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दीपके के विरोध मार्च पर सुप्रीम कोर्ट सख्त बोला कानून के दायरे में रहें प्रदर्शनकारी
Ratna Netam
31 Aug 2026 2:43 PM IST

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दिल्ली : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके की ओर से 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित रैली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने रैली पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा है, लेकिन कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने यह मामला पहुंचा था। याचिकाकर्ता की ओर से रैली रोकने की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और सभी पक्ष कानून के दायरे में रहकर काम करें।
5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित है मार्च
अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाली CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। यह मार्च शिक्षक दिवस के मौके पर आयोजित किया जाना है। संगठन का कहना है कि सरकार की ओर से पहले किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया, जिसके विरोध में यह प्रदर्शन किया जा रहा है।
CJP के मुताबिक, यह मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। संगठन का दावा है कि उसका उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।
रैली रोकने की मांग लेकर पहुंची थी याचिका
रैली को लेकर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी, जिसमें राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिका में सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का हवाला दिया गया था।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में रैली को रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना रहा कि प्रदर्शन के दौरान शांति बनाए रखने और नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की है।
CJI सूर्यकांत ने दिया कानून व्यवस्था पर जोर
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि अधिकारियों से उम्मीद की जाती है कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखेंगे। उन्होंने साफ किया कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान सभी पक्षों को जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब 5 सितंबर को होने वाले मार्च का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि प्रशासन की भूमिका अहम होगी, क्योंकि राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से ही विशेष सतर्कता बरती जाती है।
CJP ने सरकार पर लगाए हैं आरोप
अभिजीत दीपके की पार्टी CJP का कहना है कि सरकार ने आंदोलन खत्म कराने के दौरान जो आश्वासन दिए थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया। संगठन पहले भी विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर चुका है।
CJP का दावा है कि वह युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रही है। पार्टी ने अपने समर्थकों से बड़ी संख्या में मार्च में शामिल होने की अपील की है।
पहले भी सुर्खियों में रहा है आंदोलन
अभिजीत दीपके और CJP इससे पहले भी कई आंदोलनों को लेकर चर्चा में रहे हैं। छात्रों से जुड़े मुद्दों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर संगठन ने कई बार सरकार और संस्थानों के खिलाफ आवाज उठाई है।
कुछ मामलों में संगठन और प्रशासन के बीच टकराव भी देखने को मिला है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब सबकी नजर 5 सितंबर के प्रदर्शन पर रहेगी।
प्रशासन के सामने होगी बड़ी चुनौती
दिल्ली में होने वाले बड़े प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के सामने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रहती है। राजधानी में कई संवेदनशील इलाके हैं, जहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से यातायात और सुरक्षा से जुड़े इंतजाम करने पड़ते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हो और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।
राजनीतिक और सामाजिक नजरिए से अहम रैली
अभिजीत दीपके की 5 सितंबर वाली रैली अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संगठन के कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है, जबकि प्रशासन सुरक्षा तैयारियों में जुटेगा।
फिलहाल कोर्ट ने रैली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है और अब आगे की जिम्मेदारी आयोजकों तथा प्रशासन दोनों की होगी कि लोकतांत्रिक अधिकार और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बना रहे।
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