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धर्मस्थल रेप और मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

Kavita2
21 Sept 2026 12:32 PM IST
धर्मस्थल रेप और मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक के चर्चित धर्मस्थल रेप और मर्डर केस में बड़ा आदेश जारी करते हुए मामले की दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने जांच पूरी करने के लिए तीन महीने की समय-सीमा भी तय की है। यह आदेश मृतका सौजन्या की मां कुसुमावती गौड़ा की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया।

जानकारी के अनुसार, इस मामले की जांच पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने की थी। जांच के बाद सीबीआई ने आरोपी को बरी कर दिया था। सीबीआई की जांच और निष्कर्षों पर सवाल उठाते हुए सौजन्या की मां कुसुमावती गौड़ा ने दोबारा जांच की मांग की थी।

कुसुमावती गौड़ा ने पहले कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने मामले की नए सिरे से जांच कराने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) दायर की। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मामले की जांच को लेकर कई सवाल उठाए गए।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले हुई सुनवाई में सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने जुलाई में हुई सुनवाई के दौरान जांच के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जांच स्वतंत्र तरीके से करने के बजाय पिछली जांच के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने जैसी स्थिति नजर आती है।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच में सामने आई कमियों को गंभीरता से लिया और मामले की दोबारा जांच की जरूरत बताई। इसके बाद सोमवार को अदालत ने पुन: जांच का आदेश जारी किया।

अदालत के आदेश के तहत अब मामले की जांच नए सिरे से की जाएगी। जांच एजेंसी को तीन महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करने को कहा गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए।

धर्मस्थल रेप और मर्डर केस कर्नाटक के सबसे चर्चित मामलों में से एक रहा है। इस मामले में सौजन्या की मौत के बाद लंबे समय तक न्याय की मांग उठती रही। परिवार लगातार जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाता रहा।

सौजन्या की मां का आरोप था कि मामले की जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया। इसी आधार पर उन्होंने दोबारा जांच की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि मामले की नए सिरे से जांच से सच्चाई सामने आ सकेगी। वहीं, जांच एजेंसी के सामने यह चुनौती होगी कि वह पुराने रिकॉर्ड और नए तथ्यों के आधार पर मामले की गहराई से पड़ताल करे।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी मामले में दोबारा जांच का आदेश तब दिया जाता है जब अदालत को लगता है कि पहले की जांच में महत्वपूर्ण कमियां रह गई हैं या न्याय के हित में नए सिरे से जांच आवश्यक है।

अब इस मामले में जांच एजेंसी को पुराने दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा करनी होगी। इसके अलावा ऐसे पहलुओं की भी जांच करनी होगी, जो पहले की जांच में शामिल नहीं हो सके थे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कर्नाटक में इस मामले को लेकर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। मामले से जुड़े पक्षों की नजर अब आगे होने वाली जांच प्रक्रिया पर रहेगी।

फिलहाल अदालत के निर्देश के अनुसार जांच एजेंसी को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी होगी। तीन महीने की अवधि में जांच पूरी कर अदालत के सामने स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

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