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जामिया विश्वविद्यालय में बढ़ा तनाव, प्रदर्शनकारी छात्रों को अंतिम चेतावनी

Ratna Netam
26 Oct 2026 9:52 PM IST
जामिया विश्वविद्यालय में बढ़ा तनाव, प्रदर्शनकारी छात्रों को अंतिम चेतावनी
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन एक बार फिर चर्चा में है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शनकारी छात्रों को अंतिम चेतावनी जारी करते हुए परिसर में स्थित गुलिस्तान-ए-गालिब भवन और गालिब लॉन को तत्काल खाली करने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का पालन नहीं करने पर संबंधित छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्रों के एक वर्ग ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने जारी किया अंतिम नोटिस
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारी छात्रों को नोटिस जारी किया गया। इसमें कहा गया कि गुलिस्तान-ए-गालिब भवन में राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विभाग संचालित होते हैं। प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी के कारण इन विभागों के नियमित शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।प्रशासन ने छात्रों से भवन और उत्तरी परिसर स्थित गालिब लॉन के धरनास्थल को तत्काल खाली करने को कहा है।नोटिस में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित निर्देशों का पालन नहीं करने वाले छात्रों के खिलाफ विश्वविद्यालय के नियमों और कानून के अनुसार कार्रवाई शुरू की जाएगी।
14 दिनों से जारी है छात्रों का विरोध प्रदर्शन
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर 12 अक्टूबर से विरोध प्रदर्शन चल रहा है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में वर्ष 2006 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए हैं।प्रदर्शनकारी छात्र निर्वाचित छात्रसंघ की बहाली, चुनाव की निश्चित तारीख घोषित करने और आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग कर रहे हैं।आंदोलन के दौरान कुछ छात्रों ने भूख हड़ताल भी शुरू की थी। रविवार को विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में छात्र एकत्रित हुए थे।
छात्रसंघ चुनाव कराने पर प्रशासन ने जताई सहमति
इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण घोषणा की है।सोमवार को रजिस्ट्रार कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने का भी निर्णय लिया गया है।प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों के आचरण की जांच के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की है। हालांकि छात्रसंघ संविधान को मंजूरी मिलने की निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।
प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच मतभेद
विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त करने पर सहमति बनी थी।समझौते के तहत छात्रों की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों और सोशल मीडिया पोस्ट के संबंध में सार्वजनिक माफी मांगने की बात भी सामने आई थी।हालांकि प्रदर्शनकारी छात्रों के एक वर्ग ने इस समझौते को स्वीकार नहीं किया। उनका कहना है कि चुनाव की निश्चित तारीख और अन्य मांगों पर स्पष्ट निर्णय होने तक विरोध जारी रहेगा।इस प्रकार आंदोलन समाप्त होने के दावों और धरनास्थल पर मौजूद छात्रों के रुख में अंतर दिखाई दे रहा है।
ऑनलाइन कक्षाएं शुरू, परिसर में सुरक्षा बढ़ाई गई
विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए 24 अक्टूबर से नियमित कक्षाओं को ऑनलाइन माध्यम में स्थानांतरित करने का फैसला किया था।इसके साथ ही पुस्तकालयों और कुछ प्रवेश द्वारों को बंद रखने का निर्देश दिया गया।विश्वविद्यालय का कहना है कि यह निर्णय छात्रों की सुरक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।वहीं, प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि इन प्रतिबंधों के कारण उन्हें परिसर में प्रवेश करने और अपनी मांगें रखने में परेशानी हो रही है। कुछ छात्रों ने भोजन और पानी की आपूर्ति बाधित होने के आरोप भी लगाए हैं।
छात्रसंघ चुनाव की तारीख पर टिकी निगाहें
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में जारी विवाद का प्रमुख मुद्दा छात्रसंघ चुनाव की बहाली है। प्रशासन ने चुनाव कराने की सैद्धांतिक सहमति दे दी है, लेकिन संविधान की मंजूरी और चुनाव की तारीख को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत से गतिरोध समाप्त होता है या नहीं।फिलहाल अंतिम चेतावनी के बाद परिसर में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। छात्रों की मांगों, विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और परिसर में कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है।
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