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Lalu Yadav परिवार मामले में अब 31 जुलाई को आएगा कोर्ट का फैसला

New Delhi नई दिल्ली : आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को गुरुवार को अदालत से फिलहाल राहत मिल गई। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में आरोप तय करने को लेकर अपना फैसला टाल दिया है। अब अदालत इस पर 31 जुलाई को फैसला सुनाएगी। फैसले के टलने के बाद लालू परिवार को कुछ समय के लिए राहत मिली है।
यह मामला भारतीय रेलवे के आईआरसीटीसी होटल टेंडर से जुड़े कथित घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित है। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही है। ईडी ने जांच पूरी करने के बाद लालू प्रसाद यादव समेत कई लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।
ईडी की चार्जशीट में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनके बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती, हेमा यादव, तेज प्रताप यादव समेत कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि आईआरसीटीसी से जुड़े एक टेंडर मामले में अनियमितताएं हुईं और इसके जरिए कथित तौर पर अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित की गई।
गुरुवार को राऊज एवेन्यू कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। अदालत में आरोप तय करने को लेकर बहस पूरी हो चुकी है। इसके बाद कोर्ट को यह तय करना था कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं। हालांकि, अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए अब 31 जुलाई को सुनवाई की अगली तारीख तय की है।
इस मामले में ईडी लंबे समय से जांच कर रही है। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि रेलवे के होटल आवंटन से जुड़े मामले में नियमों की अनदेखी की गई और इसके बदले लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। ईडी ने अपनी जांच के आधार पर कई दस्तावेज और साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए हैं।
वहीं, लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की ओर से इन आरोपों को लगातार खारिज किया जाता रहा है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। राजद नेताओं ने कई बार कहा है कि उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।
अदालत में अब 31 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि अदालत आरोप तय करने का फैसला देती है तो मामले में आगे मुकदमे की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। वहीं, अगर अदालत को पर्याप्त आधार नहीं मिलता है तो आरोपियों को राहत मिल सकती है।
आईआरसीटीसी मामला बिहार की राजनीति से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि इसमें राज्य के प्रमुख राजनीतिक परिवार के कई सदस्य आरोपी हैं। इस वजह से कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी इस मामले को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है।
फिलहाल अदालत के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ इस मामले में आगे की कार्रवाई किस दिशा में जाएगी। 31 जुलाई को आने वाले फैसले को इस मामले में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।





