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MBBS डॉक्टरों के लिए ग्रामीण सेवा जरूरी होगी?
नई दिल्ली: देश में मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों के लिए अनिवार्य ग्रामीण सेवा के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से कहा है कि वह एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने वाले डॉक्टरों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अनिवार्य सेवा की व्यवस्था से जुड़े मुद्दों की जांच करे। न्यायालय का यह निर्देश ऐसे समय आया है, जब ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता और डॉक्टरों की तैनाती को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। अदालत ने एनएमसी को एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों की अनिवार्य ग्रामीण सेवा के विषय पर विचार करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
कर्नाटक के मेडिकल छात्रों की याचिका से जुड़ा है मामला
यह मामला कर्नाटक के एक डीम्ड विश्वविद्यालय में निजी सीटों पर एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले कुछ छात्रों की याचिका से जुड़ा है। छात्रों ने राज्य सरकार की उस व्यवस्था पर सवाल उठाया है, जिसके तहत मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में अनिवार्य सेवा देने की शर्त लगाई गई है। याचिकाकर्ताओं ने कर्नाटक सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवा आयुक्त से आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें अनिवार्य ग्रामीण सेवा से संबंधित शपथपत्र देने के लिए बाध्य किए बिना एनओसी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मई 2024 में याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी थी। इसके बाद से इस विषय पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
कर्नाटक में एक साल की ग्रामीण सेवा का प्रावधान
कर्नाटक सरकार ने वर्ष 2012 में चिकित्सा पाठ्यक्रम पूरा करने वाले उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य सेवा से संबंधित कानून बनाया था। इसके बाद वर्ष 2015 में संबंधित नियम लागू किए गए। इन प्रावधानों के तहत सरकारी शिक्षण संस्थानों और निजी अथवा डीम्ड विश्वविद्यालयों में सरकारी सीटों पर पढ़ने वाले कुछ श्रेणियों के मेडिकल छात्रों के लिए एक वर्ष की अनिवार्य ग्रामीण सार्वजनिक सेवा की व्यवस्था की गई। इसमें एमबीबीएस, स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम और सुपर स्पेशियलिटी से जुड़े उम्मीदवार शामिल हैं। संबंधित अभ्यर्थियों को कर्नाटक मेडिकल काउंसिल में स्थायी पंजीकरण प्राप्त करने से पहले निर्धारित सेवा संबंधी शर्तों का पालन करना होता है। 28 जुलाई 2023 को जारी अधिसूचना के जरिए इस व्यवस्था का दायरा निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों की निजी सीटों पर अध्ययन करने वाले छात्रों तक बढ़ाया गया। इसी प्रावधान को लेकर विवाद सामने आया है।
निजी सीटों पर पढ़ने वाले छात्रों ने उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि निजी सीटों पर मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र अपेक्षाकृत अधिक फीस का भुगतान करते हैं। ऐसे में उन्हें सरकारी सीटों पर पढ़ने वाले विद्यार्थियों के समान अनिवार्य ग्रामीण सेवा की शर्तों के अंतर्गत रखना उचित है या नहीं, यह न्यायिक विचार का विषय है। छात्रों ने संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार से जुड़े तर्क भी प्रस्तुत किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए डॉक्टरों की सेवाएं सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक आवश्यकता है। इस कारण मामला केवल मेडिकल छात्रों के अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी नीतियों से भी जुड़ा हुआ है।
राष्ट्रीय स्तर पर एक समान नीति की जरूरत पर चर्चा
इस मामले की पूर्व सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में डॉक्टरों की अनिवार्य ग्रामीण सेवा को लेकर स्पष्ट और समान नीतिगत व्यवस्था की आवश्यकता पर भी विचार किया था। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया था कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और विभिन्न राज्यों में डॉक्टरों की सेवा से संबंधित अलग-अलग बॉन्ड व्यवस्थाएं लागू हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्नातक स्तर पर अनिवार्य सेवा को लेकर पूरे देश में एक समान व्यवस्था नहीं है। अदालत ने इस विषय पर केंद्र सरकार के रुख और संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श की आवश्यकता को महत्वपूर्ण माना।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर
भारत के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में मेडिकल स्नातकों के लिए ग्रामीण सेवा की नीति तैयार करने का प्रश्न स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि भविष्य में इस संबंध में व्यापक नीतिगत व्यवस्था बनती है, तो इसका असर मेडिकल छात्रों, शिक्षण संस्थानों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर पड़ सकता है।
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