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सोशल मीडिया पर बाल शोषण मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम

nidhi
18 Aug 2026 6:56 AM IST
सोशल मीडिया पर बाल शोषण मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम
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बाल शोषण रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
नई दिल्ली: बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट की रिपोर्टिंग व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का पालन किस तरह कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बच्चों के
यौन शोषण
से जुड़ी सामग्री की जानकारी भारत की संबंधित जांच एजेंसियों को सीधे देने के बजाय विदेशी संस्थाओं को रिपोर्ट कर रहे हैं। याचिका में ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और एक समान रिपोर्टिंग व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों के शोषण से जुड़ी सामग्री की पहचान, उसे हटाने, डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने और जांच एजेंसियों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही ऐसे मामलों में लापरवाही बरतने वाले प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और कानून मंत्रालय को पक्षकार बनाने की अनुमति दी है। अदालत ने केंद्र से इस मुद्दे पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को लेकर ऑनलाइन कंपनियों की निगरानी और जवाबदेही व्यवस्था कितनी प्रभावी है। इसमें मांग की गई है कि सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए रिपोर्टिंग की एक समान प्रक्रिया तय की जाए, जिससे ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई हो सके।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी पॉक्सो कानून और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियों को लेकर निर्देश जारी कर चुका है। अदालत ने कहा था कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की जानकारी संबंधित पुलिस इकाई या साइबर अपराध पोर्टल तक पहुंचाना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बड़ी चुनौती बन गई है। सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान, निजी जानकारी का दुरुपयोग और आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार बच्चों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे मामलों में मजबूत निगरानी तंत्र और सख्त कानूनों का पालन जरूरी है।
अब केंद्र सरकार के जवाब के बाद यह स्पष्ट होगा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़े संवेदनशील कंटेंट की निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट की पहल को बच्चों की डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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