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अंधविश्वास के नाम पर ईसाई धर्म डायन हत्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय का बड़ा बयान

nidhi
14 Aug 2026 6:49 AM IST
अंधविश्वास के नाम पर ईसाई धर्म डायन हत्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय का बड़ा बयान
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डायन एलेक्जेंड्रा की हत्या पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी में कहा गया कि अब समाज को जगना होगा
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने डायन बताकर महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा और हत्या की घटनाओं पर कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर अंधविश्वास और ऐसी कुप्रथाएं कानून के शासन व संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करती रहीं, तो संवैधानिक लोकतंत्र कायम नहीं रह सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के एक पुराने मामले में आरोपी बालकू ओराम की उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किसी महिला को डायन बताकर उसके साथ अमानवीय व्यवहार करना समाज और संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
मामला वर्ष 1998 का है, जब ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में एक महिला पर डायन होने का आरोप लगाकर उसके साथ मारपीट की गई थी, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। इस घटना को महिला की बेटी ने अपनी आंखों से देखा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्य बेहद पीड़ादायक हैं और ऐसी घटनाएं समाज की सोच पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि भारतीय संविधान समानता, भाईचारे और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित समाज की कल्पना करता है। महिलाओं को अंधविश्वास के नाम पर प्रताड़ित करने वाली किसी भी प्रथा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि डायन बताकर महिलाओं को निशाना बनाना सिर्फ हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानसिक प्रताड़ना, सामाजिक बहिष्कार और शारीरिक हिंसा जैसी घटनाएं भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने समाज से ऐसी कुरीतियों के खिलाफ जागरूक होने की अपील की।
शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अपराध में दोष साबित करने के लिए गवाहों की संख्या नहीं बल्कि उनकी गवाही की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण होती है। एक भरोसेमंद प्रत्यक्षदर्शी की गवाही भी पर्याप्त हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अंधविश्वास के नाम पर होने वाली हिंसा के खिलाफ एक सख्त संदेश माना जा रहा है। अदालत ने कहा कि न्याय और तर्क की जीत होनी चाहिए तथा समाज को ऐसी अमानवीय परंपराओं से बाहर निकलने की जरूरत है।
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