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सुप्रीम कोर्ट ने मेंशनिंग से किया इनकार, HC जाने की सलाह

New Delhi नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर तत्काल मेंशनिंग करने से इनकार कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अदालत के आवारा कुत्तों से जुड़े आदेश पर गलत टिप्पणी की है। याचिका में दावा किया गया था कि मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के 19 मई के आदेश को लेकर यह कहा कि अदालत ने “आवारा कुत्तों को मारने की खुली छूट” दे दी है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि केवल किसी मुख्यमंत्री के बयान के आधार पर अदालत अपने आदेश में बदलाव नहीं कर सकती। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “सिर्फ इसलिए कि एक मुख्यमंत्री ने बयान दिया है, क्या इसका मतलब है कि हमें अपना आदेश बदलना होगा?”
मामले को मेंशन करने वाले वकील ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के 19 मई के आदेश के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। वकील ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान अदालत के आदेश की गलत व्याख्या करता है और इससे जनता में गलत संदेश जा सकता है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों के लिए उचित मंच का उपयोग किया जाना चाहिए। अदालत ने वकील से कहा कि वे इस मामले को लेकर पंजाब हाई कोर्ट जाएं।
बेंच ने कहा, “आप पंजाब हाई कोर्ट जाएं,” और आगे यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट इस स्तर पर इस याचिका पर सुनवाई या मेंशनिंग पर विचार नहीं करेगा।
इस घटनाक्रम के बाद यह मामला न्यायिक प्रक्रिया और सार्वजनिक बयानों के बीच संतुलन को लेकर चर्चा में आ गया है। अदालत ने संकेत दिया कि किसी भी आदेश की व्याख्या या उससे जुड़ी शिकायतों के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि न्यायिक आदेशों को लेकर सार्वजनिक स्तर पर दिए गए बयानों को सीधे अदालत के आदेश में बदलाव का आधार नहीं बनाया जा सकता।
फिलहाल, अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी है, जहां वे अपनी शिकायत को कानूनी रूप से आगे बढ़ा सकते हैं।





