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घरेलू हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट के जज का बड़ा बयान

nidhi
8 Oct 2026 7:16 AM IST
घरेलू हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट के जज का बड़ा बयान
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महिलाओं की सुरक्षा पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कही बड़ी बात
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने महिलाओं की सुरक्षा और घरेलू हिंसा के मामलों को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब कोई महिला डर, हिंसा या किसी परेशानी के बारे में अपनी बात रखती है, तो उसकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी शिकायतों को सामान्य पारिवारिक मामला मानकर टालना भी उचित नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को भरोसा होना चाहिए कि उनकी बात सुनी जाएगी और कानून उनकी सुरक्षा के लिए कार्रवाई करेगा।
राष्ट्रीय महिला आयोग के सम्मेलन में दिया बयान
जस्टिस विक्रम नाथ ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा आयोजित सुरक्षा अधिकारियों के राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में अधिकारियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे बिना किसी डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
परिवार बचाने के लिए चुप रहना जरूरी नहीं
जस्टिस नाथ ने अपने संबोधन में पारिवारिक सोच और सामाजिक मान्यताओं पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बेटियों को यह मानकर बड़ा नहीं होना चाहिए कि परिवार बचाने के लिए उन्हें हर परिस्थिति में चुप रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बेटों को भी यह नहीं सिखाया जाना चाहिए कि परिवार की प्रतिष्ठा इस बात पर निर्भर करती है कि कोई महिला कितना अत्याचार सहन कर सकती है। जस्टिस नाथ के अनुसार, रिश्तों को बनाए रखने के लिए आपसी समझ और समायोजन जरूरी हो सकता है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है। जब किसी महिला से ऐसी परिस्थितियों को सहन करने की अपेक्षा की जाने लगे, जिन्हें उसे सहना ही नहीं चाहिए, तब कानून और सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
घरेलू हिंसा के मामलों में सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका अहम
जस्टिस विक्रम नाथ ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत नियुक्त सुरक्षा अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी संकट में फंसी महिलाओं को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। घरेलू हिंसा की शिकायत करने वाली महिलाओं को कानूनी सहायता और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने में उनकी जिम्मेदारी विशेष महत्व रखती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और उन्हें उचित सहायता दिलाना जरूरी है। घरेलू हिंसा के मामलों में शुरुआती प्रतिक्रिया महिलाओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
महिलाओं तक पहुंचे सहायता व्यवस्था
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहतकर ने भी सम्मेलन में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि संकट में फंसी महिलाओं को सहायता प्राप्त करने के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि सहायता व्यवस्था को जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचना चाहिए। सुरक्षा अधिकारियों को ऐसी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम करना चाहिए, जिससे पीड़ित महिलाओं को समय पर सहयोग मिल सके। आयोग की अध्यक्ष ने अधिकारियों के नियमित प्रशिक्षण, कानूनी जानकारी और स्थानीय स्तर पर सहायता नेटवर्क मजबूत करने की आवश्यकता भी बताई। उनका कहना था कि घरेलू हिंसा से निपटने के लिए घटना के बाद कार्रवाई करने के साथ जागरूकता और रोकथाम के प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं।
महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा पर जोर
जस्टिस नाथ ने कहा कि महिलाओं को यह विश्वास दिलाना जरूरी है कि हिंसा या उत्पीड़न की शिकायत करने पर उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने परिवारों और संस्थाओं से महिलाओं की बात को गंभीरता से लेने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा के प्रति समाज की सोच में बदलाव आने में समय लग सकता है, लेकिन इसकी शुरुआत परिवारों और संस्थाओं के वर्तमान व्यवहार से हो सकती है।सम्मेलन के दौरान महिलाओं को कानूनी संरक्षण देने और सहायता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। जस्टिस नाथ का संदेश था कि किसी महिला की पीड़ा को सामान्य समझकर अनदेखा करने के बजाय उसकी सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।
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