- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- BJP ने 12...
BJP ने 12 मुख्यमंत्रियों के जरिए राहुल गांधी के आरोपों का दिया जवाब

नई दिल्ली: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच बीजेपी ने अपना रुख स्पष्ट किया है। पार्टी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देने के लिए अपने 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आगे किया है।
यह पूरा मामला चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों और कुछ चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर उठे सवालों के बाद चर्चा में आया है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने चुनाव आयोग के अन्य सदस्यों की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए एकतरफा फैसले लिए।
चुनाव आयोग के अंदरूनी मतभेदों की खबरों से विवाद
चुनाव आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग की कई प्रक्रियाओं को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इन आपत्तियों की संख्या करीब 14 थी। इनमें मतदाता सूची के विशेष संशोधन (SIR) समेत कई प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, इन दावों और प्रक्रियाओं को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
कांग्रेस ने CEC पर लगाए आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग में उठाई गई आपत्तियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने महत्वपूर्ण फैसले अकेले लिए।
पार्टी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शिता जरूरी है।
बीजेपी ने किया पलटवार
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए इसे चुनाव आयोग पर सवाल उठाने की कोशिश बताया है। पार्टी ने अपने 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को सामने लाकर राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया।
बीजेपी का कहना है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज को लेकर राजनीतिक आरोप लगाने से पहले तथ्यों को देखना चाहिए।
SIR प्रक्रिया को लेकर भी विवाद
इस विवाद का एक बड़ा हिस्सा मतदाता सूची के विशेष संशोधन यानी SIR प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए। वहीं, चुनाव आयोग लगातार अपनी प्रक्रियाओं को नियमों के अनुसार संचालित करने की बात कहता रहा है।
संवैधानिक संस्था की भूमिका पर बहस
चुनाव आयोग देश में चुनाव प्रक्रिया को संचालित करने वाली संवैधानिक संस्था है। इसके फैसलों और कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक दल समय-समय पर अपनी राय रखते रहे हैं।
मौजूदा विवाद में भी मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता को लेकर है।
बीजेपी ने मुख्यमंत्रियों को क्यों उतारा
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, बीजेपी का यह कदम विपक्ष के आरोपों का व्यापक राजनीतिक जवाब देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी अपने राज्य नेतृत्व के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का विरोध करती है।
वहीं, कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठा रही है और जवाबदेही की मांग कर रही है।
आगे बढ़ सकता है विवाद
चुनाव आयोग को लेकर जारी यह विवाद आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। राजनीतिक दलों के बयान और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे इस बहस को आगे बढ़ा सकते हैं।
फिलहाल मुख्य ध्यान इस बात पर है कि चुनाव आयोग इन आरोपों और उठाए गए सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और राजनीतिक दल इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता, निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े विषयों को लेकर जारी बहस ने एक बार फिर चुनावी संस्थाओं की भूमिका को केंद्र में ला दिया है।





