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मणिपुर यूनिवर्सिटी के SC कैंडिडेट्स का आरक्षण को घटाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रखा बरकरार

Deepa Sahu
5 Jan 2022 7:01 AM GMT
मणिपुर यूनिवर्सिटी के SC कैंडिडेट्स का आरक्षण को घटाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रखा बरकरार
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केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम 2006 में संशोधन के संदर्भ में अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवारों के लिए प्रवेश में आरक्षण को 15% से घटाकर 2% और एसटी के लिए 7.5% से बढ़ाकर 31% करने के मणिपुर हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है.

केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम 2006 में संशोधन के संदर्भ में अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवारों के लिए प्रवेश में आरक्षण को 15% से घटाकर 2% और एसटी के लिए 7.5% से बढ़ाकर 31% करने के मणिपुर हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आक्षेपित निर्णय बरकरार रखा गया है, एकल न्यायाधीश द्वारा लिए गए विचार का समर्थन करते हैं. एससी उम्मीदवारों के लिए 2%, एसटी उम्मीदवारों के लिए 31% और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए 17% विश्वविद्यालय को आरक्षण मानदंडों का पालन करना होगा. मणिपुर हाईकोर्ट से पहली ही इस मामले पर हरी झंडी मिली थी.

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने जनजातीय छात्रों के दाखिले के कोटे में कटौती की थी. मणिपुर यूनिवर्सिटी ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन (एमयूटीएसयू) यूजीसी की नीति को लागू होने देना नहीं चाहते हैं. यूजीसी की अधिसूचना के मुताबिक, अनुसूचित जाति के लिए शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति एवं छात्रों के दाखिले के लिए 15 फीसदी, अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5 फीसदी और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी का आरक्षण कोटा निर्धारित है.
मणिपुर विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा फंडिग सभी विश्वविद्यालय को यूजीसी की नीति का पालन करना होगा इसलिए विश्वविद्यालय इस नियम के लिए बाध्य हैं.आरक्षण का मामला काफी दिनों से चल रहा है जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी है. आरक्षण को मामले को लेकर स्टूडेंट्स ने काफी उपद्रव किया था. विश्वविद्यालय ने अपील की थी कि स्टूडेंट्स ऐसे कदम न उठाएं.
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