दिल्ली-एनसीआर

कार्तिक सत्यनारायण की अंतरिम सुरक्षा सुप्रीम कोर्ट ने की बहाल

Ratna Netam
23 Sept 2026 7:55 PM IST
कार्तिक सत्यनारायण की अंतरिम सुरक्षा सुप्रीम कोर्ट ने की बहाल
x
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तेंदुए के कथित शिकार से जुड़े एक मामले में वाइल्डलाइफ SOS के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कार्तिक सत्यनारायण को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा बहाल कर दी है। शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही सत्यनारायण को जांच में पूरा सहयोग करने और 28 सितंबर को सुबह 11 बजे संबंधित वन अधिकारियों के सामने पेश होने का निर्देश दिया है।जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने सत्यनारायण की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। सत्यनारायण ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत उन्हें गिरफ्तारी से पहले मिली सुरक्षा वापस ले ली गई थी।सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अंतरिम राहत देते हुए साफ किया कि याचिकाकर्ता को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करना होगा। अदालत ने उन्हें निर्धारित तारीख और समय पर वन अधिकारियों के सामने उपस्थित होने को कहा है। इस तरह शीर्ष अदालत ने गिरफ्तारी से सुरक्षा को जांच में सहयोग की शर्त के साथ बहाल किया है।
मामला मध्य प्रदेश में एक तेंदुए की मौत और उसके कथित शिकार से जुड़ा है। वन विभाग इस मामले में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत जांच कर रहा है। जांच के दौरान अधिकारियों की ओर से मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। सत्यनारायण की ओर से गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए कानूनी संरक्षण की मांग की गई थी।इससे पहले मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंचा था। सत्यनारायण को एक समय गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण मिला था, लेकिन बाद में हाई कोर्ट ने उस सुरक्षा को वापस ले लिया। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी।
शीर्ष अदालत के सामने सत्यनारायण की ओर से अंतरिम सुरक्षा जारी रखने की मांग की गई। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तत्काल राहत देते हुए गिरफ्तारी से संरक्षण बहाल कर दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए कि इस राहत के कारण जांच प्रभावित न हो।अदालत ने सत्यनारायण को 28 सितंबर को सुबह 11 बजे वन अधिकारियों के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। उन्हें जांच के दौरान अधिकारियों द्वारा पूछे जाने वाले सवालों का जवाब देने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा आदेश अंतरिम प्रकृति का है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता या किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी पर अंतिम फैसला दे दिया है। तेंदुए के कथित शिकार से जुड़े आरोपों की जांच संबंधित वन अधिकारी कर रहे हैं और जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।कार्तिक सत्यनारायण वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था वाइल्डलाइफ SOS के सह-संस्थापक हैं। संस्था भारत में वन्यजीव बचाव, पुनर्वास और संरक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों पर काम करती रही है। ऐसे में संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारी का नाम वन्यजीव से जुड़े एक मामले में सामने आने के कारण इस कानूनी विवाद पर ध्यान बढ़ गया है।
हालांकि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जांच के दायरे में किसी व्यक्ति का नाम आना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं होता। सत्यनारायण से जुड़े मामले में भी न्यायिक और जांच प्रक्रिया अभी जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल गिरफ्तारी से संरक्षण देते हुए जांच में सहयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।वन्यजीवों के शिकार से जुड़े मामलों को भारत में गंभीरता से लिया जाता है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजातियों के शिकार, अवैध कब्जे, व्यापार और उनसे जुड़े अन्य अपराधों के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। ऐसे मामलों में वन विभाग को जांच और आवश्यक कार्रवाई के अधिकार प्राप्त हैं।
तेंदुआ भारत में संरक्षित वन्यजीवों में शामिल है। इसलिए तेंदुए की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर वन विभाग द्वारा परिस्थितियों की जांच की जाती है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाता है कि जानवर की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या उसके पीछे किसी तरह की गैरकानूनी गतिविधि थी।इस मामले में भी जांच एजेंसियों के सामने मुख्य सवाल कथित शिकार की परिस्थितियों और उससे जुड़े लोगों की संभावित भूमिका को स्पष्ट करना है। वन अधिकारियों के सामने सत्यनारायण की निर्धारित पेशी इसी जांच प्रक्रिया का हिस्सा होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश के जरिए दो पहलुओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। एक तरफ याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया गया है, जबकि दूसरी तरफ उन्हें जांच में पूर्ण सहयोग करने के लिए बाध्य किया गया है। अगर अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया जाता है तो आगे की सुनवाई में इसका प्रभाव पड़ सकता है।अब इस मामले में 28 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। सत्यनारायण को सुबह 11 बजे वन अधिकारियों के सामने पेश होना होगा। इस दौरान अधिकारी मामले से संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों के बारे में उनसे पूछताछ कर सकते हैं।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल मुख्य याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। अदालत संबंधित पक्षों की दलीलों और जांच की स्थिति पर विचार करने के बाद आगे के निर्देश जारी कर सकती है।फिलहाल कार्तिक सत्यनारायण को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा मिल गई है, लेकिन उन्हें जांच से छूट नहीं दी गई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट रूप से जांच में पूरा सहयोग करने की शर्त लगाई है। ऐसे में अब वन अधिकारियों के सामने उनकी पेशी और उसके बाद जांच में सामने आने वाले तथ्य इस मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।
Next Story