दिल्ली-एनसीआर

72 घंटे की मुश्किल यात्रा में दिखी जलवायु संकट की सच्चाई: CEEW प्रमुख डॉ. अरुणाभा घोष बोले

SHIDDHANT
1 Dec 2025 7:15 PM IST
72 घंटे की मुश्किल यात्रा में दिखी जलवायु संकट की सच्चाई: CEEW प्रमुख डॉ. अरुणाभा घोष बोले
x
Delhi दिल्ली। ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (CEEW) के संस्थापक और सीईओ डॉ. अरुणाभा घोष ने अपने 72 घंटे के चुनौतीपूर्ण सफर का हवाला देते हुए जलवायु संकट की भयावहता पर गंभीर चिंता जताई है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि बेनिन यात्रा के दौरान उन्होंने और उनकी टीम ने जिस तरह के चरम मौसम और प्राकृतिक घटनाओं का सामना किया, उसने जलवायु परिवर्तन के वास्तविक और बढ़ते खतरे को और स्पष्ट कर दिया है।
डॉ. घोष ने बताया कि बेनिन में उनके प्रवास के दौरान अत्यधिक गर्मी, असहनीय आर्द्रता और भारी उष्णकटिबंधीय बारिश लगातार बनी रही। एक दिन तो हालत यह थी कि वे और उनके सहयोगी शहर में आई अचानक शहरी बाढ़ में फंस गए। वे एक उबर कैब में यात्रा कर रहे थे और तेज बारिश के कारण सड़कें लबालब हो गईं। इस दौरान उन्हें काफी समय तक वाहन में ही इंतजार करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि सिर्फ बाढ़ ही नहीं, बल्कि वहां आग की घटना और फिर ज्वालामुखी विस्फोट के असर ने भी वापसी सफर को बेहद कठिन बना दिया। कई उड़ानों के रद्द होने और रूट बदलने के कारण उनकी यात्रा 72 घंटे तक खिंच गई। उन्होंने कहा, “मैं इस तरह की बातें इसलिए साझा कर रहा हूं क्योंकि हम क्लाइमेट संकट की सच्चाई को अब सिर्फ वैज्ञानिक रिपोर्टों में नहीं पढ़ रहे, बल्कि उसे प्रत्यक्ष रूप से अनुभव भी कर रहे हैं।”
डॉ. घोष ने इस अवसर पर ग्लोबल सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, वे किसी एक देश या संस्था के बस की बात नहीं हैं। “हमें मिलकर काम करना होगा, क्योंकि जलवायु संकट अब सीमाओं से परे है। हमारे सामूहिक प्रयास ही भविष्य को सुरक्षित बना सकते हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, और दुनिया के कई हिस्से लगातार अत्यधिक गर्मी, अनियमित वर्षा, समुद्री आपदाओं और जंगल की आग जैसी घटनाओं से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में, शोध, तकनीक, नीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। डॉ. घोष के अनुभव और चेतावनी एक बार फिर यह याद दिलाते हैं कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का खतरा नहीं, बल्कि वर्तमान का संकट है—जिसके समाधान के लिए तत्काल कदम उठाना अनिवार्य है।
Next Story