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दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति
Ratna Netam
9 Oct 2026 7:18 PM IST

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों से पहले मेट्रो, रेलवे और सड़क यातायात पर लगाई जा रही पाबंदियों को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने आम नागरिकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका पर आपत्ति जताते हुए अधिकारियों से प्रतिबंधों की समीक्षा करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर मेट्रो और ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। इस बीच कांग्रेस ने कहा कि वह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई पूरी ताकत से जारी रखेगी।कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि दिल्ली में 57 मेट्रो स्टेशन बंद किए जा रहे हैं, ट्रेनों को रोका जा रहा है और जगह-जगह बैरिकेड लगाकर सड़कों को बंद किया जा रहा है। पार्टी के अनुसार, इन पाबंदियों के कारण आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।कांग्रेस ने बताया कि नागरिकों की इसी परेशानी को लेकर पार्टी के कानूनी विभाग के प्रमुख और सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। इस दौरान यूथ कांग्रेस के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
दिल्ली में पाबंदियों को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने शुक्रवार को राजधानी में लागू की जा रही सुरक्षा संबंधी पाबंदियों पर सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर उठाए जा रहे कदमों से आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।पार्टी ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि दिल्ली में 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद किया जा रहा है। इसके अलावा ट्रेन सेवाओं को रोके जाने और सड़कों पर बैरिकेड लगाए जाने का भी दावा किया गया।कांग्रेस का कहना है कि इन व्यवस्थाओं से ऐसे नागरिक भी प्रभावित हो सकते हैं, जिनका विरोध प्रदर्शनों से कोई संबंध नहीं है।हालांकि, 57 मेट्रो स्टेशनों के बंद होने का आंकड़ा कांग्रेस के बयान पर आधारित है। उपलब्ध जानकारी में संबंधित परिवहन प्राधिकरण की ओर से सभी 57 स्टेशनों के बंद होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।
अभिषेक मनु सिंघवी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
कांग्रेस ने बताया कि पार्टी के कानूनी विभाग के प्रमुख और सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने नागरिकों की परेशानी का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया।पार्टी ने अपनी पोस्ट में कहा, "आज, नागरिकों की इसी परेशानी को लेकर कांग्रेस के कानूनी विभाग के प्रमुख और सांसद डॉ. ए.एम. सिंघवी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। इस दौरान यूथ कांग्रेस के प्रतिनिधि भी वहां मौजूद थे।"कांग्रेस ने इसे नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा विषय बताया। पार्टी का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर ऐसी व्यापक पाबंदियां नहीं लगनी चाहिए, जिनसे सामान्य जनजीवन प्रभावित हो।कांग्रेस ने यह भी कहा कि वह नागरिकों को उनके अधिकार दिलाने के लिए अपना प्रयास जारी रखेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने आम नागरिकों की परेशानी पर जताई चिंता
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों से पहले दिल्ली में लगाई गई परिवहन संबंधी पाबंदियों पर सवाल उठाए। अदालत ने विशेष रूप से उन नागरिकों की परेशानी पर ध्यान दिया, जिनका प्रदर्शन में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है।अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा उपाय जरूरी हो सकते हैं, लेकिन इनके कारण सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बंद करना उचित नहीं है।सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से प्रतिबंधों पर उचित तरीके से पुनर्विचार करने को कहा। अदालत की चिंता मुख्य रूप से आम लोगों की आवाजाही और दैनिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर थी।
57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास पर पाबंदी
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने शुक्रवार को घोषणा की कि सुरक्षा कारणों से 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार 9 अक्टूबर की रात नौ बजे से बंद किए जाएंगे। ये प्रतिबंध 10 अक्टूबर को भी लागू रहने की बात कही गई।प्रभावित स्टेशनों में राजीव चौक, नई दिल्ली, केंद्रीय सचिवालय, पटेल चौक और कश्मीरी गेट जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं।हालांकि, इन स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद करने का अर्थ पूरी मेट्रो सेवा का बंद होना नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन को छोड़कर अन्य प्रभावित स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रखने की व्यवस्था बताई गई थी।
रेलवे सेवाओं पर भी पड़ा असर
प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर रेलवे ने भी कुछ ट्रेनों को रद्द करने और सेवाओं में बदलाव की घोषणा की है।नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों से संबंधित सेवाएं प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। परिवहन संबंधी प्रतिबंधों का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना बताया गया है।हालांकि, इन फैसलों से यात्रियों की यात्रा योजनाओं पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन पर व्यापक पाबंदियों के बजाय परिस्थितियों के अनुरूप उपाय अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सुरक्षा व्यवस्था और नागरिक अधिकारों पर बहस
दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई हैं।पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे कम समय में सूचना मिलने, पहले के कार्यक्रमों में निर्देशों के कथित उल्लंघन और कानून-व्यवस्था तथा यातायात संबंधी चिंताओं का हवाला दिया है।दूसरी ओर, कांग्रेस का कहना है कि सुरक्षा इंतजामों के कारण आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।यह मामला अब कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सामान्य आवाजाही सुनिश्चित करने के बीच संतुलन का प्रश्न बन गया है।
कांग्रेस ने अधिकारों की लड़ाई जारी रखने की बात कही
कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया बयान में कहा कि पार्टी नागरिकों के अधिकारों के लिए हर लड़ाई पूरी ताकत से लड़ेगी।पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामला उठाए जाने को आम लोगों की परेशानियों से जोड़ते हुए कहा कि मेट्रो, रेलवे और सड़क यातायात पर प्रतिबंधों से नागरिकों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद अब अधिकारियों की ओर से प्रतिबंधों की समीक्षा और परिवहन सेवाओं को लेकर लिए जाने वाले फैसले महत्वपूर्ण होंगे।फिलहाल अदालत ने व्यापक परिवहन प्रतिबंधों पर चिंता जताई है, जबकि कांग्रेस ने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना प्रयास जारी रखने की बात कही है।
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