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Supreme कोर्ट की सुलह कोशिश विफल, मंदिर-मस्जिद मामलों में जारी रहेगी न्यायिक प्रक्रिया

Ratna Netam
13 July 2026 7:43 PM IST
Supreme कोर्ट की सुलह कोशिश विफल, मंदिर-मस्जिद मामलों में जारी रहेगी न्यायिक प्रक्रिया
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New Delhi नई दिल्ली : देश में मंदिरों से जुड़े तीन प्रमुख विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की उच्चतम न्यायालय की पहल को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की ओर से शुरू की गई सहमति आधारित समाधान प्रक्रिया में हिन्दू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने शामिल होने से इनकार कर दिया है। दोनों पक्षों का कहना है कि इन मामलों में कानूनी और संवैधानिक प्रश्न जुड़े हुए हैं, इसलिए इनका समाधान केवल न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के फैसले से ही संभव है।

दरअसल, उच्चतम न्यायालय प्रशासन ने समाधान समारोह 2026 के तहत देश के प्रमुख विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने की पहल की थी। इसी पहल के अंतर्गत वाराणसी के ज्ञानवापी, मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़े मामलों में दोनों पक्षों को बातचीत के लिए आगे आने का आग्रह किया गया था।

हालांकि, दोनों समुदायों के पक्षकारों ने इस पहल को स्वीकार नहीं किया। उनका कहना है कि इन विवादों का स्वरूप केवल आपसी बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि इनमें ऐतिहासिक, कानूनी और संवैधानिक मुद्दे जुड़े हुए हैं। ऐसे में अंतिम निर्णय अदालत के माध्यम से ही होना चाहिए।

ज्ञानवापी विवाद में हिन्दू पक्ष का दावा है कि मस्जिद का निर्माण प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर के अवशेषों पर किया गया था। वहीं मुस्लिम पक्ष इन दावों को खारिज करता है और मामले में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट सहित अन्य कानूनी प्रावधानों का हवाला देता है।

मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में हिन्दू पक्ष का दावा है कि शाही ईदगाह परिसर श्रीकृष्ण जन्मभूमि क्षेत्र का हिस्सा है। जबकि मुस्लिम पक्ष मस्जिद प्रबंधन और पुराने समझौतों का हवाला देते हुए अपने पक्ष को मजबूत बताता है। यह मामला भी वर्तमान में अदालत में विचाराधीन है।

इसी तरह संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर भी दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। हिन्दू पक्ष का कहना है कि यहां प्राचीन हरिहर मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाए जाने का दावा है, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह स्थल लंबे समय से मस्जिद के रूप में इस्तेमाल होता रहा है।

इन तीनों मामलों में अलग-अलग अदालतों में कानूनी प्रक्रिया जारी है। पक्षकारों का मानना है कि विवादों से जुड़े सभी पहलुओं की सुनवाई न्यायालय में होनी चाहिए और अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

सुप्रीम कोर्ट की बातचीत के माध्यम से समाधान की पहल का उद्देश्य विवादों को आपसी सहमति से समाप्त करना था, लेकिन दोनों पक्षों के रुख के बाद अब इन मामलों का समाधान न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही आगे बढ़ने की संभावना है।

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