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युद्ध विधवा प्रियंका सक्सेना की IAF में होगी वापसी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
Ratna Netam
25 Sept 2026 7:10 PM IST

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व भारतीय वायु सेना (IAF) अधिकारी और युद्ध-विधवा प्रियंका सक्सेना को बड़ी राहत देते हुए उन्हें दोबारा सेवा में शामिल करने का निर्देश दिया है। प्रियंका भारतीय वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारी के रूप में 10 साल तक सेवा दे चुकी हैं। उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण दिसंबर 2013 में वायुसेना छोड़ दी थी। अब शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उनकी पुनर्नियुक्ति का रास्ता साफ किया है।भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह राहत दी। अदालत ने साथ ही स्पष्ट किया कि यह आदेश प्रियंका सक्सेना के मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए पारित किया गया है और इसे दूसरे मामलों में नजीर के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान पीठ ने प्रियंका के दिवंगत पति की देश के लिए सेवा का भी उल्लेख किया। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि देश के लिए उनके दिवंगत पति के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मामले की पृष्ठभूमि में प्रियंका की अपनी 10 साल की सैन्य सेवा और बाद में उनके पति की ड्यूटी के दौरान मृत्यु दोनों महत्वपूर्ण परिस्थितियां रहीं।प्रियंका सक्सेना दिसंबर 2003 में भारतीय वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के रूप में शामिल हुई थीं। उन्होंने लॉजिस्टिक्स ब्रांच में करीब 10 वर्षों तक सेवा की। दिसंबर 2013 में उनका कार्यकाल समाप्त हुआ। उस समय उन्होंने घरेलू और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते स्थायी कमीशन का विकल्प नहीं चुना और सेवा से रिलीज हो गईं।
इसके बाद प्रियंका ने भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर हर्षित सिन्हा से विवाह किया। दिसंबर 2021 में राजस्थान के जैसलमेर के पास रात की उड़ान के दौरान मिग-21 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें विंग कमांडर सिन्हा की मृत्यु हो गई। पति की मृत्यु के बाद प्रियंका के सामने अपनी दो बेटियों की जिम्मेदारी थी। बाद में उन्होंने भारतीय वायुसेना में वापस आने की इच्छा जताई।प्रियंका ने ‘वीर नारी’ से संबंधित नीति के तहत वायुसेना में दोबारा शामिल होने का अनुरोध किया था। उनकी प्रमुख समस्या आयु सीमा को लेकर थी। मौजूदा नीति में आवेदन के लिए अधिकतम आयु की सीमा निर्धारित थी, जबकि प्रियंका उस सीमा को पार कर चुकी थीं। उन्होंने अपनी पूर्व की 10 साल की वायुसेना सेवा को ध्यान में रखते हुए आयु में छूट देने और दोबारा सेवा में शामिल करने का अनुरोध किया।
जब उनके अनुरोध पर अनुकूल फैसला नहीं हुआ तो मामला सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) पहुंचा। मई 2023 में AFT की प्रिंसिपल बेंच ने सरकार से उस नीति की समीक्षा करने को कहा था, जिसके तहत पहले सैन्य सेवा कर चुकी ऐसी महिलाओं की दोबारा नियुक्ति का सवाल उठता है, जो बाद में सेवारत सैन्यकर्मी की विधवा हो गई हों और फिर सशस्त्र बलों में वापस आना चाहती हों।AFT के रिकॉर्ड के अनुसार प्रियंका ने मांग की थी कि उन्हें पुनः कमीशन या बहाली के जरिए भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया था कि उनकी पहले की 10 साल की सेवा को प्रशिक्षण, रैंक, वरिष्ठता और वेतन संरक्षण जैसे पहलुओं के लिए ध्यान में रखा जाए।
मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। फरवरी 2025 में शीर्ष अदालत ने केंद्र से प्रियंका के अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक पुनर्विचार करने और कोई प्रभावी समाधान तलाशने को कहा था। इसके बाद भी मामला आगे चलता रहा।21 सितंबर 2026 की सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया था कि रक्षा मंत्री ने प्रियंका की दोबारा नियुक्ति के लिए आयु में छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अनुच्छेद 142 के तहत विशेष राहत देने पर विचार किया।
अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को उसके समक्ष लंबित किसी मामले में ‘पूर्ण न्याय’ सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश पारित करने की विशेष संवैधानिक शक्ति देता है। शीर्ष अदालत ने पूर्व में भी सशस्त्र बलों से संबंधित कुछ मामलों में इस शक्ति का इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों को देखते हुए राहत देने के लिए किया है।प्रियंका के मामले में भी अदालत ने सामान्य नीति में व्यापक बदलाव करने के बजाय उनके मामले की विशिष्ट परिस्थितियों को आधार बनाया। यही कारण है कि पीठ ने अपने आदेश को दूसरे मामलों के लिए मिसाल न मानने की बात स्पष्ट की है। इससे यह आदेश स्वतः उन सभी पूर्व SSC अधिकारियों पर लागू नहीं होगा जो दोबारा वायुसेना में शामिल होना चाहते हैं।
सुनवाई के दौरान प्रशिक्षण का सवाल भी सामने आया था। लंबे समय से सेवा से बाहर रहने के कारण प्रियंका को दोबारा परिचालन और पेशेवर आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की जरूरत पर चर्चा हुई। जस्टिस वी. मोहना ने पूर्व सुनवाई के दौरान संकेत दिया था कि सेवा में लंबे अंतराल को देखते हुए रिफ्रेशर ट्रेनिंग की आवश्यकता होगी।यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक पूर्व महिला सैन्य अधिकारी की दो अलग-अलग भूमिकाएं सामने आती हैं। प्रियंका स्वयं एक दशक तक वायुसेना में अधिकारी रहीं और बाद में एक सेवारत वायुसेना अधिकारी की पत्नी के रूप में पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाईं। पति की ड्यूटी के दौरान मृत्यु के बाद उन्होंने एक बार फिर वर्दी में लौटने की इच्छा जताई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब भारतीय वायुसेना को प्रियंका सक्सेना को दोबारा सेवा में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। अदालत ने उन्हें विशेष परिस्थितियों में यह राहत दी है। इसके साथ ही स्पष्ट कर दिया गया है कि फैसला प्रियंका के मामले के तथ्यों तक सीमित है और इससे पुनर्नियुक्ति का कोई सामान्य अधिकार या व्यापक नजीर स्थापित नहीं होगी।करीब 13 साल पहले पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण वायुसेना छोड़ने वाली प्रियंका सक्सेना के लिए यह आदेश एक महत्वपूर्ण मोड़ है। दस वर्षों की अपनी पूर्व सैन्य सेवा और पति की मृत्यु के बाद शुरू हुई लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब उनके लिए भारतीय वायुसेना में फिर से सेवा देने का रास्ता खुल गया है।
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