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दिल्ली-एनसीआर
राजधानी बनेगी वैश्विक संस्कृति का केंद्र, 50 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
Kiran
14 Oct 2026 9:25 AM IST

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Delhi इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स (IGNCA) 14 से 16 अक्टूबर तक विज्ञान भवन में दुनिया के साथ भारत के सांस्कृतिक संबंधों पर तीन दिन का इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा। 50 देशों के प्रतिनिधि, राजदूत और विद्वान साझा सांस्कृतिक विरासत और सभ्यताओं के आदान-प्रदान पर चर्चा में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक खास वीडियो संदेश के ज़रिए सभा को संबोधित करेंगे, जबकि केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे। संस्कृति मंत्रालय की 'ग्लोबल एंगेजमेंट स्कीम' के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में 10 विषयों पर चर्चा होगी, जिनमें धार्मिक परंपराएं, ज्ञान प्रणालियां, भाषाएं, कला, कपड़ा उद्योग, खान-पान, प्रदर्शन कला, व्यापार और प्रवासी समुदाय शामिल हैं।
'बृहत्तर भारत: दुनिया भर में भारत के सांस्कृतिक संबंधों पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस' नाम की यह कॉन्फ्रेंस 'ग्रेटर इंडिया सोसाइटी' (जिसे 'बृहत्तर भारत परिषद' भी कहा जाता है) की 100वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रही है। भारतीय विद्वानों ने 14 अक्टूबर 1926 को कलकत्ता में इस सोसाइटी की स्थापना की थी और रवींद्रनाथ टैगोर इसके आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे। इसका मकसद भारत के व्यापक सभ्यतागत संपर्कों के साथ विद्वानों के जुड़ाव को बढ़ावा देना था।
इस कॉन्फ्रेंस का मकसद नई रिसर्च, अलग-अलग विषयों के नज़रिए और इंटरनेशनल सहयोग के ज़रिए इन ऐतिहासिक संबंधों को फिर से समझना है। चीन, जापान, मंगोलिया, नेपाल और ईरान जैसे देशों के प्रतिभागी इस बात पर चर्चा करेंगे कि कैसे भारतीय सांस्कृतिक, दार्शनिक, कलात्मक, भाषाई और धार्मिक परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में फैलीं और स्थानीय परिवेश के हिसाब से ढल गईं।
चर्चाओं में समुद्री व्यापार, तीर्थयात्रा, विद्वतापूर्ण आदान-प्रदान, कूटनीति और प्रवास के ज़रिए हुए सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर गौर किया जाएगा। इनकी विरासत दक्षिण-पूर्व एशिया में संस्कृत और पाली शिलालेखों, अंकोरवाट, बोरोबुदुर, प्रम्बानन और बागान जैसी धरोहरों और मध्य व पूर्वी एशिया में बौद्ध परंपराओं के प्रसार में साफ दिखाई देती है। कई एशियाई देशों की साहित्यिक और नाट्य परंपराओं पर रामायण और महाभारत के प्रभाव पर भी चर्चा होगी। कॉन्फ्रेंस के साथ-साथ 'कॉमन कल्चरल हेरिटेज ऑफ़ एशिया' (एशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत) नाम की एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत और अन्य एशियाई देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को दिखाया जाएगा। इन एकेडमिक सेशन में शुरुआती सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान, धार्मिक और दार्शनिक विचारों का प्रसार, भाषाओं और पांडुलिपियों का आवागमन, साझा कला परंपराएं, खान-पान का आदान-प्रदान और परफॉर्मिंग आर्ट्स जैसे विषयों पर चर्चा होगी। साथ ही, सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में व्यापार नेटवर्क और प्रवासी समुदायों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी।
यह कॉन्फ्रेंस 'बृहत्तर भारत योजना' (2026–2031) के तहत आयोजित की जा रही है। इस योजना का संचालन संस्कृति मंत्रालय की 'ग्लोबल एंगेजमेंट स्कीम' के अंतर्गत IGNCA द्वारा किया जाता है। इस पहल का मकसद प्रदर्शनियों, प्रकाशनों, आर्काइवल प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय एकेडमिक साझेदारियों के माध्यम से साझा सांस्कृतिक विरासत के रिसर्च, डॉक्यूमेंटेशन, संरक्षण, डिजिटाइजेशन और वैश्विक प्रसार को बढ़ावा देना है। यह योजना संयुक्त रिसर्च और प्रकाशनों, सांस्कृतिक डॉक्यूमेंटेशन के नए क्षेत्रों, UNESCO के 'मेमोरी ऑफ़ द वर्ल्ड प्रोग्राम' के लिए संयुक्त नामांकन और 'अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' (Intangible Cultural Heritage) के लिए बहु-राष्ट्रीय नामांकन की संभावनाओं पर भी काम करेगी। इस साझा विरासत के डॉक्यूमेंटेशन और वैश्विक प्रसार को आसान बनाने के लिए एक 'बृहत्तर भारत पोर्टल' बनाने का प्रस्ताव भी है।
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