ वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र को मुक्त कराया। भारी उद्योग मंत्रालय और रक्षा उत्पादन विभाग ने भी बड़ी मात्रा में कार्यालय क्षेत्र खाली कराया। केंद्र सरकार का यह अभियान दिखाता है कि सरकारी संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करके स्वच्छता, प्रशासनिक दक्षता और राजस्व बढ़ाने के लक्ष्यों को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। वर्ष 2021 से शुरू हुए विशेष स्वच्छता अभियानों की श्रृंखला में छठे अभियान ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की हैं।
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