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Judicial प्रक्रिया में AI के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, वकीलों को चेतावनी

Ratna Netam
2 July 2026 3:50 PM IST
Judicial प्रक्रिया में AI के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, वकीलों को चेतावनी
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New Delhi नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा तैयार किए गए फर्जी और मनगढ़ंत न्यायिक फैसलों के इस्तेमाल पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि बिना जांच-पड़ताल के ऐसे AI जनित फैसलों को पेश करना या उनका हवाला देना पूरी तरह अस्वीकार्य है और इस पर न्यायपालिका को ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनानी चाहिए।

मामला एस्सेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स के दिवालियापन से जुड़ा है, जिसमें नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और NCLAT के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। यह फैसला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनाया।बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, “पूजा रमेश सिंह बनाम जेएंडके बैंक” मामले में NCLT ने जिन कानूनी मिसालों (precedents) का हवाला दिया था, वे वास्तविक रूप से मौजूद ही नहीं थे। जांच में पाया गया कि जिन फैसलों पर भरोसा किया गया था, वे AI टूल्स द्वारा गढ़े गए फर्जी और मनगढ़ंत संदर्भ थे।

कोर्ट ने इस गंभीर गलती पर नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है। अदालत ने साफ किया कि यदि कोई वकील बिना सत्यापन के ऐसे फर्जी AI जनित फैसलों का हवाला देता है, तो इसे ‘कदाचार’ (misconduct) माना जाएगा और उस पर कार्रवाई की जा सकती है।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी न्यायिक आदेश में आंशिक रूप से भी फर्जी या मनगढ़ंत AI सामग्री का उपयोग पाया जाता है, तो पूरा आदेश कानून की दृष्टि में अवैध माना जाएगा और उसे रद्द किया जा सकता है। अदालत ने जोर देकर कहा कि न्यायिक निर्णयों की विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

पीठ ने आगे कहा कि यदि कोई न्यायाधीश ऐसे फर्जी या बिना सत्यापित AI-जनित सामग्री पर भरोसा करता है, तो यह गंभीर त्रुटि होगी और इससे न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा।इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को निर्देश दिया है कि वह इस विषय पर स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करे, ताकि वकीलों और अदालतों द्वारा AI आधारित सामग्री के इस्तेमाल को लेकर एक सख्त ढांचा तय किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला तकनीक और न्याय व्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अदालत ने यह संदेश दिया है कि तकनीक का उपयोग स्वीकार्य है, लेकिन बिना सत्यापन के उसका उपयोग न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।फिलहाल, यह आदेश देश की कानूनी व्यवस्था में AI के उपयोग को लेकर एक अहम मोड़ माना जा रहा है, जिससे भविष्य में अदालतों में तकनीकी सामग्री की जांच और भी सख्त हो जाएगी।

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