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दारा सिंह की रिहाई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ओडिशा बोर्ड को निर्देश

Kavita2
19 Aug 2026 2:11 PM IST
दारा सिंह की रिहाई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ओडिशा बोर्ड को निर्देश
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा राज्य सजा समीक्षा बोर्ड (Sentence Review Board) को निर्देश दिया है कि वह रबिंद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह की समय से पहले रिहाई की याचिका पर जल्द फैसला करे। दारा सिंह 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सजा समीक्षा बोर्ड की ओर से निर्णय में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि बोर्ड इस मामले पर विचार कर अपना फैसला अगली सुनवाई से पहले अदालत के सामने पेश करे। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को निर्धारित की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि सजा समीक्षा बोर्ड को इस मामले में निर्णय लेना होगा। पीठ ने कहा, "फैसला लें, वरना हम फैसला लेंगे।" अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई, जब दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की याचिका पर लंबे समय से निर्णय लंबित होने की बात सामने आई।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पिछली सुनवाई के समय सजा समीक्षा बोर्ड दारा सिंह की याचिका पर विचार कर रहा था। हालांकि, अब तक बोर्ड की ओर से कोई अंतिम फैसला अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसी देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की।

ओडिशा सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि जेल निदेशालय की ओर से एक पत्र जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि केंदुझार जिला जेल से अभी एक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही मामले में आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।

गौरतलब है कि दारा सिंह का नाम 1999 में हुए ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या ओडिशा के क्योंझर जिले में हुई थी। घटना के बाद देशभर में इस मामले को लेकर भारी विवाद हुआ था।

इस मामले में दारा सिंह को दोषी ठहराया गया था और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी सजा को बरकरार रखा था। लंबे समय से जेल में बंद दारा सिंह ने अब समयपूर्व रिहाई के लिए सजा समीक्षा बोर्ड के सामने आवेदन दिया है।

सजा समीक्षा बोर्ड किसी भी उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी की रिहाई पर विचार करते समय कई पहलुओं को ध्यान में रखता है। इसमें कैदी का जेल में व्यवहार, अपराध की प्रकृति, सजा की अवधि पूरी होना और समाज पर संभावित प्रभाव जैसे बिंदु शामिल होते हैं।

दारा सिंह की याचिका पर फैसला लेने से पहले संबंधित विभागों की रिपोर्ट और अन्य जरूरी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। हालांकि, रिपोर्ट और प्रक्रिया में देरी के कारण मामला लंबे समय से लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब ओडिशा सजा समीक्षा बोर्ड पर जल्द फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अगली सुनवाई तक बोर्ड को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

इस मामले पर देशभर की नजर बनी हुई है, क्योंकि यह एक चर्चित आपराधिक मामला रहा है। अब देखना होगा कि सजा समीक्षा बोर्ड दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की मांग पर क्या फैसला लेता है और सुप्रीम कोर्ट के सामने क्या रिपोर्ट पेश करता है।

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