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नई दिल्ली। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA), नई दिल्ली में 2 अक्टूबर को ‘स्वच्छता ही सेवा’ (SHS) अभियान का समापन किया गया। यह अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलाया गया। स्वास्थ्यवृत्त और योग विभाग की ओर से आयोजित इस अभियान का उद्देश्य संस्थान परिसर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाना और लोगों को स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए प्रेरित करना था।
इस वर्ष अभियान की थीम ‘स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ रखी गई थी। इसी संदेश के साथ अभियान के दौरान स्वच्छता को केवल व्यक्तिगत आदत तक सीमित रखने के बजाय सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के जरिए लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने, कचरे का जिम्मेदारी से निपटान करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय भागीदारी के प्रति प्रोत्साहित किया गया।
AIIA की ओर से आयोजित इस पहल में स्वच्छता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। अभियान के दौरान संस्थान और इसके आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई को लेकर जागरूकता पैदा करने की कोशिश की गई। साथ ही लोगों को यह संदेश दिया गया कि स्वच्छ वातावरण स्वस्थ जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। कचरा इधर-उधर फेंकने के बजाय उसके उचित प्रबंधन की आदत विकसित करना भी स्वच्छता अभियान का अहम हिस्सा रहा।
कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ साफ-सफाई के लिए गतिविधियां आयोजित करना नहीं था, बल्कि लोगों के व्यवहार में स्थायी बदलाव लाना भी था। इसके तहत जिम्मेदार नागरिक बनने, सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया। पर्यावरण संरक्षण को भी अभियान से जोड़ा गया, ताकि स्वच्छता और हरित वातावरण के बीच के संबंध को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
2 अक्टूबर को आयोजित समापन कार्यक्रम में AIIA के निदेशक पी. के. प्रजापति, डीन (DU) मंजूषा राजगोपाला, डीन (रिसर्च) राजगोपाला, एएमएस राजा राम महतो और संस्थान के फैकल्टी सदस्य शामिल हुए। इस अवसर पर अभियान के दौरान चलाए गए स्वच्छता संबंधी प्रयासों और जागरूकता गतिविधियों के महत्व को रेखांकित किया गया। संस्थान के अधिकारियों और शिक्षकों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया और अभियान के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने में योगदान दिया।
स्वच्छता ही सेवा अभियान के समापन अवसर पर यह बात भी सामने रखी गई कि साफ-सफाई किसी एक दिन या विशेष अभियान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया जाना जरूरी है। घर, कार्यस्थल, शिक्षण संस्थान और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने की जिम्मेदारी सभी की है। सामुदायिक भागीदारी के बिना स्वच्छता से जुड़े प्रयास लंबे समय तक प्रभावी नहीं हो सकते।
AIIA जैसे चिकित्सा और आयुर्वेद संस्थान के लिए स्वच्छता का महत्व और भी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण का सीधा संबंध माना जाता है। ऐसे में संस्थान परिसर में स्वच्छता को बढ़ावा देना न केवल बेहतर माहौल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि विद्यार्थियों, मरीजों, कर्मचारियों और आगंतुकों के बीच स्वस्थ आदतों को प्रोत्साहित करने में भी मदद करता है।
अभियान में जिम्मेदार कचरा प्रबंधन को भी प्रमुख विषय बनाया गया। तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में कचरे का सही तरीके से प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में लोगों को कचरा कम करने, उसे उचित स्थान पर डालने और पर्यावरण पर उसके नकारात्मक प्रभाव को समझने के लिए जागरूक करना जरूरी है। AIIA के इस अभियान ने इसी दिशा में लोगों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया।
पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़कर यह संदेश दिया गया कि साफ वातावरण का लाभ केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, कचरे को लेकर जिम्मेदार व्यवहार और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता जैसे मुद्दों पर सामूहिक जागरूकता को बढ़ावा देना इस तरह के अभियानों की बड़ी भूमिका है।
‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का समापन 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर हुआ। महात्मा गांधी के स्वच्छता और अनुशासन से जुड़े विचारों को ध्यान में रखते हुए इस दिन अभियान को समाप्त किया गया। इस मौके पर स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने और समाज के हर वर्ग को इसमें योगदान देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
AIIA की ओर से आयोजित यह अभियान इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि स्वच्छता केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। संस्थान स्तर पर चलाए गए ऐसे प्रयास समुदाय में जागरूकता बढ़ाने के साथ लोगों को अपने आसपास के वातावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने में मदद कर सकते हैं। ‘स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ की थीम के साथ आयोजित यह अभियान स्वच्छता, जिम्मेदार कचरा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के महत्व को सामने लाने का माध्यम बना।
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