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कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी के मुरीद हुए तरुण चुघ

Ratna Netam
2 Oct 2026 8:54 PM IST
कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी के मुरीद हुए तरुण चुघ
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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के सांसद तरुण चुघ ने शुक्रवार को कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी, सूझबूझ और कर्तव्य के प्रति समर्पण की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छर ने अपनी जान की परवाह किए बिना 174 यात्रियों की जिंदगी बचाकर पूरी दुनिया के सामने हिम्मत और इंसानियत की मिसाल पेश की है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने जिस तरह हालात को संभाला, उससे एक बड़ा हवाई हादसा टल गया।
तरुण चुघ ने कैप्टन स्मित मच्छर को भारत का बहादुर बेटा बताते हुए कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में उन्होंने असाधारण साहस दिखाया। चुघ ने कहा, "भारत के एक बहादुर बेटे ने दुनिया के सामने हिम्मत और इंसानियत की मिसाल पेश की है। भगवान हनुमान के भक्त कैप्टन स्मित मच्छर ने अपनी जान की परवाह किए बिना 174 यात्रियों की जान बचाई। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, उनकी हिम्मत, सूझबूझ और काम के प्रति समर्पण ने एक बड़े हवाई हादसे को टाल दिया।"
चुघ ने कहा कि किसी भी विमान के पायलट पर यात्रियों की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी होती है। आपात स्थिति में कुछ ही पलों के भीतर लिए गए फैसले कई लोगों की जिंदगी पर असर डाल सकते हैं। उनके मुताबिक कैप्टन स्मित मच्छर ने ऐसी ही कठिन परिस्थिति में धैर्य बनाए रखा और अपनी जिम्मेदारी को प्राथमिकता देते हुए यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन ने अपना हौसला नहीं खोया। कठिन परिस्थितियों में उनकी सूझबूझ और साहस की वजह से विमान में सवार यात्रियों की जान बच सकी। चुघ ने इसे कर्तव्य के प्रति समर्पण का उदाहरण बताते हुए कहा कि कैप्टन ने अपने काम और यात्रियों की सुरक्षा को खुद से ऊपर रखा।
बीजेपी सांसद ने कैप्टन स्मित मच्छर की धार्मिक आस्था का उल्लेख करते हुए उन्हें भगवान हनुमान का भक्त बताया। उन्होंने कहा कि साहस और सेवा की भावना का परिचय देते हुए कैप्टन ने ऐसी परिस्थिति का सामना किया, जिसमें उनका खुद का जीवन भी खतरे में था। इसके बावजूद उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाई।
तरुण चुघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैप्टन स्मित मच्छर से हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने कैप्टन से बात कर उनकी बहादुरी को सलाम किया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने पूरे देश की ओर से उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। चुघ के मुताबिक कैप्टन की बहादुरी की कहानी देशवासियों के लिए गर्व का विषय है।
चुघ ने कहा कि संकट के समय व्यक्ति का साहस और निर्णय लेने की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण होती है। विमान में बड़ी संख्या में यात्री मौजूद थे और ऐसी स्थिति में पायलट की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छर ने जिस तरह मुश्किल हालात में विमान और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी, वह उनके प्रशिक्षण, अनुभव और कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण पहलू होता है। पायलटों और चालक दल के सदस्यों को आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन वास्तविक संकट के समय मानसिक मजबूती और तुरंत सही फैसला लेना भी बेहद जरूरी होता है। चुघ के अनुसार कैप्टन स्मित मच्छर ने ऐसी ही परिस्थिति में अपने साहस और सूझबूझ का परिचय दिया।
कैप्टन की बहादुरी की चर्चा के बीच उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की जा रही है। चुघ ने कहा कि देश उनके साहस को सलाम करता है। उन्होंने इस घटना को न केवल विमानन क्षेत्र बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक बताया, जो मुश्किल परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी निभाता है।
तरुण चुघ ने कहा कि 174 यात्रियों की जान बचाना अपने आप में बड़ी बात है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन ने जिस तरह अपने कर्तव्य को निभाया, उसने साबित किया कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी धैर्य और साहस से बड़ा संकट टाला जा सकता है। उन्होंने कैप्टन के समर्पण की प्रशंसा करते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
प्रधानमंत्री मोदी की ओर से कैप्टन से बातचीत किए जाने का उल्लेख करते हुए चुघ ने कहा कि यह पूरे देश की भावनाओं को दर्शाता है। उनके मुताबिक देश कैप्टन स्मित मच्छर के साहस और यात्रियों की सुरक्षा के प्रति दिखाई गई प्रतिबद्धता का सम्मान करता है।
कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी को लेकर सामने आए तरुण चुघ के बयान में सबसे अधिक जोर उनके साहस, सूझबूझ और कर्तव्य के प्रति समर्पण पर रहा। चुघ ने कहा कि अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रियों को सुरक्षित रखने का उनका प्रयास लंबे समय तक याद किया जाएगा। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि कैप्टन जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटेंगे।
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