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हवाला मामले में गिरफ्तार चीनी नागरिक छह साल से नोएडा में रह रहा था अवैध रूप से

Kavita2
25 July 2026 10:04 AM IST
हवाला मामले में गिरफ्तार चीनी नागरिक छह साल से नोएडा में रह रहा था अवैध रूप से
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नोएडा : हवाला के जरिये करोड़ों रुपये विदेश भेजने के मामले में नोएडा से गिरफ्तार चीनी नागरिक लियाओ लोंगहुई को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि वह पिछले करीब छह वर्षों से भारत में अवैध रूप से रह रहा था। नोएडा एसटीएफ की जांच में पता चला है कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपनी पहचान भारतीय नागरिक के रूप में बनाने की कोशिश की। एसटीएफ ने इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय जांच एजेंसियों को भेज दी है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, लियाओ लोंगहुई ने कथित तौर पर कोहिमा के पते पर फर्जी आधार कार्ड बनवाया था। इसी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर उसने अन्य भारतीय दस्तावेज भी हासिल कर लिए। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में उसकी मदद किसने की और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।

नोएडा एसटीएफ ने हवाला नेटवर्क से जुड़े इस मामले की जांच के दौरान चीनी नागरिक को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसके भारत में रहने और दस्तावेज तैयार कराने से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने भारतीय पहचान हासिल करने के लिए सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि लियाओ लोंगहुई भारत में किस उद्देश्य से रह रहा था और हवाला कारोबार में उसकी भूमिका कितनी बड़ी थी। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये की अवैध धनराशि को विदेश भेजने के मामले से उसके संबंध सामने आए हैं। एजेंसियां उसके बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों की भी जांच कर रही हैं।

एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, हवाला नेटवर्क आमतौर पर अवैध तरीके से धन के स्थानांतरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें बिना आधिकारिक बैंकिंग प्रक्रिया के बड़ी रकम एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाई जाती है। ऐसे मामलों में अक्सर फर्जी पहचान, दस्तावेजों और मध्यस्थों का इस्तेमाल किया जाता है। लियाओ लोंगहुई के मामले में भी इसी तरह की गतिविधियों की जांच की जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के पास मिले दस्तावेजों और उसके भारत में रहने की अवधि की जांच की गई है। जांच में सामने आया कि वह लंबे समय से नोएडा में रह रहा था, लेकिन उसके रहने की जानकारी और पहचान से जुड़े कई तथ्य संदिग्ध पाए गए। इसके बाद एसटीएफ ने केंद्रीय एजेंसियों को पूरी जानकारी उपलब्ध कराई।

अब केंद्रीय जांच एजेंसियां इस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जानकारी जुटा सकती हैं। जांच का दायरा चीन और अन्य देशों तक पहुंच सकता है, क्योंकि मामला विदेशों में धन भेजने से जुड़ा हुआ है। एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क के तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े हैं।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पहचान हासिल करने का मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी गंभीर विषय माना जा रहा है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि आरोपी ने फर्जी आधार कार्ड कैसे बनवाया और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया में कहां चूक हुई।

एसटीएफ अब उन लोगों की भी तलाश कर रही है, जिन्होंने आरोपी को फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में सहायता की हो सकती है। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या उसने इसी तरीके से अन्य लोगों के दस्तावेज तैयार करवाए या किसी अन्य अवैध गतिविधि में शामिल रहा।

जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, ईमेल और अन्य संचार माध्यमों की भी जांच की जा रही है। इससे उसके संपर्कों और गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि भारत में रहने के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था और किन संस्थाओं के साथ उसका लेनदेन हुआ।

मामले की गंभीरता को देखते हुए नोएडा एसटीएफ ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय जांच एजेंसियों को भेज दी है। आगे की जांच में अन्य आरोपियों और संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा होने की संभावना है।

फिलहाल लियाओ लोंगहुई से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है। सुरक्षा एजेंसियां हवाला नेटवर्क, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और विदेशी नागरिकों की अवैध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे मामले में आरोपी की भूमिका कितनी व्यापक थी और उसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।

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